भोले-भक्तों के लिए खुशखबरी! अब नेपाल या चीन नही, सीधे उत्तराखंड से जा सकेंगे कैलाश मानसरोवर

ब्यूरो रिपोर्ट- हरेन्द्र कुमार यादव

 

चीन सीमा को जोड़ने वाली सामरिक महत्व की घट्टाबगड़-लिपुलेख सड़क 2 साल में पक्की बन जाएगी. इस सड़क के चौड़ा और हॉटमिक्स होने से स्थानीय गांवों के लोगों और सुरक्षा बलों के जवानों को तो बेहतर आवागमन की सुविधा तो मिलेगी ही कैलाश मानसरोवर यात्रा भी सुगम हो जाएगी.

केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में जानकारी दी कि दिसंबर 2023 तक सड़क बनने के बाद कैलाश मानसरोवर की यात्रा आसानी से कर सकेंगे. श्रद्धालुओं को नेपाल या चीन के रास्ते कैलाश मानसरोवर नहीं जाना पड़ेगा. लोग पिथौरागढ़ से सीधे सड़क मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा सकेंगे. इसके लिए सड़क को बेहतर बनाया जा रहा है.

सामरिक महत्व को देखते हुए वर्ष 2006 में गर्बाधार से लिपुलेख तक सड़क का निर्माण शुरू किया गया था. तब वर्ष 2012 तक इस सड़क का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण तय समय पर सड़क नहीं कट सकी. मालपा सहित अन्य स्थानों पर बेहद कठोर चट्टानों को काटने के लिए आधुनिक मशीनों को हेलिकॉप्टर से वहां पहुंचाया गया.

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