अमेठी की राजनीति में स्मृति ईरानी नहीं कर पा रहीं कमाल, बिपक्ष के कईयो का साथ

 

  • अमेठी जिले को स्मार्ट सिटी की घोषणा की लेकिन घोषणा ली वापस
  • वर्तिका सिंह अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज के मामले में हुई कीच कीच
  • ब्लाक प्रमुख के चुनाव में सपा और जनसत्ता दल को मिला वाकओवर, भाजपा लडखाई

ब्यूरो रिपोर्ट- प्रेम कुमार शुक्ल, अमेठी

अमेठी। भारतीय जनता पार्टी को मौका अमेठी जिले की जनता ने राजनीति और बिकास करने का भरपूर मौका दिया। लेकिन सांसद, बिधायको के साथ ही साथ भारतीय जनता पार्टी अमेठी जिले का संगठन पूरी तरह से हीट नहीं हो पा रहा है। और धीरे-धीरे मजा किरकिरी हो रहा है।

अमेठी जिले को तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री महिला एवं बाल विकास भारत सरकार स्मृति जुबिन ईरानी ने “स्मार्ट सिटी योजना” में शमिल करने की घोषणा की। लेकिन घोषणा की अमल करने के बजाय “स्मार्ट सिटी योजना” को मंत्री ईरानी ने वापस ले लिया। अमेठी की जनता इस बिकास से हकाबका रह गई। अब सरकारी योजनाओं के कार्यक्रमों के सहारे बिकास रथ अमेठी में दौड़ रहा हैं। अमेठी में द्वेष की राजनीति ने बिकास को राह नहीं पकडने नहीं दिया । कांग्रेस की बन्द योजना, भूमि अधिग्रहण के पर सवाल खड़े किए गए। जिस तरीके से अमेठी में सुरक्षित लोगों का जीवन रहा। रोजगार, सडकें, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवाहन की सुबिधा केंद्र – प्रदेश सरकार से मिलीं। वैसे नहीं ना मिल पा रहा हैं और ना दिख रहा है।

जनता की चौपाल नहीं लग रही है। सिर्फ सरकारी विभागों के अधिकारियों के सहारे काम टरकाया जा रहा। अमेठी के सांसद, बिधायक और भारतीय जनता पार्टी अमेठी जिले का संगठन में बेहतर ताल मेल का प्रर्दशन नहीं हो रहा है। जबकि खुश नसीब भाजपा के साथ सपा, बसपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ ही साथ पूर्व बिधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद भी खड़े हैं। लेकिन जिले में भाजपा की सरकार केंद्र और प्रदेश में इन नेताओं को तवज्जो नहीं मिल रहा हैं। हैरतअंगेज बात यह है कि एक मंच पर ना माननीयों का कार्यक्रम अब तक नहीं हो रहा है। और ना ही संबाद करने को राजी हैं। पूर्व बिधायक, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री, वरिष्ठ और युवा पीढ़ी के नेताओं को ही मंच पर राजनीति करने का अवसर मिल पा रहा है। जिले में कोई परियोजना भी नहीं भाजपा चला पायीं जिसका नाम लेकर भाजपा या जनता ही माला जप ले। अपवाद नहीं बल्कि सच्चाई है।केन्द्र – प्रदेश में पूर्ण बहुमत की गठबंधन की सरकार है और साठ फीसदी जनता गांव में रहती है। और ग्राम पंचायतों को सामान्य निर्वाचन 2021 के बाद संगठित किया गया। जो ग्राम पंचायत असंगठित रहीं। उप चुनाव कराकर संगठित प्रदेश सरकार ने करवाया। लेकिन बसपा, सपा और भाजपा सरकारों में ग्राम पंचायते खुली बैठकें नहीं की। मान ले कहीं बैठक हुई भी है।तो दो तिहाई बैठक का कोरम अपवाद स्वरूप कही पूरा नहीं हुआ। यह भय मुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त का दावा करने वाली सरकारों का हाल हैं। चार साल बेमिसाल और सबका साथ सबका बिकास का दावा कहा फीट हो रहा है।

 

सहकारिता विभाग की साधन सहकारी समितियों एवं जिला सहकारी बैंक, उपभोक्ता सहकारी संघ की समितियां के सहारे किसान अपनी सहूलियत को पूरा करता था। कृषि विभाग के राजकीय कृषि बीज एवं कृषि रक्षा इकाई और भण्डारो से किसानों को आन लाइन सुविधा पिछले छह साल से की जा रही है। लेकिन बिजली के कनेक्शन नहीं है। कम्प्यूटर, प्रिन्टर नहीं लग पाए हैं। जहा भवन सुरक्षित हैं। वहाँ किसानों को फोटो स्टेट अभिलेख के करने। पीएम किसान सम्मान निधि योजना में जिन किसानों के बचत खाता और आधार कार्ड नम्बर, आधार बैंक में लिंक होने में गडबडी हैं उसे सुधार करने के लिए भारत सरकार की पोर्टल में प्रदेश सरकार का कोई दखल नहीं है।

