भारी धांधली का आरोप, शासनादेश को दरकिनार कर की गई नियुक्ति — जिलाधिकारी से शिकायत

भारी धांधली का आरोप, शासनादेश को दरकिनार कर की गई नियुक्ति — जिलाधिकारी से शिकायत

ईसीसीई एजुकेटर चयन पर बड़ा सवाल

अमेठी | विशेष रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ईसीसीई (Early Childhood Care and Education) एजुकेटर नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जनपद अमेठी के विकासखंड भेंटुआ में एजुकेटर चयन को लेकर भारी अनियमितता और धांधली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में वंदना पुत्री राम सजीवन यादव ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों सहित जिलाधिकारी अमेठी को लिखित शिकायत सौंपते हुए न्याय की गुहार लगाई है।


सार (संक्षेप में मामला)

  • ईसीसीई एजुकेटर चयन में शासनादेश की अनदेखी का आरोप

  • अधिक अंक होने के बावजूद अभ्यर्थी का चयन नहीं

  • कम योग्यता/कम क्रम वाले अभ्यर्थी को दी गई नियुक्ति

  • पीड़िता ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और नियुक्ति की मांग की


 क्या है पूरा मामला? (विस्तार से)

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत आउटसोर्सिंग के माध्यम से संविदा पर ईसीसीई एजुकेटर पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। शासनादेश के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए अभ्यर्थियों ने आवेदन किया और चयन सूची जारी की गई, जिसमें कुल 129 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र निर्गत किए गए। लेकिन इसी चयन प्रक्रिया में विकासखंड भेंटुआ में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता वंदना पुत्री राम सजीवन यादव का कहना है कि— “मेरा गुणांक 71.163 होने के बावजूद शासनादेश के अनुसार मेरा चयन नहीं किया गया, जबकि मुझसे कम प्राथमिकता क्रम में अंकित अभ्यर्थी का चयन कर दिया गया।”


शासनादेश के विपरीत चयन का आरोप

वंदना ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया कि—

  • क्रम संख्या 101 पर अंकित सुरभि मिश्रा का चयन

  • प्राथमिक विद्यालय कोरवा (विकासखंड भेंटुआ) में कर दिया गया

  • जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि उसका गुणांक अधिक और पात्रता पूर्ण थी

शिकायत के अनुसार यह चयन शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और मेरिट मानकों के विपरीत है, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं।


जांच की मांग, चयन सूची पर सवाल

शिकायतकर्ता वंदना ने जिलाधिकारी से मांग की है कि—

  • क्रम संख्या 86 और 101 की निष्पक्ष जांच कराई जाए

  • शासनादेश के अनुरूप मेरिट के आधार पर चयन सुनिश्चित किया जाए

  • यदि अनियमितता पाई जाए तो चयन सूची में सुधार कर उचित अभ्यर्थी की नियुक्ति की जाए

उनका कहना है कि यदि इस तरह से नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां होती रहीं, तो इससे योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ेगा।


बड़ा सवाल: होगी निष्पक्ष जांच या फाइलों में दब जाएगा मामला?

ईसीसीई जैसी संवेदनशील और बाल शिक्षा से जुड़ी योजना में यदि चयन प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो यह केवल एक अभ्यर्थी का मामला नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा विषय बन जाता है। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी की कार्रवाई पर टिकी हैं कि—

क्या शासनादेश के अनुरूप निष्पक्ष जांच होगी?
क्या योग्य अभ्यर्थी को उसका हक मिलेगा?
या फिर यह मामला भी कागजों में सिमट कर रह जाएगा?