लिफ्ट की आड़ में धनाड्यो को निशाना बनाने वाले गिरोह की आरोपी सदस्य को हाईकोर्ट के बाद जिला न्यायालय से भी झटका, अग्रिम जमानत खारिज

ब्यूरो रिपोर्ट – प्रेम कुमार शुक्ल, अमेठी

  • हाईकोर्ट भी तीन हफ्ते पहले विपुल सिंह की एफआईआर क्वैशिंग व अरेस्ट स्टे सम्बन्धी याचिका को कर चुकी है खारिज,जिसके बाद विपुल ने ली थी जिला न्यायालय की शरण
  • हाईकोर्ट व जिला न्यायालय अपराध की गम्भीरता देखकर आरोपी को नहीं दे राहत,पर पुलिस है कि उन्हें हर विकल्प आजमाने के लिए छूट देने की रखी है चाहत
  • लिफ्ट मांगने के बहाने सिरवारा रोड स्थित अपने अड्डे पर ले जाकर गिरोह के सदस्य ऐसा करते है गेम कि आप उनकी बातें लेंगे मान नहीं तो फिर हो जाएंगे बदनाम,लम्बी वसूली के प्लान का ऑडियो भी आया था सामने,फिर भी सेफ है गैंग के मेम्बर

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सुलतानपुर। लिफ्ट मांगकर घर पहुँचाने के बहाने अपने अड्डे पर बुलाकर महिला व पुरुष साथियो के साथ मिलकर ब्लैकमेलिंग व लूट-पाट के मामले में आरोपी विपुल सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी जिला जज की कोर्ट से खारिज। हाईकोर्ट भी बीते पांच अगस्त को विपुल सिंह की एफआईआर क्वैशिंग व गिरफ्तारी पर रोक सम्बन्धी याचिका को निराधार मानते हुए कर चुकी है खारिज,जिसके बाद विपुल ने ली थी जिला न्यायालय की शरण। पयागीपुर निवासी व्यवसाई को पूर्व परिचित होने का फायदा उठाकर विपुल नाम की युवती ने घर पहुँचाने के बहाने बीते 13 जुलाई को मांगी थी लिफ्ट, वहां पहुँचते ही विपुल व दो-तीन युवकों का गिरोह घर पहुँचाने गये युवक से खेलने लगे अपना खेल, युवक पर बेवजह ही उल्टा-सीधा आरोप लगाते हुए फाडे जाने लगे युवक के कपड़े, ब्लैकमेलिंग के इरादे से मामले को दूसरा रूप देने का किया जाने लगा प्रयास,दबाव में लेने के उद्देश्य से युवक का बनाया जाने लगा वीडियो। इस दौरान युवक के साथ की गई थी मार-पीट एवं छीन लिए गए उसके मोबाइल व कीमती सोने की चैन व अन्य सामान। ठगी व लूट का शिकार हुए पीड़ित युवक ने ऐसे कारनामे कर सीधे-साधे लोगो को अपने जाल में फंसाने व लूट-पाट करने वाले गिरोह के खिलाफ दी कोतवाली में दी तहरीर तो पुलिस आरोपियों के कुछ प्रभावशाली मददगारों के इशारे पर खेलने लगी मनमाना खेल , सवा महीने पहले आरोपी महिला विपुल सिंह व उसके साथियों पर दर्ज हुई थी एफआईआर। एफआईआर दर्ज करने के पहले पांच दिनों तक कोतवाली पुलिस के जरिये जांच के नाम पर चलता रहा पकड़ने-छोड़ने का खेल,मामला हाईलाइट होने पर हरकत में आई पुलिस ने दर्ज किया था मुकदमा,आरोप के मुताबिक कोतवाली पुलिस ने इस मामले में प्रिंसी व सुशीला नाम की लड़की को कोतवाली बुलाकर की थी पूंछतांछ,जिन्होंने उगले थे कई अहम राज, फिर भी पुलिस के जरिये दोनो युवतियों पर विधिक कार्यवाही के बजाय महज औपचारिकता पूरी कर छोड़ देने का मामला आया था सामने, इस गिरोह में शामिल सदस्यों की पैरवी कर उन्हें पुलिसिया संरक्षण दिलाने में एक महिला नेता का आया था नाम,आरोपियों के प्रभाव में डेढ़ माह से नही हो सकी है प्रभावी कार्यवाही,जबकि गिरोह के सदस्यों के जरिये शहर के बड़े व्यवसाइयों को टारगेट पर कर ब्लैकमेलिंग के सहारे लाखो-करोड़ो की वसूली करने का ऑडियो आया है सामने,फिर भी पुलिस ने उन तक नही पहुँचने का किया प्रयास,बल्कि आरोपियों के प्रभाव में वादी पर अनर्गल दबाव बनाने की बात आई थी सामने,अब भी गिरोह के कई सदस्यों का नाम नही आ सका है सामने, ऐसे गिरोह की सक्रियता की वजह से किसी की परेशानी देख लिफ्ट देने वाले या अन्य मदद करने वाले हो रहे गिरोह की साजिश के शिकार, मामला फंसने पर पीड़ित के खिलाफ़ ही फर्जी मामला दर्ज कराकर बदनाम कर देने व जेल भिजवाने की दी जाती है धमकी, सूत्रों की माने तो शहर के कई लोग इस गिरोह की साजिश का हो चुके है शिकार, पर उनकी साजिश में फंस जाने व बदनामी के डर से नहीं करता कोई भी इन करतूतों की शिकायत, इस तरीके से आम लोगो का शहर में जीना हुआ दूभर, देखना है सामने आये इस मामले में कोतवाली पुलिस आगे लेती है प्रभावी एक्शन या फिर ऐसे ही चलता रहेगा खेल।

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