मशीन लर्निंग में क्रांति! वैज्ञानिकों ने विकसित किए ब्रेन-मिमिकिंग कृत्रिम सिनैप्स, एआई होगा और भी तेज़ और स्मार्ट

नई दिल्ली: विज्ञान और तकनीक की दुनिया में न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। भारतीय वैज्ञानिकों ने बायोमिमेटिक (प्राकृतिक संरचना से प्रेरित) तकनीक के माध्यम से एक संकर सामग्री (Hybrid Material) विकसित की है, जो मानव मस्तिष्क के जैविक सिनैप्स की बारीकी से नकल करती है। इस खोज से एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में जबरदस्त बदलाव आने की संभावना है।
कैसे करेगा यह तकनीक चमत्कार?
वैज्ञानिकों ने एक नई इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली विकसित की है, जो ब्रेन-सिमुलेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग करके मेमरिस्टर (एक एडवांस नॉन-वॉलेटाइल इलेक्ट्रॉनिक घटक) आधारित न्यूरल नेटवर्क तैयार करती है। यह मानव मस्तिष्क की तरह डेटा प्रोसेसिंग करता है, जिससे तेज़, अधिक स्मार्ट और ऊर्जा-कुशल एआई सिस्टम बनाए जा सकते हैं।
भारत में हुई अद्भुत खोज
यह रिसर्च एस.एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (SNBNCBS) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च (NITTTR) के वैज्ञानिकों ने की है। उन्होंने नैनोस्केल प्रवाहकीय समूहों को जोड़कर एक संकर सामग्री (AGCN) विकसित की, जिससे विद्युत क्षेत्र-प्रेरित धातु मार्गों को मजबूत किया गया। यह प्रणाली मस्तिष्क के न्यूरॉन्स की तरह सूचनाओं को संग्रहीत और प्रोसेस कर सकती है।
भविष्य के लिए कैसे होगा फायदेमंद?
✅ स्मार्ट और तेज़ कंप्यूटिंग – न्यूरोमॉर्फिक सिस्टम पारंपरिक कंप्यूटरों से तेज और कुशल होंगे।
✅ रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग – मशीनें स्वयं सीखेंगी और अनुकूलित होंगी।
✅ कम बिजली की खपत – एआई सिस्टम अधिक ऊर्जा-कुशल बनेंगे।
✅ मशीनें सीखेंगी जैसे इंसान – यह प्रणाली पावलोव के कुत्ते के प्रयोग की तरह सीखने की क्षमता रखती है।
इस खोज से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा बदलाव आने वाला है। आने वाले वर्षों में यह तकनीक रोबोटिक्स, चिकित्सा, रक्षा और स्मार्ट डिवाइसेस में क्रांति ला सकती है।