मसूरी के राष्ट्रीय सुशासन केंद्र में श्रीलंका के समाजवादी गणराज्य के सिविल सेवकों के लिए आज से शुरू हुआ दूसरा क्षमता निर्माण कार्यक्रम 

कार्यक्रम में संभागीय सचिवों, सहायक मुख्य सचिवों, निदेशकों, उप निदेशकों और सहायक संभागीय सचिवों के रूप में कार्यरत 40 सिविल सेवक भाग ले रहे हैं दो सप्ताह के कार्यक्रम का उद्देश्य श्रीलंका के सिविल सेवकों को अगली पीढ़ी के कौशल प्रदान करना है राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) द्वारा श्रीलंका के वरिष्ठ सिविल सेवकों के लिए आयोजित दूसरा क्षमता निर्माण कार्यक्रम आज मसूरी में शुरू हुआ। कार्यक्रम 26 फरवरी, 2024 से 8 मार्च, 2024 तक आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में श्रीलंका के 40 वरिष्ठ सिविल सेवा अधिकारी भाग ले रहे हैं, जो निदेशक, उप निदेशक, नगरपालिका सचिव, मंडल सचिव, सहायक मंडल सचिव, उपायुक्त, उप भूमि आयुक्त, प्रांतीय निदेशक, सहायक मुख्य सचिव, प्रांतीय खेल निदेशक सहित अन्य दायित्वों के अंतर्गत काम कर रहे हैं। श्रीलंका के वरिष्ठ सिविल सेवकों के पहले समूह ने 12 से 17 फरवरी, 2024 तक राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) का दौरा किया। 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्रीलंका के प्रधानमंत्री के सचिव श्री अनुरा डिसनायका ने किया। सुशासन के लिए राष्ट्रीय केंद्र (एनसीजीजी) भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक नीति और शासन दोनों में अनुसंधान, अध्ययन और क्षमता निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) के महानिदेशक और प्रशासन सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) के सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने राष्ट्रीय सुशासन केंद्र के परिचालन ढांचे और इस केंद्र के गठन के बाद से हासिल की गई पर्याप्त प्रगति का परिचय दिया। अपने संबोधन में, उन्होंने शासन में नए प्रतिमानों (2014-2024) पर गहन विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने नीति सिद्धांत “अधिकतम शासन – न्यूनतम सरकार” के अंतर्गत नागरिकों और सरकार को करीब लाने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी को अपनाने में अनुकरणीय सफलता पर प्रकाश डाला। केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से लोक शिकायत निवारण जैसी उल्लेखनीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया, जिससे जनता को होने वाले लाभों पर बल दिया गया। इसके अलावा, ई-उन्नत, निवेश मिस्त्र और सेवा सिंधु सहित महत्वपूर्ण ई-गवर्नेंस ढांचे प्रस्तुत किए गए, जो व्यापक प्रशासन के लिए डिजिटल समाधानों का लाभ प्राप्त करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। इस कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य भारत में शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण को बढ़ाने के लिए लागू किए गए ज्ञान और नवाचारों के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना है। प्रतिभागियों को परिवर्तनकारी प्रभाव की क्षमता पर बल देते हुए भारत के सफल ई-गवर्नेंस मॉडल को श्रीलंका में लागू करने की संभावना तलाशने और उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। एसोसिएट प्रोफेसर और पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. एपी सिंह ने एक सिंहावलोकन देते हुए कहा कि एनसीजीजी देश में की गई विभिन्न पहलों को साझा कर रहा है जैसे भूमि अधिग्रहण, शासन के बदलते प्रतिमान, सभी के लिए आवास: डिजिटल प्रौद्योगिकी का लाभ प्राप्त करना, विशेष संदर्भ में तटीय क्षेत्र में आपदा प्रबंधन, पीएम जन आरोग्य योजना, सार्वजनिक निजी भागीदारी, स्वामित्व योजना, जीईएम: शासन में पारदर्शिता लाना, आधार बनाना: सुशासन के लिए एक उपकरण, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा, परिपत्र अर्थव्यवस्था और चुनाव प्रबंधन आदि। इंदिरा गांधी वन राष्ट्रीय अकादमी, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान और प्रतिष्ठित ताज महल जैसे प्रसिद्ध संस्थानों की क्षेत्रीय यात्राएं सीखने के अनुभव को और समृद्ध करती हैं, शासन और सामाजिक गतिशीलता में व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्रदान करती हैं। राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) ने विदेश मंत्रालय के साथ साझेदारी में 17 देशों-बांग्लादेश, केन्या, तंजानिया, ट्यूनीशिया, सेशेल्स, गाम्बिया, मालदीव, श्रीलंका, अफगानिस्तान, लाओस, वियतनाम, नेपाल, भूटान, म्यांमार, इथियोपिया, इरेट्रिया और कंबोडिया के सिविल सेवकों को प्रशिक्षण दिया है। क्षमता निर्माण कार्यक्रम की देखरेख डॉ. एपी सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर और पाठ्यक्रम समन्वयक, डॉ. मुकेश भंडारी, एसोसिएट पाठ्यक्रम समन्वयक और राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) की समर्पित टीम द्वारा की जाएगी।  

