भेटुआ ब्लाक में सैतालिस ग्राम पंचायत लेकिन एक भी पेट्रोल पम्प नहीं

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ब्यूरो रिपोर्ट- प्रेम कुमार शुक्ल, अमेठी

भेटुआ, आजादी के पच्चहत्तर साल बीत गए। लेकिन बिकास खण्ड भेटुआ में 47 ग्राम पंचायत हैं। बिकास में भागीदारी ईधन है। जनप्रतिनिधियों ने जनता को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ध्यान नहीं दिया। इतने साल बीत चुके हैं वाहन चालक और किसानों को परचून की दुकान से सौ रुपए प्रति लीटर पेट्रोल और नब्बे रूपये का डीजल दस रूपये अधिक दाम देकर खरीद करनी पड़ती हैं। सांसद स्मृति ईरानी भी जनता की आवाज को नजरअंदाज कर रही है। इस तरह कैसे लोग बिकास की ओर बढेगे। भेटुआ बिकास खण्ड की गाम पंचायत कडेरगांव के भाजपा बिधान परिषद् सदस्य गोविंद नारायण शुक्ल उर्फ राजा बाबू हैं। लेकिन सरकार इनका ख्याल रख रहीं हैं। इन्हीं के सहारे भाजपा कांग्रेस से लड़ने की तैयारी में है। ब्राह्मण को रिझाने के लिए भाजपा पासा फेंक रही है। वहीं भाजपा के पूर्व मंत्री आशीष शुक्ल के बेटे आकर्ष शुक्ल को भाजपा की सांसद स्मृति जुबिन ईरानी और जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश मसाला ने पार्टी का समर्थित प्रत्याशी ब्लाक प्रमुख भेटुआ का नहीं घोषित होने दिया। लेकिन निर्दलीय ब्लाक प्रमुख भेटुआ के पद पर आकर्ष शुक्ल ने पांच वोट से प्रतिद्वंद्वी को शिकस्त दी। भाजपा समर्थित प्रत्याशी सचेन्द कुमार सिंह उर्फ राजू सिंह ने अपना वोट लेने में असफल रहे हैं। जबकि सांसद के करीबी ने करारा झटका पार्टी को दिया।

जिला कांग्रेस कमेटी सचिव आयुष तिवारी का कहना है कि भाजपा अपनी ही पार्टी में लडेगी। इस बार बिकास के नाम चुनाव कांग्रेस जीत हासिल करेगी। बसपा नेता अखिलेश शुक्ल का कहना है कि कहना कि भाजपा और कांग्रेस सिर्फ छल किया और अमेठी के बिकास को ध्यान नहीं दिया। बसपा इस बार मुद्दा बनायेगी। पेट्रोल क्यो नही खुला। कांग्रेस और भाजपा से जनता जबाब मांगेगी। जिला पंचायत सदस्य सपा समर्थित अधिवक्ता सूबेदार यादव का कहना है कि गांव गांव खुला पेट्रोल और डीजल कांग्रेस और भाजपा बिकवायेगी। जनता के बीच यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव में रहेगा। सांसद और बिधायक जबाब के लिए तैयार रहें।

गौरतलब है कि भेटुआ, भीमी, अमयेमाफी, टिकरी, सनहा, सरुवांवा, कोरारी लक्षन शाह, हीर शाह, भरेथा, शहरी, हीरापुर, हारीपुर, थौरा, मुसवापुर, धरईमाफी, भुसियावा, शिव गंज, शारदन, परितोष, सडिला, शिव गढ जलालपुर आदि गांवों में पेट्रोल और डीजल की खुले बाजार कालाबाजारी हो रही हैं। सरकार जनता के शोषण पर आखिर चुप्पी क्यो साध रखी है।

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