24 घण्टे में शव का नहीं किया अंतिम संस्कार तो दर्ज होगा मुकदमा,मिली चेतावनी

एसडीएम,सीओ व एसओ ने शिवांक के परिजनों को दी संयुक्त नोटिस,पर अब भी पीड़ित परिवार की जारी है कोशिश

पीड़ित परिवार अपनी मांगों को लेकर अड़ा तो प्रशासन भी अपनी मनवाने को है खड़ा

ब्यूरो रिपोर्टप्रेम कुमार शुक्ल, अमेठी 

सुल्तानपुर-शिवांक पाठक का शव तीन हफ्ते से डीप फ्रीजर में रखने के मामले में रिटायर्ड फौजी पिता शिवप्रसाद पाठक,भाई इशांक पाठक एवं मृतक के चाचा रामदुलार पाठक के खिलाफ जारी हुई नोटिस। एसडीएम, सीओ-बल्दीराय और थानाध्यक्ष कूरेभार ने परिजनों को दी संयुक्त नोटिस। 24 घण्टे के भीतर अंतिम संस्कार न करने पर भादवि की धारा 188,268,269 व 297 के अंतर्गत विधिक कार्यवाही की दी गई चेतावनी। 21 दिन से री-पोस्टमार्टम व शिवांक की पत्नी गुरमीत कौर,उसके साथी वरुण वर्मा समेत अन्य पर एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही की मांग को लेकर अड़ा है परिवार। प्रशासन ने जारी नोटिस में बार -बार मृतक के परिजनों से सिफारिश करने के बाद भी शव का अंतिम संस्कार न करने की बात दर्शाकर उसे अवमानना की श्रेणी में बताते हुए जारी की है नोटिस। दिल्ली में शिवांक की संदिग्ध परिस्थितियों में बीते 31 जुलाई को उसके जन्मदिन की पार्टी वाली रात में ही हुई थी मौत। प्रशासन के जरिये जारी की गई नोटिस में दर्शाई गई रिपोर्ट के मुताबिक अपनी पत्नी गुरमीत कौर,अपने ससुर, दोस्त वरुण वर्मा एवं दोस्त की पत्नी आदि के साथ शिवांक ने एक होटल में मनाई थी जन्मदिन की पार्टी, जन्मदिन पार्टी में सबकी मौजूदगी में शिवांक के जरिये शराब के सेवन की बात आ रही सामने,इसके अलावा जन्मदिन पार्टी मनाने के बाद होटल से घर आने पर भी शिवांक के जरिये शराब का सेवन करने का रिपोर्ट में दर्शाया गया है तथ्य, इतना सब कुछ जानते हुए भी अपनी आंखों के सामने सब कुछ होता देख आखिर शिवांक की पत्नी व उसके दोस्तों ने क्यों किया इन सब बातों को नजरअंदाज। नोटिस में दर्शाए गए तथ्यों के मुताबिक शिवांक का साथी वरुण वर्मा ही शिवांक को लेकर गया था भीमराव अम्बेडकर हॉस्पिटल -रोहिणी,जिस पर लगा है हत्या में शामिल होने का आरोप, परिजनों के आरोप के मुताबिक घटना के कुछ दिन पहले शिवांक ने परिजनों से फोन पर अपनी परेशानी की थी बयां,शिवांक की सम्पत्ति हड़पने के चक्कर मे साजिशन हत्या का है आरोप,मय वीडियोग्राफी पोस्टमार्टम के बाद दिल्ली से गांव शव ले आये थे परिजन।अभी तक शिवांक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नही आ सकी है सामने, दिल्ली की बेगमपुरा पुलिस ने बीते नौ अगस्त को मृतक का विसरा जांच के लिए है भेजा,इन परिस्थितियों में 13 दिन बीतने के बाद भी नही आ सकी विसरा रिपोर्ट, विसरा रिपोर्ट व पोस्टमार्टम की आड़ में ही रुकी है सारी कार्यवाही, पुलिस की इन्हीं कार्यवाहियों को लम्बित बताने के दृष्टिगत ही दिल्ली हाईकोर्ट ने भी घटना के एक सप्ताह के भीतर ही दाखिल याचिका पर कोई अन्य आदेश देना उचित न मानते हुए बीते छह अगस्त को याची इशांक की अर्जी कर दिया था निस्तारित,वहीं कूरेभार थाना क्षेत्र से जोड़कर बताई गई घटना के सबूत न उपलब्ध करा पाने की वजह से सीजेएम कोर्ट ने बीते 18 अगस्त को मृतक शिवांक के पिता शिवप्रसाद पाठक की एफआईआर व अन्य मांगों सम्बन्धी अर्जी अपने सुनवाई के क्षेत्राधिकार से बाहर बताकर कर दी थी खारिज, प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में दर्शाए गये तथ्यों के मुताबिक परिजनों की मांग के सम्बंध में जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर का संयुक्त हस्ताक्षरित पत्र भी एसीपी -रोहिणी को विशेष वाहक के माध्यम से गया है भेजा, करीब चार दिन पूर्व विशेष वाहक के माध्यम से डीएम-एसपी का पत्र एसीपी-रोहिणी को भेजने के बाद भी अब तक नहीं दिखा कोई असर, जिले की सांसद मेनका गांधी ने भी पीड़ित परिवार की मांग को पूरा कराने के लिए दिया है भरोसा, उधर राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी इस सम्बंध में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए सख्त टिप्पणी कर जिलाधिकारी से दो हफ्ते में माँगा है जवाब, फिलहाल इस तरफ शव का दाह संस्कार न करने पर परिजनों को मिल गई कार्यवाही की चेतावनी, अब देखना है कि मृतक के परिजन प्रशासन की नोटिस पर कितना करते है अम्ल, क्या प्रशासन की नोटिस के दबाव में परिजन शिवांक के शव का 24 घण्टे के भीतर कर देंगे दाह संस्कार,क्या शव का अतिंम संस्कार हो जाने के बाद ही सामने आएगी दिल्ली पुलिस की विसरा जांच रिपोर्ट, क्या जल्दी नहीं पड़ने वाला डीएम-एसपी के संयुक्त हस्ताक्षरित प्रेषित पत्र का असर, दिल्ली पुलिस व वहां की अन्य कार्यवाहियों को परिजन बता रहे संदिग्ध, क्या है इस घटना की सच्चाई, उठ रहे कई सवाल, शव का अंतिम संस्कार हो जाने की दशा में आगे नई स्थिति बनने पर क्या होगा प्रशासन का रुख, मामले से जुड़े ऐसे ही कई उठ रहे सवाल, दिल्ली में मृतक की आरोपी पत्नी व उसके सहयोगियों का मृतक के परिजन बता रहे जबरदस्त प्रभाव, इसी प्रभाव की वजह से दिल्ली की सारी कार्यवाहियों को सन्देह की नजर से देख रहे शिवांक के परिजन। सूत्रों की माने तो दिल्ली में बैठी गुरमीत कौर के प्रभाव को सुनकर व उसके जरिये कोई स्टेप लेने के अंदेशे में भी यहां का प्रशासन नही लेना चाहता कोई रिश्क। अदालतों से भी पीड़ित परिवार को राहत न मिलने को आधार बनाकर प्रशासन स्वयं के स्तर पर कोई कदम उठाने पर बता रहा असमर्थ। ऐसे में प्रशासन के जी का जंजाल बना है शिवांक की मौत का प्रकरण। कूरेभार थानाक्षेत्र के ग्राम सूबेदार पाठक का पुरवा गांव का मामला।

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