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राजस्थान में भारत-जापान संयुक्त अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’का शुभारंभ

भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’का 5वां संस्करण आज राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में शुरू हुआ। इस अभ्यास का आयोजन 25 फरवरी से 9 मार्च 2024 तक किया जा रहा है। अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’एक वार्षिक सैन्य अभ्यास है और इसका वैकल्पिक रूप से आयोजन भारत और […]

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भारतीय नौसेना के मिशन में तैनात युद्ध पोत ने संकट में फंसे एमवी आइलैंडर जहाज को महत्वपूर्ण विस्फोटक आयुध निपटान और चिकित्सा सहायता प्रदान की

पलाऊ देश के ध्वज वाहक एमवीआइलैंडर जहाज में 22 फरवरी 2024 को ड्रोन/मिसाइल द्वारा संभावित हमले के बाद आग लग गई थी। संकट में फंसे इसे पोत के सहायता आग्रह पर तेजी से कार्रवाई करते हुए 22 फरवरी 2024 की दोपहर में भारतीय नौसेना के विध्वंसक पोत इस जहाज के आसपास के क्षेत्र में पहुंचे।  […]

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विनियमन की रूपरेखा बनाने के लिए हमारा दृष्टिकोण खुला, पारदर्शी और परामर्शात्मक रहा है, जबकि पिछली सरकारें कुछ सबसे बड़े घोटालों में लिप्त थीं: राज्य मंत्री राजीव चन्द्रशेखर

यह सरकार के विनियमन के साथ-साथ हमारी अर्थव्यवस्था के व्यवस्थित विकास के लिए सभी हितधारकों को सशक्त बनाने के संदर्भ में है: राज्य मंत्री राजीव चन्द्रशेखर हम अपने आर्थिक विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य देखभाल और कृषि सहित अन्य क्षेत्रों पर एआई के व्यापक प्रभाव को सुनिश्चित करते हुए इसका पूर्ण […]

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जापान ने भारत में विभिन्न क्षेत्र की नौ परियोजनाओं के लिए 232.209 अरब जापानी येन (जेपीवाई) का आधिकारिक विकास सहायता (ओडीए) ऋण देने की प्रतिबद्धता जताई

जापान सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में नौ (09) परियोजनाओं के लिए 232.209 अरब जापानी येन की राशि का आधिकारिक विकास सहायता (ओडीए) ऋण देने की प्रतिबद्धता जताई है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग में अतिरिक्त सचिव श्री विकास शील और भारत में जापान के राजदूत श्री सुजुकी हिरोशी के बीच आज इस संबंध में ऋण की स्वीकृति का […]

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भारतीय नौसेना और रॉयल थाई नौसेना के बीच द्विपक्षीय नौसैन्य अभ्यास के पहले तथा भारत-थाईलैंड समन्वित गश्ती अभियान के 36वें संस्करण का आयोजन

भारतीय नौसेना (आईएन) और रॉयल थाई नौसेना (आरटीएन) के बीच पहला द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास 20 से 23 दिसंबर 2023 तक आयोजित किया गया था। इस अभ्यास के प्रारंभिक संस्करण में भारतीय नौसेना के स्वदेश निर्मित पोत कुलिश और आईएन एलसीयू 56 ने भाग लिया। वहीं रॉयल थाई नौसेना की तरफ से हिज़ थाई मेजेस्टी शिप […]

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शिथिल धारणाएँ ब्रह्माण्ड के ठंडे डार्क मैटर पर बेहतर प्रकाश डाल सकती हैं

वैज्ञानिकों ने कोल्ड डार्क मैटर (सीडीएम), एक काल्पनिक गहरा द्रव्य जो वर्तमान ब्रह्मांड का 25 प्रतिशत हिस्सा है, का पता लगाने के लिए एक नया दृष्टिकोण खोजा है, वर्तमान ब्रह्मांड में, लगभग 70 प्रतिशत डार्क एनर्जी और 25 प्रतिशत डार्क मैटर का हिस्सा है – इन दोनों के बारे में आज तक बहुत कम जानकारी […]

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थर्टी मीटर टेलिस्कोप (टीएमटी) की प्रगति पर चर्चा के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हवाई का दौरा किया

