’क्वालिटी सर्टिफिकेशन से बदलेगी चिकित्सालयों की स्थिति’

संवाददाता- संजय कुमार श्रीवास्तव, गोरखपुर

गोरखपुर, 27 अगस्त 2021

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत राजकीय चिकित्सालयों में गुणवत्ता सुधार हेतु ‘नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैण्डर्ड एवं ‘सर्टिफिकेशन‘ विषय पर अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में समस्त जिलाधिकारियां एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारियों का वीडियों कान्सफ्रेंसिंग के माध्यम से ’’अभिमुखीकरण‘‘ शुक्रवार को किया गया। इस कार्यक्रम से स्वास्थ्य विभाग के तरफ से नोडल अधिकारी डॉक्टर नंद कुमार, जिला अस्पताल से डाक्टर अंबुज, जिला क्वालिटी एश्योरेंस कंसल्टेंट डाक्टर मुस्तफा खान और पूरी क्वालिटी टीम एनआईसी सभागार से वर्चुअली जुड़े। राजकीय चिकित्सा इकाईयों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा‘ नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन‘ लक्ष्य सर्टिफिकेशन तथा कायाकल्प-अवार्ड स्कीम का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

कार्यक्रम में अअपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित मोहन प्रसाद द्वारा जिलाधिकारियों से अपेक्षा की गयी कि वह जनपद एवं विकास खण्ड स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा चिकित्सा इकाईयों का भ्रमण कर गैप-क्लोजर एवं सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में चिकित्सा प्रशासन को सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि अन्तर्विभागीय समन्वय द्वारा चिकित्सा इकाईयों की स्थति में गुणात्मक सुधार किया जा सकता है।

अभिमुखीकरण कार्यशाला में डा0 जे. एन. श्रीवास्तव, एडवाइजर- क्यू0 आई0 , एन0 एच0 एस0आर0सी0, नई दिल्ली भारत सरकार द्वारा क्वालिटी स्टैण्डर्ड, स्टेटुटरी रिक्वायरमेंट, असेसमेंट प्रक्रिया तथा चिकित्सालयों में गुणवत्ता बढाने हेतु जिलाधिकारियों की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी।

डा0 मालिनी कपूर, प्रोफेसर माइक्रो-बायोलॉजी, सफदरजंग चिकित्सालय, नई दिल्ली द्वारा बॉयोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के अन्तर्गत चिकित्सा इकाईयों में बायोमेडिकल वेस्ट के सेग्रीगेसन, बायोमेडिकल के ऑन-साइट सेग्रीगेशन हेतु कलर कोटेड बिन की उपलब्धता, बायोमेडिकल वेस्ट के संग्रहण हेतु कमरे की व्यवस्था तथा 48 घंटे में चिकित्सा इकाईयों से बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण किये जाने पर जानकारी प्रदान की।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय द्वारा जिलाधिकारियों से क्वालिटी एश्योरेंस समिति की नियमित बैठक, क्लीनिंग एवं गार्डिनिगं, बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण एवं लाण्ड्री सेवाओं हेतु अनुबंधित सेवा-प्रदाताओं का नियमित अनुश्रवण करने एवं सुधारात्मक कार्यवाही हेतु अपेक्षा की गयी। उन्होने कहा कि चिकित्सा इकाईयों के क्वॉलिटी सर्टिफिकेशन में गतिशीलता लाने हेतु क्षमतायुक्त इकाई्रयों का चिन्हीकरण एवं गैप-क्लोजर कराते हुए सुधारात्मक कार्यवाही किया जाना है। उन्होंने बताया कि नेशनल क्वालिटी एश्योरेस सर्टिफिकेशन में प्रदेश की देश में 7वीं रैंक है।

राज्य स्तर पर क्वालिटी एश्योरेंस अनुभाग महाप्रबंधक डा0 अर्चना वर्मा ने बताया कि वर्ष 2014 से प्रारम्भ हुए क्वालिटी एश्योरेस सर्टिफिकेशन, लक्ष्य सर्टिफिकेशन एव कायाकल्प अवार्ड- स्कीम के अर्न्तगत उपलब्धि में निरन्तर वृद्वि हुई है। प्रदेश की 44 चिकित्सा इकाईयां नेशनल क्वालिटी एश्योरेस सर्टिफिकेशन तथा 20 लक्ष्य- सर्टिफिकेशन प्राप्त कर चुकी हैं। साथ ही 2020-21 में कायाकल्प अवार्ड योजना के अन्तर्गत 800 चिकित्सा इकाईयां अवार्ड की अर्हता प्राप्त कर चुकी हैं।
श्री संजीव सिंह, जिलाधिकारी, चन्दौली एवं श्री मानवेन्द्र सिंह, जिलाधिकारी, फरूर्खाबाद के द्वारा क्वालिटी सर्टिफिकेशन हेतु कराये गये विशेष प्रयास के संबंध में अनुभव साझा किया गया।

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