भाजपा जिला संगठन मे सांसद, बिधायक, जिला पदाधिकारी की दखलंदाजी है। इसे नाकार नही सकते हैं। अभी त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन सामान्य 2021 का चुनाव हुआ। जिसमें जिला पंचायत सदस्य पद के लिए सामान्य वार्डों में ब्रह्मण, क्षत्रिय, कायस्थ को भाजपा समर्थित प्रत्याशी बनाने में कोई कोताही की गयी। यहीं भाजपा ने बिराम नही लगाया। ब्लाक प्रमुख पद के लिए आनारक्षित रहीं। और पांच सीटों पर क्षत्रियों को प्रमुख पद का समर्थित प्रत्याशी घोषित किया गया। ब्राह्मण, कायस्थ को भाजपा का समर्थित प्रत्याशी नहीं बनाया था। सबसे खास बात यह है कि जामो और मुसाफिरखाना की प्रमुख पद के प्रत्याशी का नाम भाजपा ने रिक्त रखीं थी। संगामपुर में भाजपा को जीतने में क्या हुआ। बिधायक प्रतिनिधि के साथ धक्का मुक्की के बाद धरने पर बैठे। पुलिस पर सहयोग ना करने का आरोप जडा। और भाजपा प्रत्याशी उप बिजेता बना। भेटुआ ब्लाक में भाजपा प्रत्याशी सचेन्द कुमार सिंह उर्फ राजू सिंह को किसी बीडीसी ने वोट ही नहीं दिए। जबकि भाजपा समर्थित प्रत्याशी ने अपना भी वोट किसी प्रत्याशी को दे दिया। यह मतगणना के परिणाम के बाद खबर मिली। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में चौदह निर्दल प्रत्याशी जीत हासिल की। और तेरह ब्लाकों के प्रमुख पद के चुनाव में दो सीटों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी ही उतारे। और पांच प्रमुख भाजपा के जीते हैं तो चार निर्दल प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। लेकिन भाजपा को चलाने वाला बिजय का बिश्वाश डिगडिगा रहा।

अमेठी लोकसभा क्षेत्र के पूर्व मंत्री, पूर्व बिधायक, पूर्व सांसद भी भाजपा का सम्मान बचाने के लिए चुप है। एक पूर्व मंत्री जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव लिए प्रार्थना पत्र दिया । तो भाजपा ने बिचार करने योग्य प्रार्थना पत्र नहीं रहा। लेकिन चुनावी समर में नहीं पूर्व बिधायक एवं पूर्व मंत्री नहीं उतरे। जबकि दूसरे पूर्व मंत्री ने अपने पुत्र के लिए ब्लाक प्रमुख पद के लिए पार्टी से प्रत्याशी बनाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। तो पार्टी ने बिचार नही किया। जिसे भाजपा ने समर्थित प्रत्याशी बनाया। उसने भी अपना वोट दूसरे निर्दल प्रत्याशी को देकर पार्टी को भेटुआ प्रमुख के पद के चुनाव मे बिजय होने के बजाय पराजय में शमिल करा दिया।उन्होंने पार्टी को स्वामी बिबेकानन्द जी के सिकागो मे “सिफर यानी जीरो” पर दिए भाषण को याद दिला दिया।

सवाल उठता है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा ने सताईस वोट से बिजय हासिल की। और सपा प्रत्याशी शीलम सिंह को चार वोट सिर्फ मिले। जबकि आठ जिला पंचायत सदस्य जीत हासिल की। और एक जिला पंचायत सदस्य भादर मुकेश यादव सपा नेता पार्टी प्रत्याशी को पराजित बिजय हासिल की। तो वहीं अमेठी से गीता यादव पत्नी सुनील कुमार यादव को बिजय का प्रमाण पत्र मिला। बाद में आयोग के अधिकारियों ने कृष्णा चौरसिया को बिजय का प्रमाणपत्र हासिल करा दिया। लेकिन सपा को सिर्फ चार वोट मिला। जबकि सपा प्रत्याशी शीलम सिंह के सपा बिधायक राकेश प्रताप सिंह ने अपने बिधान सभा क्षेत्र में गौरीगंज, मुसाफिरखाना मे सपा समर्थित प्रत्याशी को बिजय श्री हासिल करायी। और जामो में पूनम कुमारी सरोज निरबिरोध चुनाव जीती। तो वहीं शाहगढ में सदाशिव यादव कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के रूप में बिजय श्री हासिल की। और कांग्रेस यम यल सी दीपक सिंह ने अपनी पकड बतायी। लेकिन इन चुनाव के नतीजों से अशंकाओ को बल मिल रहा है कि कही भाजपा ने ब्लाक प्रमुख के चुनाव में बिपक्ष को वाकवोबर तो नहीं दे दिया। कारण मुसाफिरखाना और जामो में भाजपा समर्थित प्रत्याशी का नाम सूची में रिक्त रहा। और गौरीगंज में भाजपा समर्थित प्रमुख प्रत्याशी को प्रस्तावक और अनुमोदक नही मिल पाया। और सत्ता में बैठीं भाजपा बिजय का मुंह ताकती रह गई। राजनीति में कांव कांव चलता है।वर्तिका सिंह अंतर्राष्ट्रीय निशानेबाज ने केन्द्रीय मंत्री के ऊपर आरोप लगाया। थोड़ा किच किच हुई यह कोई राजनीति में नई बात नहीं है। अदालत में मामला आया और चला गया। राजनीति और बिकास में भाजपा के पाव भरी होने के आसार हैं। लेकिन यह वक्त ही तय करेगा।

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