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) में मौना केआ , हवाई, का दौरा किया और थर्टी मीटर टेलीस्कोप (टीएमटी) परियोजना की प्रगति में आ रही चुनौतियों और उन्हें दूर करने के तरीकों पर चर्चा की। थर्टी मीटर टेलीस्कोप (टीएमटी) एक 30 मीटर व्यास वाला प्राथमिक प्रकाशिक दर्पण  एवं  इन्फ्रारेड दूरबीन (प्राइमरी मिरर ऑप्टिकल एंड  इन्फ्रारेड टेलीस्कोप)  है जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए)  के मौना केआ, हवाई, में स्थापित किया जा रहा है। भारत इस परियोजना में एक संस्थापक–सदस्य भागीदार है जिसका उद्देश्य ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड खगोल विज्ञान के माध्यम से ब्रह्मांड में नए  आयाम (न्यू विन्डोज)  खोलना है। इस परियोजना में भारतीय […]

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RV9 NEWS

दिसंबर 2023 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति दर 5.69 प्रतिशत रही

दिसंबर 2023 के लिए ग्रामीण, शहरी और संयुक्त हेतु आधार वर्ष 2012=100 पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़े सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने दिसंबर 2023 (अनंतिम) के लिए ग्रामीण (आर), शहरी (यू) तथा संयुक्त (सी) हेतु आधार वर्ष 2012=100 पर अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और तदनुरूपी उपभोक्ता खाद्य मूल्य […]

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नीति आयोग और विश्व खाद्य कार्यक्रम ने भारत, एशियाई और अफ्रीकी देशों में मुख्य रूप से प्रचलित मोटा अनाज पर प्रेरक कहानियों का संग्रह जारी किया

भारत सहित एशियाई और अफ्रीकी देशों के अनुभवों को प्रदर्शित करने वाली क्षेत्रीय कहानियों का एक संग्रह आज नई दिल्ली में जारी किया गया। यह सार-संग्रह दुनिया भर में मोटा अनाज को अपनाने में क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ाने में सहायता करेगा। यह नीति आयोग और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के सहयोग से जुलाई 2022 में शुरू की गई एशिया और अफ्रीका में मोटा अनाज मुख्यधारा के लिए अच्छी प्रथाओं का मानचित्रण और आदान-प्रदान (एमईजीपी) पहल के सफल कार्यान्वयन का भी प्रतीक है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष, श्री सुमन बेरी ने सार संग्रह जारी करने के कार्यक्रम को संबोधित किया। श्री सुमन बेरी ने कहा, “भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष 2023 के दौरान जलवायु सुगमता, खाद्य सुरक्षा और छोटे किसानों, विशेषकर महिलाओं की आजीविका के लिए मोटा अनाज को सफलतापूर्वक प्रोत्साह प्रदान किया है। मोटा अनाज पर ये कहानियाँ मुख्यधारा में लाने से अभ्यासकर्ताओं और संस्थानों को एक साथ लाई गई विविध अच्छी प्रथाओं से सीखने के लिए प्रेरणा मिलेगी। मोटा अनाज को और अधिक फैशनेबल या लोकप्रिय बनाया जाना चाहिए क्योंकि इसके, विशेषरूप से जीवनशैली से संबंधित विकल्पों के लिए स्वास्थ्य लाभ हैं।” भारत में विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) की कंट्री डायरेक्टर, सुश्री एलिजाबेथ फॉरे ने इस बात पर बल देते हुए कहा, “छोटे किसानों की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ तैनाती, ज्ञान हस्तांतरण, नीति संवाद और अध्ययन दौरों के माध्यम से सहयोग भारत में विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति है। इस सार-संग्रह में विभिन्न देशों को मोटा अनाज जैसी पारंपरिक जलवायु सुगम फसलों को सीखने और निवेश करने में मदद करने के लिए प्रेरणादायक विषय पर कहानियां सम्मिलित हैं।” आशा है कि यह संग्रह मोटा अनाज को मुख्यधारा की खाद्य प्रणालियों में एकीकृत करने के लिए एक संदर्भ के रूप में कार्य करेगा, जो दक्षिण-दक्षिण सहयोग और नीति संवादों के माध्यम से सूचित निर्णय लेने और आदान-प्रदान करने के लिए अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा। संग्रह के जारी करने के दौरान खुली चर्चा में जो कुछ क्षेत्र सामान्य रूप से सामने आए उनमें मुख्य भोजन के रूप में मोटा अनाज को प्रोत्साहन देना, मोटा अनाज के माध्यम से आहार विविधीकरण और निवेश और उत्पादकता में केंद्रित वृद्धि सम्मिलित है। संग्रह जारी करने और इस दौरान चर्चा में सुश्री प्रदन्या पैठनकर, प्रमुख इकाई-जलवायु परिवर्तन, सुगम खाद्य प्रणाली और डीआरआर, डब्ल्यूएफपी, डॉ. राजेश्वर चंदेल, कुलपति, डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश, श्री संजय अग्रवाल, सहायक महानिदेशक, आईसीआरआईएसएटी और शेफ मंजीत गिल, अध्यक्ष, इंडियन फेडरेशन ऑफ क्यूलिनरी एसोसिएशन भी उपस्थित थे।।

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