बैंक खाते से निकले डेढ़ लाख, खाता धारक ने लगाए गंभीर आरोप

उत्तर प्रदेश किसान सभा ने डीएम को संबोधित दिया ज्ञापन

एसबीआई, गौरीगंज गेट पर सैंकड़ों की संख्या में बैठे किसान

ब्यूरो रिपोर्ट-प्रेम कुमार शुक्ल

अमेठी। जनपद मुख्यालय के एसबीआई गौरीगंज शाखा के गेट पर आज सैंकड़ों की संख्या में किसान बैठे नजर आए। उत्तर प्रदेश किसान सभा के अमेठी इकाई के बैनर तले इकट्ठे किसानों में महिलाएं व पुरुष शामिल थे और बैंक के शाखा प्रबंधक को आरोपित करके नारेबाजी कर रहे थे।
उत्तर प्रदेश किसान सभा द्वारा जिला अधिकारी को सम्बोधित ज्ञापन भी दिया गया जिसके माध्यम से बैंक की शाखा से गलत ढंग से अनीता के खाते से डेढ़ लाख रुपए निकालने का आरोप लगाया गया है। आरोप कर्ता अनीता की माने तो उन्होंने 28 जून को आरटीजीएस का फार्म भर कर और चेक पर साइन करके बैंक के काउंटर पर जमा कर दिया था। उस दिन बताया गया कि सर्वर खराब है तथा आरटीजीएस नहीं किया गया और अगले दिन काम करने का आश्वासन दिया गया। अगले दिन वह चेक अनीता को नहीं मिला और उनसे दूसरा चेक मांगा गया जिससे उन्होंने दूसरा चेक देकर पैसे आरटीजीएस कराया। शिकायतकर्ता अनीता का कहना है कि 28 जून को ही पहले चेक से डेढ़ लाख रुपया शाखा से निकाल लिया गया। जिसके लिए ज्ञापन के माध्यम से न्याय के लिए माँग की गई है। जब इस सम्बंध में शाखा प्रबंधक अभिषेक मौर्या से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि चेक बियरर था इसलिए चेक के आहरण के लिए पूँछ-तांछ की जरूरत नहीं थी फिर भी जाँच के लिए सीसीटीवी फुटेज पुलिस को दे दिया गया है।जबकि विकास खण्ड गौरीगंज के गूडर निवासिनी अनीता पत्नी श्रीराम ने आरोप लगाते हुए कहा है कि उनका पैसा बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध तरीके से निकाल लिया गया है। ऐसे में यह बात सही है कि बैंकिंग अधिनियम, 1949, तथा आरबीआई के दिशा-निर्देश के अनुपालन के क्रम में बियरर चेक के भुगतान में यदि खाताधारक के हस्ताक्षर सही हैं तो बैंकर को जाँच-पड़ताल की जरूरत नहीं होती है। किन्तु, यह भी इसी अधिनयम और केंद्रीय बैंक के दिशा-निर्देश में है कि अगर किसी दिन का काम अगले दिन फारवर्ड होगा तो खाते और धनराशि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। वास्तव में, हमारे देश मे वित्तीय साक्षरता का अभाव अभी भी है। पढ़े-लिखे लोग भी प्रायः बैंकिंग, बीमा कंपनियों, म्युचुअल फंड्स तथा शेयर बाजार की बारीकियों से अनिभिज्ञ होते हैं जिससे कई बार नुकसान उठाना पड़ता है। सच्चाई तक यह है कि बैंक के दस्तावेज, बीमा के दस्तावेज अथवा किसी दस्तावेज को बिना भरे हुए हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए अन्यथा वित्तीय जोखिम और हानि की संभावना हो सकती है। फिलहाल, परेशान अनीता को अब पुलिस के तफ्तीश से ही आशा है कि उसके बिना भरे किन्तु हस्ताक्षरित चेक को आहरण के लिए बियरर चेक बनाने वाले जालसाज को पुलिस जरूर खोज लेगी और शायद उसका पैसा वापस मिल सकेगा।

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