बेटियां पिता को कंधे पर लेकर श्मशान घाट जाती हुईं


एकाएक देखा कि शाम के अंधकार में बगल से दो बच्चियां और दो पुरुष लाश लेकर जा रहे हैं|यह दृश्य देखकर मैं आवाक और अत्यंत दुखी हो गया| तेजी से पहुंचकर लाश के साथ चलते हुए परिचय और जानकारी किया|मऊ,भीटी निवासी मृतक अमरनाथ मद्धेशिया को पुत्री पूजा मद्धेशिया,नतिनी खुशी मद्धेशिया और मृतक के भाई सुभाष मद्धेशिया और प्रकाश मद्धेशिया पार्थिव शरीर को कंधे पर लेकर तमसा के किनारे स्मशान घाट जा रहे थे| साथ में केवल एक पुत्री वैजयंती मद्धेशिया चल रही थी| घर गांव मोहल्ला अड़ोस पड़ोस इष्ट मित्र रिश्ते नाते का कोई और व्यक्ति साथ में नहीं था|जीवन के अंतिम दिन यह परिस्थिति देखकर मन अत्यंत चिंतित हो गया|मैंने दाह संस्कार में दिक्कत परेशानी की जानकारी किया तो तत्काल में काम चलाने की व्यवस्था थी|इस समय मैं ज्यादा कुछ नहीं पूछ सकता था|लेकिन इतना स्पष्ट हो गया कि परिवार बहुत परेशानी और मुसीबत में है|मैं बहुत भावुक हो गया था,कुछ बोल नहीं पा रहा था| मैंने कहा मैं कल आपके घर आना चाहता हूं|साथ में चल रही पुत्री वैजयंती मद्धेशिया ने अपना मोबाइल नंबर दिया|

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