समुद्री शक्ति का साझा प्रदर्शन: दक्षिण अफ्रीका में भारत का INS तरकश, IB SAMAR-2026 में तीन देशों की नौसेनाएं करेंगी संयुक्त अभ्यास

समुद्री शक्ति का साझा प्रदर्शन: दक्षिण अफ्रीका में भारत का INS तरकश, IB SAMAR-2026 में तीन देशों की नौसेनाएं करेंगी संयुक्त अभ्यास
  • भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के बीच बढ़ेगा सामुद्रिक सहयोग; समुद्री सुरक्षा, युद्धक तैयारी और परिचालन समन्वय पर रहेगा विशेष जोर

नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारत ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक निर्देशित मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस तरकश (INS Tarkash) नौवें भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका समुद्री अभ्यास IBSAMAR-2026 में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका में तैनात है। इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास में भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाएं एक साथ प्रशिक्षण लेकर अपनी परिचालन क्षमताओं को मजबूत करेंगी। यह अभ्यास केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि तीनों देशों के बीच विश्वास, सामुद्रिक साझेदारी और समुद्र में उभरती चुनौतियों से मिलकर निपटने की साझा प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।

2008 से जारी है त्रिपक्षीय समुद्री सहयोग की परंपरा

भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (IBSA) सहयोग ढांचे के अंतर्गत वर्ष 2008 से प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित होने वाला IBSAMAR तीनों देशों की नौसेनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इसके माध्यम से नौसैनिक बल संयुक्त प्रशिक्षण, परिचालन अनुभव और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करते हैं। इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) बढ़ाना है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल के साथ काम कर सकें।

समुद्री सुरक्षा से लेकर पनडुब्बी-रोधी युद्ध तक होगा अभ्यास

IBSAMAR-2026 में समुद्री अभियानों के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें सतही युद्ध, वायु-रोधी युद्ध, पनडुब्बी-रोधी युद्ध, नौसैनिक हवाई अभियान और समुद्री अवरोधन जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बोर्डिंग और तलाशी अभियान (VBSS), समुद्री डकैती विरोधी कार्रवाई, खोज एवं बचाव अभियान, जहाजों में आग लगने की स्थिति से निपटने तथा क्षति नियंत्रण जैसे विषयों पर भी अभ्यास किया जाएगा। पेशेवर संवाद के माध्यम से तीनों देशों के नौसैनिक अधिकारी अपने अनुभव साझा करेंगे और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने पर जोर देंगे। इन संयुक्त गतिविधियों से समुद्र में संभावित खतरों का सामना करने, संकट के समय समन्वय स्थापित करने और समुद्री अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

तीनों देशों के युद्धपोत और पनडुब्बियां दिखाएंगे परिचालन क्षमता

इस नौसैनिक अभ्यास में दक्षिण अफ्रीका की ओर से एसएएस अमाटोला, एसएएस किंग सेखुखुने प्रथम और एसएएस एडम कोक तृतीय सहित एसएएस मंथातिसी पनडुब्बी भाग लेगी। ब्राजील की नौसेना की ओर से बीएनएस बारोसो युद्धपोत हिस्सा लेगा, जिस पर एक लिंक्स हेलीकॉप्टर तैनात है। वहीं, भारत की ओर से आईएनएस तरकश अपनी आधुनिक युद्धक क्षमताओं के साथ अभ्यास में शामिल है। जहाज पर एक चेतक हेलीकॉप्टर भी तैनात है, जो नौसैनिक अभियानों में हवाई सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तीनों देशों के इन नौसैनिक संसाधनों की भागीदारी अभ्यास को व्यापक परिचालन अनुभव और संयुक्त प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करती है।

'एक साझा भविष्य की ओर एकजुटता और मजबूती' है अभ्यास का विषय

नौवें IBSAMAR-2026 का विषय है—“सामुद्रिक क्षेत्र में एक साझा भविष्य की ओर एकजुटता और मजबूती।”

यह विषय समुद्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करता है। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, समुद्री डकैती, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य समुद्री चुनौतियों के बीच संयुक्त तैयारी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह अभ्यास भागीदार देशों को अपनी क्षमताओं का परीक्षण करने, रणनीतिक समझ विकसित करने और सामूहिक प्रतिक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने का अवसर देता है।

हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका

हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और स्थिरता का प्रभाव अनेक देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। INS तरकश की भागीदारी भारत की उस नीति को दर्शाती है, जिसके तहत भारतीय नौसेना मित्र देशों के साथ संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और समुद्री सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास करती है। IBSAMAR-2026 भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के बीच रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ यह संदेश भी देता है कि समुद्री चुनौतियों का प्रभावी सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा तैयारी आवश्यक है।

तीन देशों की नौसेनाएं, एक साझा लक्ष्य—समुद्र में सुरक्षा, सहयोग और स्थिरता। INS तरकश की भागीदारी के साथ IBSAMAR-2026 भारत की समुद्री कूटनीति और बहुराष्ट्रीय नौसैनिक सहयोग के महत्व को एक बार फिर रेखांकित करता है।