सामयिक कीट के प्रकोप के कारण फसल में होने वाली क्षति से बचाव हेतु कृषक करें कीटनाशक/रसायन का उपयोग।

ब्यूरो रिपोर्ट – प्रेम कुमार शुक्ल, अमेठी

अमेठी 02 सितम्बर 2021, जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमेठी ने बताया कि वर्तमान मौसम के दृष्टिगत धान की फसल में कीट के प्रकोप की सम्भावना के दृष्टिगत धान की फसल में दीमक, खैरा रोग, तना छेदक, पत्ती लपेटक, हरा, भूरा एवं सफेद पीठवाला फुदका एवं जीवाणु झुलसा कीट/रोग के प्रकोप परिलक्षित होने पर किसान अपने फसल में दीमक एवं जड़ की सूडी से नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई.सी. 3 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें। खैरा रोग से नियंत्रण हेतु 5 कि0ग्रा0 जिंक सल्फेट को 20 कि0ग्रा0 यूरिया अथवा 2.50 कि0ग्रा0 बुझे हुए चूने को प्रति हेक्टेयर की दर से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। तना छेदक से बचाव हेतु 5 फेरोमोन ट्रैप (एस0बी0 ल्योर) 6-8 प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें तथा इसके रासायनिक नियंत्रण हेतु क्युनालफॉस 25 प्रतिशत ई.सी. 1.5 लीटर 500-600 लीटर पानी का घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी0 की 18 कि0ग्रा0 मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 3-5 सेमी0 स्थिर पानी में बिखेर कर प्रयोग करें। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई.सी. 2.0 लीटर अथवा क्युनालफॉस 25 प्रतिशत ई.सी. 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। हरा, भूरा एवं सफेद पीठवाला फुदका से बचाव हेतु एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ई.सी. 2.5 लीटर अथवा मेटाराइजिएम एनीसोप्लाई 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से अथवा क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई.सी. 2 लीटर अथवा क्युनालफॉस 25 प्रतिशत ई.सी. 1.5 लीटर 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। जीवाणु झुलसा एवं जीवाणुधारी रोग से बचाव स्यूडोमोनास फलोरिसेन्स 2 प्रतिशत ए0एस0 2 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से अथवा स्ट्रेप्टोसाइक्लिन सल्फेट 90 प्रतिशत + टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत की 15 ग्राम मात्रा को 500 ग्राम कापर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू0पी0 के साथ मिलाकर 500-700 लीटर प्रति हेक्टेयर पानी में घोलकर छिड़काव करें

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