इदारा कलमकार परिषद ने उल्लेखनीय योगदान के लिए दो शिक्षकों को किया सम्मानित

संवाददाता-बी.पी.मिश्र,गोरखपुर

गोरखपुर। हमारी संस्कृति में माता-पिता से भी ऊंचा दर्जा गुरु को दिया जाता है। एक तरफ जहां माता-पिता बच्चे को जन्म देते हैं वहीं दूसरी ओर शिक्षक उन्हें कदम-कदम पर प्रेरित करके उनके जीवन को आकार देते हैं और देश का एक अच्छा नागरिक बनने में सहयोग करते हैं। वास्तव में शिक्षक हमारे जीवन की नींव होते हैं और उनके द्वारा रखी गयी मजबूत आधारशिला पर ही एक विद्यार्थी के भव्य भवन का निर्माण होता है। उक्त बातें सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए कलमकार परिषद के सचिव जनाब शमीम शहजाद ने कहीं ।
गोरखपुर की प्रमुख साहित्यिक और सामाजिक संस्था इदारा कलमकार परिषद ने इस वर्ष शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देनेवाले दो शिक्षकों गीतकार प्रेम नाथ मिश्र, सहायक अध्यापक प्रा. वि. इमलीडीह, खंड- उरुवा जन. गोरखपुर और शायर जनाब सैयद नसीरुद्दीन शिक्षक, भउवापार, पिपरौली को शिक्षक दिवस पर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि समाजसेवी डॉ. अमरनाथ जायसवाल और कार्यक्रम अध्यक्ष जनाब मु. नदीमुल्लाह अब्बासी नदीम ने दोनों शिक्षकों सर्वश्री प्रेम नाथ मिश्र और जनाब सैयद नसीरुद्दीन को शॉल और बुके देकर सम्मानित किया ।
समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. अमरनाथ जायसवाल ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए कहा कि डा. राधाकृष्णन का यह मानना था कि देश में सर्वश्रेष्ठ दिमाग वाले लोगों को ही शिक्षक बनना चाहिए। सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन का यह भी कहना था कि शिक्षक वह नहीं जो विद्यार्थी के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें। उन्हें भारत रत्न से भी नवाजा गया था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एम एसआई इंटरमीडिएट कालेज के उप प्रधानाचार्य जनाब मु. नदीमुल्लाह अब्बासी नदीम ने इस अवसर पर देश के पहले शिक्षामंत्री मौलाना अब्दुल कलाम आजाद को याद किया और यह बताया कि यूजीसी और आईआईटी जैसी संस्थाएं मौलाना आजाद की ही देन है । शायर और शिक्षक नदीम साहब ने जीवन में शिक्षक के योगदान को कुछ इस अंदाज में व्यक्त किया…
हमको दुआयें दो, तुम्हें पढ़ना सिखा दिया,
लफ्जों को जोड़-जोड़ लिखना सिखा दिया,
हमपे ही वार करने लगे आज जाने मन,
शमशीर के बगैर जो लड़ना सिखा दिया।
समारोह को समाजसेवी और साहित्यप्रेमी जनाब अरशद जमाल सामानी ने इस अवसर पर डा. एपीजे अब्दुल कलाम को याद किया और समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक केवल सपने देखना ही नहीं सिखाता अपितु यह भी सिखाता है कि सपनों को कैसे सच किया जाय। कार्यक्रम का संचालन शायर जनाब नसीम सलेमपुरी ने किया ।

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