ब्यूरो रिपोर्ट – प्रेम कुमार शुक्ल, अमेठी
यूं तो नरेगा योजना में लंबे समय से कूरेभार विकासखंड पीछे चल रहा है इसके पीछे की वजह क्या है आइए आपको बताते हैं
नरेगा के कच्चे कामों पर कमीशन खोरी का चल रहा है काम
सरकार की 90 दिन रोजगार देने वाली योजना को लगा रहे हैं ब्लॉक के कर्मचारी पलीता
खबर सूत्रों के हवाले से
सुल्तानपुर- जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है कूरेभार विकासखंड! सरकार की महत्वकांक्षी योजना नरेगा मनरेगा योजना के अंतर्गत 90 दिन तक का प्रत्येक श्रमिकों को रोजगार देना सरकार और उनके मातहत अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी होती है ! इसी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नरेगा मनरेगा योजना पर काफी जोर दिया और प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के लिए तलाब का सुंदरीकरण उसकी खुदाई का काम चकरोड मरम्मत कुछ कच्चे-पक्के काम करा कर प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के लिए सरकार काफी जोर दे रही है! लेकिन कठिन प्रयासों के बाद भी कूरेभार विकासखंड में नरेगा मजदूरों को रोजगार 90 दिन का नहीं मिल पा रहा है! इसकी खास वजह है ब्लॉक पर तैनात मनरेगा JE और ब्लॉक पर कुछ अन्य कर्मचारी जैसे कि कंप्यूटर ऑपरेटर खंड विकास अधिकारी समेत कुछ कर्मचारियों पर आरोप है कि नरेगा के कच्चे कामों पर कमीशन लिया जाता है! हमारे कुछ प्रधान सूत्रों ने बताया है कि उनके नाम को गोपनीय रखा जाए और उन्होंने बताया कि नरेगा केक कच्चे कामों पर JE समेत खंड विकास अधिकारी को कमीशन चाहिए और फाइल पास कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं! प्रधान सूत्रों ने बताया कि कच्चे कामों में लाभार्थी मजदूर के खाते में सीधे उसके खाते में मजदूरी का पैसा भेजा जाता है! लेकिन प्रधानों को कमीशन अपनी जेब से देना पड़ता है! प्रधान सूत्रों ने बताया कि जनपद के कई अन्य ब्लाकों पर नरेगा के कच्चे कामों पर कमीशन नहीं देना पड़ता! अब ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि यह वसूली कौन और क्यों करवा रहा है ! अब देखने वाली बात यह होगी कि जिले के मुखिया जिला अधिकारी रवीश कुमार गुप्ता इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं दोषी कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होती है!