सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अजय कुमार और श्री आशीष चौबे जी के साथ निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद ने की निषाद पार्टी के लीगल एडवाइजर से मुलाकात की

दिल्ली

ब्यूरो प्रमुख – एन. अंसारी

नई दिल्ली: आज सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अजय कुमार और श्री आशीष चौबे जी के साथ निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद ने की निषाद पार्टी के लीगल एडवाइजर से मुलाकात की और जातीय जनगणना 1931,1961 के बाद हुई नही। 1961 में मझवार जी की संख्या पूरे उत्तरप्रदेश में 69133 थी और आज हमारी संख्या घटकर लगभग 3 हज़ार हो गयी है। 1961 के बाद पूरे देश में हमारी और इस देश को आज़ाद कराने वाली जातियों की गिनती नही हुई थी और माननीय डॉ साहब के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पी.आई.एल. दाखिल करने के लिए ड्राफ्टिंग किया गया।
सबूतों में भारत सरकार के कानून मंत्रालय के पत्र संख्या एफ 28/49-सी प्रमुख सचिव वाई.के. भंडारकर ने 19 दिसबंर 1949 को सभी राज्य सरकारों के प्रमुख सचिवों को शासनादेश में कहा कि 1931, 1941 में जो जातियां जैसी थी वैसी ही संविधान में है। मछुआ समुदाय 1931 से अनुसूचित जाति में सूचीबद्ध है मझवार 1950 से ही अनुसूचित जाति के रूप में उ प्र वॉल्यूम में 53 वें क्रमांक पर अधिसूचित है, इसके आईड़ेटीफिकेशन की आवश्यकता है, पर सपा, बसपा और कांग्रेस ने नया इनक्लूजन (समावेश या शामिल) कराएंगे का अनावश्यक विवाद पैदा कर दिया था जबकि केवल मझवार अनुसूचित जाति व शिल्पकार, बेलदार, गोड़, तुरैहा आदि जातियों का संविधान के प्रस्तावना के अनुसार इसकी ऑल द सब कास्ट, ऑल द पार्टस, ऑल द रेसेज (अर्थात सभी जातियों को, उसके सभी वर्गों को और उसके सभी वंशजों को) आईडेटीफिकेशन किया जाना है परन्तु वोट बैंक के चक्कर में सभी ने इनक्लूजन बनाकर प्रचारित कर दिया, दुष्परिणाम मलाईदार एस.सी. लॉबी बसपा के लोग जो पीढ़ी दर पीढ़ी मंझवार, शिल्पकार, बेलदार, गोड़, तुरैहा अनुसूचित जाति का हक सत्तर साल से हड़प रहे है।
जब ब्रिटिश पार्लियामेंट में इनकी मांगों पर चर्चा हुई तो साइमन कमीशन भारत भेजा गया। मा. अधिवक्ता राय साहब रामचरन निषाद ने इन कमजोर वर्गों की तरफ से साइमन कमीशन के समक्ष ज्ञापन के माध्यम से मजबूती से पक्ष रखा। इस कमीशन की संस्तुति पर जे. एच. हट्टन तत्कालीन जनगणना आयुक्त ने एक्सटीरियर कास्ट को चिन्हित कर 1935 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के माध्यम से इन जातियों को विशेषाधिकार दिलाने का काम किया गया। मछुआ समुदाय भी 1931 के सर्वे में उ.प्र. में एक्सटीरियर कास्ट के रूप में चिन्हित किये गये थे
यही संविधान आदेश 10 अगस्त 1950 को संविधान आदेश अनुसूचित जाति 1950 के रूप में पारित किया गया है इसमें हम शामिल हैं। जिसमें अनुसूचित जाति के नाम से कमजोर जातियों को सामान्य वर्ग की बराबरी पर लाने के लिए विशेष प्रावधान किये गये है।
1891 के समुदायिक जनगणना के अनुसार श्री आर.बी. रसेल व हीरा लाल द्वारा 1916 में लिखित पुस्तक ‘‘दि ट्राइब्स एण्ड कास्ट्स ऑफ सेन्ट्रल प्रोविन्सेज’’ के वाल्यूम-1 के अंतिम भाग में ग्लोसरी नाम से जातियों का जो शब्दकोश दिया गया है, उसके पृष्ठ- 388 पर मांझी को केवट की पर्यायवाची व मजवार को केवट तथा बोटमैन में सम्मिलित दर्शाया गया है। मजवार शब्द मझवार का अपभ्रंश है। यूनाइटेड प्रोविन्सेज ऑफ आगरा एण्ड अवध पार्ट-1 रिपोर्ट सेन्सस ऑफ इण्डिया-1931 के लिस्ट (ए) अनटचेबल एण्ड डिपेस्ट कास्ट्स की सूची के क्रमांक- 8 पर मझवार (मांझी) अंकित है। दि ट्राइबल रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट छिंदवाड़ा ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेन्ट मध्य प्रदेश शासन के अध्ययन प्रतिवेदन -1961 ‘‘दि ट्राइब्स ऑफ मध्य प्रदेश’’ के पृष्ठ-52, 53 पर मझवार नाम से दिये गये आलेख में मझवार, मांझी व मझिया बताया गया है। इन्हें बोटमैन, फिशरमेन व फेरीमैन भी कहा गया है।
