एनडीआरएफ टीम ने जिलाधिकारी के साथ किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

ब्यूरो प्रमुख – एन. अंसारी

गोरखपुर, राप्ती और रोहिणी नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को ध्यान में रखते हुए एनडीआरएफ और जिला प्रशासन की एक संयुक्त टीम जिलाधिकारी विजय किरण आंनद के नेतृत्व में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बहरामपुर ,मुंडेरी चाक, हनुमान चक, बसंतपुर, राजघाट, अमरुद मंडी, चकरा अव्वल, छपरा तोएम तिलोनिया , कठोर ,पिपरी गांव, चनव गांव , बाघा गारा,गावों की स्थिती का जायजा लिया। इस दौरान साथ मे एनडीआरएफ के इस्पेक्टर डी. पी. चंद्रा, तहसीलदार सदर लालजी विश्वकर्मा, राजस्व निरीक्षक नगर (प्रद्युम्न सिंह) सिंचाई विभाग की टीम
और मीडिया बंधु भी मौजूद रहे। दौरे के दौरान उन्होंने क्षेत्र की गली गली मे जाकर घरों की स्थिति का भी जायजा लिया। जहां पानी भरा हुआ था। डीएम ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित जिन क्षेत्रों के घरों में पानी भर गए हैं। उस में रह रहे लोगों को तत्काल राहत कैंपों में पहुंचाया जाए। और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों को राहत सामग्री तत्काल उपलब्ध कराये जाने का भी निर्देश दिया। नगर निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी भर गया है। उन क्षेत्रों में समुचित साफ-सफाई के बाद आवश्यक दवाओं का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए। एनडीआरएफ की इस्पेक्टर डी.पी. चंद्रा ने बाढ़ प्रभावित लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में एनडीआरफ टीम उनके साथ खड़ी है। और हर स्तर पर मदद करेगी। उन्होंने लोगों को परेशानी के इस दौर में कतई न घबराने का भरोसा दिया। और कहां की एनडीआरएफ की 2 टीमें चरगांवा स्थित कैंप में तैयार है। और किसी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार व मौजूद है।संभावित बाढ़ को देखते हुए एनडीआरएफ की टीम अपने जिले में तैनात है। टीम अत्याधुनिक बाढ़ बचाव उपकरण, कटिंग टूल्स व उपकरण, संचार उपकरण, मेडिकल फर्स्ट रिस्पांडर किट, डिप डाइविंग सेट, इनफ्लैटेबल लाइटिंग टावर आदि से लैस है। पहले से ही एनडीआरएफ की टीम संबंधित कार्यक्षेत्र वाले जिलों में कम्युनिटी अवेयरनेस एवं कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम करती है। इसमें आम जनता व आपदा में कार्य करने वाले कर्मियों को बाढ़ से पहले की तैयारी, बाढ़ बचाव की जानकारी, अस्पताल पूर्व चिकित्सा व रेसक्यू करने का तरीका तथा अन्य सुरक्षात्मक कार्यवाहीयों के बारे में जानकारी दी गई। ताकि बाढ़ आने पर जान व माल की जोखिम को कम किया जा सके।

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