जानिए, कौन हैं गोरखपुर के नए पुलिस मुखिया विपिन टाडा

ब्यूरो रिपोर्ट- हरेन्द्र यादव,गोरखपुर 

    गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिलों में तैनात 14 आईपीएस अधिकारियों का तबादला यूपी सरकार ने कर दिया है। अब जिलों में नए एसएसपी और एसपी तैनात किए गए हैं। इन जिलो में गोरखपुर भी शामिल है। बलिया एस पी विपिन टाडा को गोरखपुर का नया एसएसपी बनाया गया है।

कौन हैं विपिन टाडा-

2012 बैच के आईपीएस अधिकारी विपिन टाडा मूल रूप से जोधपुर के राजस्थान के रहने वाले हैं। विपिन टाडा ने एमबीबीएस की पढ़ाई की है। पिता मच्छी राम पेशे से वकील हैं। इसके अलावा वह मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर और पूर्व मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सतपाल सिंह के दमाद हैं।

अपराधियों में रहते है खौफ–

आईपीएस बनने के बाद वह अपने सख़्त रवैए के लिए जाने जाते हैं. अपने काम और ज़िम्मेदारी को लेकर वह ट्रेनिंग के दौरान से ही काफ़ी गम्भीर रहे हैं. विपिन टाडा रामपुर के भी कप्तान रहे हैं और उस दौरान उन्होंने एक व्यापारी को अपहरण कर फिरौती के मामले का महज़ कुछ ही दिनों खुलासा कर दिया था जिसके बाद उनकी काफ़ी तारीफ़ हुई थी और वह सुर्खियों में आए थे। डा. विपिन टाडा ईनामी बदमाशों को सलाखों के पीछे भेजने और जिले में कानून व्यवस्था कायम रखने के उत्कृष्ट कार्याें के लिए सम्मानित भी किए जा चुके हैं।

बोर्ड परीक्षा में कम अंक पाकर भी बने एसपी-

विपिन टाडा बेसिक शिक्षा छोटे से स्कूल में हासिल की। रोज साइकिल से स्कूल जाते थे। सातवीं कक्षा में अच्छे नंबर आए तो परिजनों ने आठवीं और नवमीं क्लास के बजाय हाईस्कूल का एग्जाम दिलवा दिया, जिसमें उनके मात्र 56 प्रतिशत अंक आए। इसके बाद इंटर में 62 फीसदी अंक प्राप्त हुए। उन्होंने डॉक्टर बनने का अपना लक्ष्य पहले से ही निर्धारित कर रखा था।

इसके लिए उन्होंने पूरी लगन से पढ़ाई की। उन्होंने इंटर के बाद एक साल कोचिंग की। पहले प्रयास में 2002 में एमबीबीएस के लिए सलेक्ट हो गए। इसके बाद राजस्थान के एक गांव में सरकारी अस्पताल में चिकित्साधिकारी बन गए। वहां आठ महीने तक रहे। तब उन्हें लगा कि डॉक्टर बनकर चंद मरीजों की सेवा की जा सकती है, लेकिन सिविल सेवा में रहकर बहुत से लोगों की सेवा का मौका मिलता है। उन्होंने इसी नजरिये से सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। 2011 में भारतीय पुलिस सेवा के लिए उनका सलेक्शन हो गया था।

गेम्स के शौकीन हैं विपिन–

विपिन टाडा स्पोर्ट्स में भी काफ़ी दिलचस्पी रखते हैं. उन्हें साइकलिंग का बहुत शौक़ है। जहाँ जहाँ पर उनकी तैनाती की गयी, वह वहाँ अक्सर शाम में साइकलिंग करते देखे गए।

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