वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव का मुंबई दौरा: वस्त्र उद्योग की नीतियों, अनुसंधान और निर्यात प्रोत्साहन की की गई व्यापक समीक्षा
- हथकरघा, वस्त्र अनुसंधान और निर्यात संवर्धन परिषदों की गतिविधियों का लिया जायज़ा — उद्योग को नवाचार, स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में प्रेरित किया
मुंबई। वस्त्र मंत्रालय की सचिव एवं वस्त्र समिति की अध्यक्ष श्रीमती नीलम शमी राव ने मुंबई में अपने दो दिवसीय दौरे की शुरुआत गुरुवार को की। यह दौरा मंत्रालय के अधीन संचालित निकायों के कार्यक्रमों, अनुसंधान कार्यों और नीतिगत प्रगति की व्यापक समीक्षा को समर्पित रहा। अपने पहले दिन, उन्होंने विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना के साथ विभिन्न परियोजनाओं का जायज़ा लिया और कहा कि भारत के पारंपरिक और तकनीकी वस्त्र उद्योग को “नवाचार, स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा” के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।

राज्य और केंद्र में समन्वय पर बल
यात्रा के दौरान, सचिव ने महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख सचिव (वस्त्र) सुश्री अंशु सिन्हा, आईएएस और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्य और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल, नीति सुधार और वस्त्र उद्योग के क्षेत्रीय विकास पर विस्तृत चर्चा हुई।
वस्त्र समिति की गतिविधियों की समीक्षा
श्रीमती राव ने अपने दौरे की शुरुआत वस्त्र समिति के मुख्यालय में समीक्षा बैठक से की, जहाँ उन्होंने समिति के कार्यों को पुनर्गठित और सशक्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन को विज्ञान, तकनीक और आर्थिक अनुसंधान में उद्योग की बढ़ती मांगों के अनुरूप अपनी भूमिका और अधिक सक्रिय करनी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि वस्त्र समिति को “उद्योग और सरकार के बीच एक सशक्त कड़ी” के रूप में कार्य करना चाहिए, ताकि जमीनी चुनौतियों की सही जानकारी मंत्रालय तक पहुँच सके और नीतिगत हस्तक्षेपों से इन समस्याओं का समाधान किया जा सके।
सिंथेटिक एवं आर्ट सिल्क मिल्स रिसर्च एसोसिएशन का दौरा
इसके बाद सचिव ने एसएएसएमआईआरए (SASMIRA) का दौरा किया और मानव निर्मित रेशों, तकनीकी वस्त्रों और हरित नवाचारों (Green Textile Innovations) पर चल रहे अनुसंधान की समीक्षा की। उन्होंने संस्थान द्वारा कौशल प्रशिक्षण, औद्योगिक परीक्षण सुविधाओं और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों की सराहना की तथा अनुसंधान को “वैश्विक स्थिरता और पुनर्चक्रण उद्देश्यों” से जोड़ने की दिशा में कार्य करने का सुझाव दिया।
हथकरघा क्षेत्र की प्रगति पर ध्यान
विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय स्थित बुनकर सेवा केंद्र में श्रीमती राव ने बुनकरों से जुड़ी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम, क्लस्टर विकास योजना, डिज़ाइन नवाचार और डिजिटल विपणन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से हथकरघा उत्पादों की देश-विदेश में पहुँच बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा —
“भारत के हथकरघा उत्पाद केवल परंपरा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर हैं जिन्हें आधुनिक तकनीक और ई-कॉमर्स के सहयोग से वैश्विक मंच तक पहुँचाना होगा।”
निर्यात परिषदों के साथ रचनात्मक वार्ता
इसके पश्चात सचिव ने सूती वस्त्र निर्यात संवर्धन परिषद (Texprocil) और मानव निर्मित वस्त्र निर्यात परिषद (MMFEC) की समीक्षा बैठकें कीं। टेक्सप्रोसिल के साथ हुई चर्चा में उन्होंने कस्तूरी कॉटन भारत, निर्यात बाज़ारों के विविधीकरण, और मूल्यवर्धित वस्त्र उत्पादों के प्रोत्साहन पर जोर दिया। वहीं मानव निर्मित वस्त्र निर्यात परिषद की बैठक में उन्होंने स्थिरता-संचालित निर्यात मॉडल, मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के बेहतर उपयोग और भारतीय रेशों की वैश्विक दृश्यता बढ़ाने के उपाय सुझाए।
महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा
शाम को श्रीमती राव ने वस्त्र आयुक्त कार्यालय में मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं जैसे — पीएम मित्रा पार्क योजना, पीएलआई (उत्पादन आधारित प्रोत्साहन) योजना, और समर्थ – कौशल विकास योजना की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से भारत के वस्त्र उद्योग में रोज़गार, निवेश और नवाचार के नए अवसर खुलेंगे। अंत में सचिव ने उद्योग के प्रमुख संघों के साथ बैठक कर नीतिगत सुधार, स्थिरता की दिशा में पहल, निवेश प्रोत्साहन और उद्योग-सरकार साझेदारी पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत का वस्त्र उद्योग न केवल आर्थिक प्रगति का इंजन है बल्कि “आत्मनिर्भर भारत के विज़न” को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।






