एडीजी जोन ने मंदबुद्धि कौशल्या का कटवाया विदाई केक पिता को किया सुपुर्द

ब्यूरो प्रमुख – एन. अंसारी, गोरखपुर

2 वर्ष पूर्व दिल्ली से लापता हुई थी कौशल्या तीन बच्चों की मां 20 वर्ष पूर्व बच्चे को जन्म देते दिमागी संतुलन हुआ था खराब

मातृछाया फाउंडेशन के आलोक मणि त्रिपाठी अब तक 63 मंदबुद्धि को परिजनों से मिलवाया

गोरखपुर। एडीजी जोन अखिल कुमार मातृछाया फाउंडेशन पहुंचकर मंदबुद्धि कौशल्या का विदाई केक कटवा कर बेगूसराय बिहार के आए पिता रामचंद्र पंडित को पुत्री कौशल्या को किया सुपुर्द। मातृछाया फाउंडेशन निदेशक आलोक मणि त्रिपाठी मंदबुद्धि महिला को उसके परिजन पिता रामसेवक पंडित से मिलाकर मानवता की सच्ची मिसाल पेश की है। रुधौली थाना बछवारा जिला बेगूसराय बिहार निवासिनी फरवरी 2020 दिल्ली अपने पति रामचंद्र पंडित के पास से लापता हो गई थी पति अपने मंदबुद्धि पत्नी को खोजने का प्रयास नहीं किया जो तीन बच्चों अनिकेत शबनम प्रीति का बाप है मंदबुद्धि कौशल्या उर्फ सुनीता लगभग 20 वर्षों से प्रीति को जन्म देते समय दिमाग की रुप से पागल हो गई तब से उसका पति दिल्ली में तमाम डॉक्टरों को दिखाया लेकिन कौशल्या ठीक नहीं हुई फरवरी 2020 को अपने पति के पास से गायब हो गई गोरखपुर रेलवे स्टेशन के पास मातृछाया फाउंडेशन के पालनहार आलोक मणि त्रिपाठी को मिल गई गांधी आश्रम गली स्थित मातृछाया फाउंडेशन पर रख कर सेवा व दवा कराया जो अब लगभग 90% कौशल्या ठीक हो गई है अपने व अपने लोगों को भलीभांति पहचान रही है श्री त्रिपाठी कौशल्या के परिजनों से मिलाने के लिए पता लगाने की अपने सूत्रों से कोशिश किया जानकारी प्राप्त होने के बाद पिता रामचंद्र पंडित को सूचना दीया। पिता रामचंद्र पंडित अपनी पुत्री को पाकर प्रफुल्लित हो गए कहा कि 2 वर्षों से गायब हमारी पुत्री आलोक मणि त्रिपाठी की वजह से हमें प्राप्त हो गए ऐसे नेक इंसान की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। कौशल्या को एडीजी जोन अखिल कुमार मातृछाया फाउंडेशन पहुंचकर पिता रामचंद्र पंडित को सुपुर्द करने से पहले एडीजी जोन ने कौशल्या का विधवत केक कटवाकर विदाई साजो सामान देकर पिता को सुपुर्द किया एडीजी जोन अखिल कुमार ने बताया कि आलोक मणि त्रिपाठी बगैर किसी सरकारी सहायता के अपने व अपने सहयोगियों की मदद से मातृछाया फाउंडेशन को चला कर बिछड़े मंदबुद्धि महिलाओं को परिजनों से मिलाने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है।

ऐसे लोगों की जितनी तारीफ की जाए कम है आलोक मणि त्रिपाठी अब तक 63 बिछड़े मंदबुद्धि लोगों को परिजनों से मिलाने का काम कर चुके हैं और आगे भी करते रहेंगे।

इस अवसर पर शुभी पाण्डेय संध्या त्रिपाठी शिक्षा मणि अन्नू वर्मा संतोष मौर्याप्रियेश मालवीय धीरेंद्र राय आसिफ अली सभी स्टाफ एवं सदस्य मौजूद थे।

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