स्पॉट मेमो में खेल! लेखपाल पर गंभीर आरोप — प्रधान और पूर्व प्रधान को गुमराह कर कराए हस्ताक्षर, 7 वर्षों से लटका सीमांकन विवाद

स्पॉट मेमो में खेल! लेखपाल पर गंभीर आरोप — प्रधान और पूर्व प्रधान को गुमराह कर कराए हस्ताक्षर, 7 वर्षों से लटका सीमांकन विवाद

आर.वी.9 न्यूज़ | प्रेम कुमार शुक्ल, महावीर, अमेठी, उत्तर प्रदेश


अमेठी।
जनपद अमेठी की तहसील व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विकासखंड भेंटुआ अंतर्गत ग्राम सभा पीपरपुर में तैनात क्षेत्रीय लेखपाल अजय कुमार पर नियम–कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाने और स्पॉट मेमो में हेराफेरी करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामला केवल कागजी गड़बड़ी तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें जनप्रतिनिधियों को गुमराह कर हस्ताक्षर कराने, सीमांकन प्रक्रिया को प्रभावित करने और वर्षों से लंबित विवाद को जानबूझकर उलझाए रखने के आरोप लगाए गए हैं।


सीमांकन के नाम पर दो-दो स्पॉट मेमो, उठे कई सवाल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेठी तहसीलदार द्वारा विगत दिनों विवादित गाटा संख्या के सीमांकन के लिए राजस्व विभाग की टीम गठित की गई थी। किन्हीं कारणों से तय तिथि पर कोई भी राजस्व अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद कुछ दिनों पश्चात क्षेत्रीय लेखपाल अजय कुमार, राजस्व निरीक्षक एवं अन्य लेखपालों के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान सरकारी भूखंड की वास्तविक पैमाइश न करके, विपक्षी पक्ष के खेत की नपत कर एक स्पॉट मेमो तैयार कर लिया गया और बिना प्रथम व द्वितीय पक्ष के हस्ताक्षर के ही टीम वापस लौट गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि स्पॉट मेमो में यह दर्शा दिया गया कि मौके पर उपस्थित लोगों के हस्ताक्षर करा लिए गए, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल उलट बताई जा रही है।


गुमराह कर कराए गए हस्ताक्षर, मोहर में भी दिखा बदलाव

जब इस कथित गड़बड़ी की भनक आला अधिकारियों तक पहुंची, तो आरोप है कि लेखपाल अजय कुमार ने पहले से तैयार स्पॉट मेमो में हेराफेरी करते हुए वर्तमान ग्राम प्रधान उर्मिला देवी और पूर्व ग्राम प्रधान तुलसीराम यादव को गुमराह कर दूसरे स्पॉट मेमो पर हस्ताक्षर करवा लिए। मौजूदा प्रधान प्रतिनिधि सुरेश कुमार यादव का कहना है—

“यह हस्ताक्षर मेरी जानकारी में नहीं हैं। स्पॉट मेमो पर लगी मोहर को देखने से साफ पता चलता है कि उसमें बाद में परिवर्तन किया गया है।”

वहीं पूर्व ग्राम प्रधान तुलसीराम यादव ने बताया कि—

“लेखपाल ने कहा था कि शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर सभी गाटा संख्या का निस्तारण हो चुका है और निर्माण कार्य जारी कराया जा सकता है।”

इन बयानों के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जनप्रतिनिधियों को भ्रमित कर सरकारी दस्तावेजों में जानबूझकर बदलाव किया गया?


7 वर्षों से लटका मामला, प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह प्रकरण लगभग 7 वर्षों से चला आ रहा है। यदि समय रहते राजस्व विभाग द्वारा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती, तो शायद अब तक समस्या का समाधान हो चुका होता। उनका आरोप है कि विभागीय स्तर पर मिलीभगत और लापरवाही के चलते न तो सीमांकन हुआ और न ही शिकायत का निष्पक्ष निस्तारण। शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी जिलाधिकारी से लेकर तहसील स्तर तक के अधिकारियों को है, फिर भी आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।


अब निगाहें तहसीलदार पर

अब इस प्रकरण में सबकी निगाहें अमेठी तहसील की तेज-तर्रार तहसीलदार नेहा राजवंशी पर टिकी हैं। सवाल यह है कि—

  • क्या इस कथित फर्जी स्पॉट मेमो की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?

  • क्या गड़बड़ी करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी?

  • या फिर वर्षों की तरह यह मामला भी फाइलों में दबा रह जाएगा?


चेतावनी के साथ न्याय की मांग

शिकायतकर्ताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द सक्षम अधिकारियों द्वारा जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई और विवादित गाटा संख्या का विधिवत सीमांकन नहीं कराया गया, तो वे अपनी फरियाद सीधे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। यह मामला केवल एक गांव का नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर आरोप को कितनी गंभीरता से लेता है—या फिर पीड़ितों को न्याय के लिए एक बार फिर दर-दर भटकना पड़ेगा।