भारत सरकार के इन्थ्रोपोलोजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया के पूर्व डायरेक्टर जनरल एवं आई.ए.एस. अधिकारी डाॅ.के.एस.सिहं द्वारा कराये गये वृहद सर्वेक्षण अध्ययन के आधार पर लिखित पुस्तक ‘‘पीपुल ऑफ इण्डिया’’ नेशनल सीरीज वॉल्यूम-3, दि शिड्यूल्ड ट्राइब्स के पृष्ठ 710 पर ‘‘मांझी आलेख में मांझी का अर्थ बोटमैन तथा मांझी को मल्लाह, केवट, नाविक का पर्यायवाची माना गया है। विभिन्न शब्दकोषों में मांझी का अर्थ केवट, मल्लाह, धीवर, धीमर, नाविक का ही उल्लेख मिलता है। इन्थ्रोपो लोजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया के पूर्व डायरेक्टर जनरल के.एस. सिंह द्वारा द शेड्यूल्ड कास्ट्स’’ के अनुसार मझवार व मांझी को परस्पर पर्यायवाची माना गया है। 10 वर्षीय मत्स्य पालन पट्टा के लिए उ.प्र. सरकार द्वारा जारी शासनादेश में मछुवा समुदाय के अन्तर्गत मछुवा, केवट, मल्लाह, बिन्द, धीवर, धीमर, बाथम, रायकवार, मांझी, गोड़िया, कहार, तुरैहा या तुराहा जाति का उल्लेख किया गया है।
उत्तर प्रदेश भूमि प्रबंधक समिति नियम संग्रह (गांव समाज मैनुअल) के अनुसार मल्लाह का तात्पर्य मल्लाही का काम करने वाले समुदाय के अन्तर्गत आने वाली केवट, मल्लाह, कहार, गोड़िया, तुराहे, बिन्द, चांई, सुरैहा, मांझी, बाथम, भोई, धुरिया, धीवर, रायकवार और मझवार से है।
हरियाणा की कामन लिस्ट में क्रमांक 19 पर धीवर, मल्लाह, कश्यप, कहार, झीमर, धीमर एवं पंजाब की काॅमन लिस्ट के क्रमांक-35 पर धीमर, मल्लाह, कश्यप व महाराष्ट्र की काॅमन लिस्ट के क्रमांक 211 पर केवट, धीवर, मांझी, धीमर, मछुआ, गोड़िया कहार, धुरिया कहार, भोई वर्तमान में 2013 से निषाद, मल्लाह, नाविक को भी शामिल कर लिया गया है। मध्य प्रदेश की काॅमन लिस्ट के क्रमांक- 11 पर धीमर, भोई, कहार, धीवर, रायकवार, मल्लाह, तुरैहा और दिल्ली की सूची में मल्लाह के साथ निषाद, मांझी, केवट, धीवर, कश्यप, झीमर, कहार व राजस्थान की अन्य पिछड़े वर्ग की सूची के क्रमांक- 14 पर धीवर, कहार, भोई, कीर, मेहरा, मल्लाह, निषाद, मछुआरा आदि, छत्तीसगढ़ की पिछड़े वर्ग की सूची के क्रमांक- 18 पर धीमर, कहार, भोई, धीवर, मल्लाह, तुरहा, केवट, कैवर्त, रायकवार, कीर, सोन्धिया आदि जातियों को सूचीबद्ध किया गया है। मल्लाह, मांझी, निषाद, केवट, धीवर, बिन्द, तुरहा, धीमर, कहार, कश्यप, गोड़िया, रायकवार, धुरिया, तुरैहा आदि जातियां किसी न किसी रूप में मझवार, मांझी की ही पर्यायवाची जातियां हैं।
संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार राज्य सरकार अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जनजाति की सूची में कोई फेर बदल नहीं कर सकती। जब मल्लाह, मांझी, केवट आदि को 1961 में रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इण्डिया/ सेंसस कमीशनर द्वारा 1961 में ही मझवार जाति की पर्यायवाची या वंशानुगत नाम मान लिया गया, तो राज्य सरकार ने मल्लाह, केवट आदि को अन्य पिछड़े वर्ग में परिवर्तन कैसे कर दिया? ऐसा किया जाना संविधान के अनुच्छेद 341 का स्पष्ट तौर पर उल्लघंन है।
जबकि 1961 में ही आर.जी.आई की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति ने सेसंस मैनुअल 1961 जारी कर गणना करने और सुविधा देने के आदेश पारित किए गए हैं उत्तरप्रदेश संविधान की अनुसूचित जाति की सूची में क्रम सं.-18 में बेलदार, क्रम सं.-36 में गोड़, क्रम सं.-53 में मझवार, क्रम सं.-66 में तुरैहा पर सूचीबद्ध पर्यायवाची जातियां माझी, कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, रैकवार, धीवर, बिन्द, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी, मछुवा, गोड़, राजगोड़ को जेनेरिक नाम के रूप में परिभाषित किया गया है। उनकी जनगणना की जाए

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