जिलाधिकारी ने सम्भावित सूखा से निपटने हेतु संबंधित अधिकारियों दिए आवश्यक निर्देश।

 

अमेठी ,जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र की अध्यक्षता में वर्ष 2022 में सम्भावित सूखा से निपटने हेतु कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित हुई। जिलाधिकार ने कहा कि सूखा एक मुख्य आपदा है, सूखा धीरे-धीरे होने वाली ऐसी प्राकृतिक आपद है जो हमें निपटने का काफी समय प्रदान करता है, परन्तु जल का उचित प्रबंधन न होने के कारण समय के साथ इसका प्रभाव बढ़ता जाता है। सूखे का मुख्य कारण बारिश की कमी तथा पानी के सही संरक्षण का अभाव होना है। उन्होंने कहा कि मानसून अवधि में कम वर्षा होने की स्थिति में सूखे की स्थिति सम्भावित होती है, जिससे खरीफ की फसलों के लिए सिंचाई, मनुष्यों के लिए पेयजल और विभिन्न बीमारियों तथा पशुओं हेतु पेयजल एवं चारे के साथ-साथ विभिन्न बीमारियों का संकट भी उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि सूखा प्रबंधन हेतु योजना बनाकर राहत प्रदान करके सूखा का प्रभाव कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सूखें के प्रभाव को कम करने के लिए वर्षा के पानी का अधिकतम उपयोग करना, पानी के बहाव को कम करना तथा उसे संचित करना, पानी के परम्परागत स्त्रोतों का पुर्नजीवीकरण, अपक्रमित भूमि एवं वनों की पुनः स्थापना सुनिश्चित करना, पानी के संग्रहण एवं भू-कूपों का पुर्नभरण, मिट्टी व नमी का संरक्षण, अत्यधिक मात्रा में पेड़ लगाना तथा पेड़ों की कटाई को रोकना, फसल चक्र में फसलों का बदलाव तथा उन्नत बीज का उपयोग, कृषि के साथ अन्य प्रकार के रोजगारों व परम्परागत उद्योगों को बढ़ावा देना, लोगों में पानी बचाने के लिए जागरूकता लाना, सघन वनीकरण अभियान चलाना व पौधा रोपड़ को बढ़ावा देना। जिलाधिकारी ने पंचायती राज विभाग/ग्राम्य विकास विभाग/नगर विकास विभाग को निर्देश दिए कि पेयजल के सभी स्त्रोतों/संसाधनों की उचित मरम्मत एवं पूर्ण उपयोग हेतु तैयार किया जाए, खराब नलकूपों को समय से मरम्मत कराना सुनिश्चित करें,  पेयजल के कुओं का आवश्यकतानुसार गहरा कराना, पशुओं के पेयजल हेतु सिंचाई विभाग की नहरों/नलकूपों/निजी नलकूपों के माध्यम से तालाब एवं पोखरों को भरवाने की व्यवस्था कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने ऊर्जा विभाग को निर्देश दिए कि खराब ट्रांसफार्मर निर्धारित अवधि में बदलने की व्यवस्था तथा रोस्टर के अनुसार निर्धारित समय में निर्बाध विद्युत आपूर्ति हेतु व्यवस्था करना सुनिश्चित करें। उन्होंने सिंचाई विभाग को निर्देश दिए कि सिंचाई के सभी संसाधनों/सरकारी नलकूपों को चालू स्थिति में रहे, नहरों में रोस्टर अनुसार पानी चलाए जाने और नहरों की अवैध कटान पर कड़ी निगरानी की जाए। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि संक्रामक रोगों, महामारियों से बचाने के लिए आवश्यक निषेधात्मक व्यवस्था, सघन चिकित्सीय व्यवस्था तथा महामारियों से नियंत्रण हेतु वांछित दवाओं को चिन्हांकन करके समुचित स्टाक की व्यवस्था की जाए। उन्होंने पशुधन विभाग को निर्देश दिए कि पशुओं के चारे के अभाव की स्थिति से निपटने हेतु कार्य योजना तैयार करना, पशु चिकित्सालय में पशुओं के उपचार के संसाधन एवं दवाओं की समुचित व्यवस्था, महामारी के नियंत्रण हेतु दवाओं का चिन्हांकन करके समुचित स्टाक की व्यवस्था, खुरपका रोग, मुंहपका रोग के लिए आवश्यक दवाओं की व्यवस्था की जाए। उन्होंने खाद्य एवं रसद विभाग को निर्देश दिए कि आकस्मिकता हेतु आवश्यक खाद्यान्न एवं उपभोक्ता वस्तुओं की व्यवस्था की योजना, कुपोषण की स्थिति से निपटने हेतु कार्ययोजना तथा खाद्य सुरक्षा योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने कृषि विभाग व उद्यान विभाग को निर्देश दिए कि मृदा में नमी संरक्षण के उपायों का प्रचार-प्रसार किया जाए, वैकल्पिक फसलों के साथ खाद्य एवं बीज के प्रबन्ध की योजना तथा फसलों में रोग बचाव हेतु कीटनाशक दवाओं की समुचित व्यवस्था की जाए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ अंकुर लाठर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 विमलेंदु शेखर, जिला विकास अधिकारी तेजभान सिंह, जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडे, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, अधिशासी अभियंता नलकूप, अधिशासी अभियंता विद्युत, उप जिलाधिकारी गौरीगंज राकेश कुमार, जिला आपदा विशेषज्ञ प्रदीप कुमार सहित अन्य सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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