‘श्वेत पत्र’ के सवाल पर चुप्पी, विकास के दावों पर संदेह
- आजमगढ़ के महराजगंज ब्लॉक में साढ़े चार साल का हिसाब मांगते ही घिरे ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि
आर.वी. नाइन न्यूज़, आजमगढ़ | ब्यूरो प्रमुख: राजनारायण मिश्र
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद से जुड़ी यह खबर विकास और पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। महराजगंज ब्लॉक क्षेत्र में साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल के दौरान कराए गए विकास कार्यों का श्वेत पत्र जारी करने के सवाल पर जब पत्रकारों ने ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि पारसनाथ यादव से सीधा जवाब मांगा, तो वे स्पष्ट उत्तर देने से बचते नजर आए। सवालों के घेरे में आए प्रमुख प्रतिनिधि कभी इधर-उधर की बात करते दिखे, तो कभी राजनीतिक जवाबों का सहारा लेते रहे।
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महराजगंज ब्लॉक में विकास कार्यों का श्वेत पत्र बना चर्चा का केंद्र
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ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि ने ठोस आंकड़े देने से किया परहेज
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कुछ ग्राम सभाओं के अब भी विकास से वंचित होने की स्वीकारोक्ति
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संसाधनों की कमी बताकर समान विकास न होने की दलील
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विपक्ष और जनता ने पारदर्शिता पर उठाए सवाल
सवालों के सामने डगमगाए जवाब
पत्रकारों द्वारा बार-बार पूछे जाने के बावजूद ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि पारसनाथ यादव अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का कोई लिखित विवरण, रिपोर्ट या ठोस आंकड़ा प्रस्तुत नहीं कर सके। श्वेत पत्र जारी न करने के सवाल पर उन्होंने चुनावी और राजनीतिक उत्तर तो दिए, लेकिन विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति पर कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं रख पाए। हालांकि, सवालों के दबाव में उन्होंने यह स्वीकार जरूर किया कि ब्लॉक की कुछ ग्राम सभाएं आज भी विकास कार्यों से वंचित हैं। साथ ही यह भी माना कि संसाधनों की कमी के चलते सभी ग्राम सभाओं में समान रूप से विकास कार्य नहीं हो सके।

स्वीकारोक्ति के बाद उठे बड़े सवाल
ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि की इस स्वीकारोक्ति के बाद पूरे क्षेत्र में विकास की असमानता को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि आज भी कई ग्राम सभाओं में—
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पक्की सड़कों का अभाव
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नाली और जल निकासी की समस्या
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आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी
जैसी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। लोगों की मांग है कि यदि विकास कार्य हुए हैं, तो उनका श्वेत पत्र सार्वजनिक किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और भ्रम की स्थिति खत्म हो।
विपक्ष का हमला: “अगर विकास हुआ है, तो डर क्यों?”
मामले को लेकर विपक्षी जनप्रतिनिधियों ने भी ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है—
“यदि कार्यकाल में व्यापक और संतुलित विकास हुआ है, तो श्वेत पत्र जारी करने से परहेज क्यों किया जा रहा है? इससे बचना कहीं न कहीं पारदर्शिता की कमी और विकास में असमानता को दर्शाता है।”
विपक्ष का आरोप है कि श्वेत पत्र जारी न करना जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ है और इससे यह संदेश जाता है कि विकास कार्यों की तस्वीर उतनी उजली नहीं है, जितनी बताई जा रही है।
आगामी चुनाव में क्या बदलेगा रुख?
कुल मिलाकर, श्वेत पत्र जारी न करने और कुछ ग्राम सभाओं के विकास से वंचित रहने की स्वीकारोक्ति ने ब्लॉक प्रमुख की विकास नीति और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि—
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क्या ब्लॉक स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक रिपोर्ट सार्वजनिक होती है?
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क्या वंचित ग्राम सभाओं तक विकास पहुंचेगा?
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और सबसे अहम, आगामी चुनाव में जनता इस असमानता को लेकर किसे जिम्मेदार ठहराती है?
फिलहाल, महराजगंज ब्लॉक में विकास के दावे और हकीकत के बीच की खाई चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है।






