अवधी साहित्य संस्थान पूर्वांचल में जगाई अलख

ब्यूरो रिपोर्ट – प्रेम कुमार शुक्ल, अमेठी

अमेठी। अवधी साहित्य संस्थान के स्थापना वर्ष में ही नया मुकाम पूर्वांचल हासिल करने जा रहा है और अवधी भाषा में संस्थान का जहां नाम रोशन होगा वहीं साहित्य जगत में उडती हुई पंक्षी के रुप में रविवार के दिन साहियकार कवि लोकगायिका और मीडिया का सारस्व्वत सम्मान कर सकार करेगा। लहुरी काशी के रुप में अमेठी की पहचान रही। जिसे अब अवधी साहित्य के रुप में अब जानी जायेगी। यह बदलाव रणवीर रणंजय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अमेठी के भूगोल विभाग के पूर्व प्रोफेसर डा0 अर्जुन पाण्डेय के अतुलनीय योगदान से साकार हो रहा है। इन्होंने पहलें पंचायत के शक्तीकरण पर पंचायतों में अलख जगायी और उनके अधिकारों को बोध कराया। इसके बाद पर्यावरण के क्षेत्र में सराहनीय योगदान इलाके को मिला। पर्यावरण में हरे वृक्षों के कटान क भरपाई के लिए बृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया और गिरते हुए भूगर्भ जल स्तर पर चिंता जताई और जलसंरक्षण के लिए जल आंदोलन चलाया। अमेठी जलबिरादरी के संयोजक के रुप में अभियान को शिखर पर पहुचाने के लिए जिले की उजैनी नदी मालती नदी मसियावं तालड्रेन समदा तालडेन आदि नादियों के पुर्नरुद्धार के लिए जन अभियान चलाया और विलुप्त नदियों को जल कल से भरी होने के लिए कुतसित प्रयास किया और अभियान में लोगों का भरपूर सहयोग मिला भारत सरकार की कैच दा रेन परियोजना को भी डा0 अर्जुन पाण्डेय ने सजाने और सवारने का भरपूर सहयोग दिया सेमिनार गोष्ठी पदयात्रा प्रतियोगिता चित्रकला, रंगोली आदि कार्यक्रमों का आयोजन डा0 पाण्डेय के लिए आम बात हो चली है।
अमेठी के प्रतापगढ मार्ग पर ओम नगर आवास आजकल अवधीसाहित्य संस्थान के संस्थापक डा0 अर्जुन पाण्डेय का नाम सुर्खियों में चल रहा है अवधी भाषा को लेकर डा0 पाण्डेय सजग हुए और अवधी साहित्य संस्थान का गठन कर अवधी भाषा को नया रुप देने का अभियान सा चला दिया। यही नही इन्हें नार्वे सरकार ने अन्तर्राराष्ट्रीय साहित्य पुरस्कार आदि कवि मुंशी प्रेमचन्द्र के जन्मदिन पर देकर सम्मानित किया इन्होंने कहानी संग्र्रह पर जब जगो तवै सवेरा का लोकार्पण कर अवधी भाषा को यादगार तुलसी जयंती पर कर दिया। सम्मान की झडी लग गयी और अमेठी के लाल को दुआएं पूरे देश से मिल रही है। अवधी साहित्य संस्थान का पहला वर्ष है लेकिन इतनी कम समय में राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता डा.राम बहादुर मिश्र अवधी साहित्य पर अनेक शोध मे संलग्न आराध्य शुक्ल सीतापुर राष्ट्रीय स्तर अवधी समीक्षक डा.विनय दास बाराबंकी समीक्षक कवि कथाकार अंतरराष्ट्रीय लोकगायिका कुसुम वर्मा लखनऊ हिमांशु श्रीवास्तव अवधी बानी चौनल के संपादक विश्वंभरनाथ अवस्थी कवि साहित्यकार अवधी साहित्य संस्थान अमेठी कहानी संग्रह पर जब जागै तबै सबेरा पर परिचर्चा सारस्वत सम्मान साहित्यकार पत्रकारों का सारस्वत सम्मान का आयोजन रविवार को अवधी साहित्य संस्थान ने किया है। इस मौके पर अवधी भाषा को संजोने और सवांरने के लिए श्रीनाथ शुक्ल, डा0 धनंजय सिंह, अमरीश मिश्रा, राजेन्द्र शुक्ल, रामबदन शुक्ल पथिक, रामकुमार तिवारी, राघवेन्द्र सिंह, डा0 फूलकली गुप्ता आदि जी जान से संस्थान तरक्की के लिए लगे है। डा0 अर्जुन पाण्डेय ने लोगों से अपील की है कि कार्यक्रम में सिरकत करे और अवधी भाषा की नई पहचान के लिए कदम से कदम मिलाएं और अवध क्षेत्र में अमेठी को नया दर्जा ताकि मिल सके।

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