संगम तट पर उमड़ा आस्था का महासागर: पौष पूर्णिमा स्नान के साथ प्रयागराज में माघ मेले का भव्य शुभारंभ

संगम तट पर उमड़ा आस्था का महासागर: पौष पूर्णिमा स्नान के साथ प्रयागराज में माघ मेले का भव्य शुभारंभ
  • आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, मनोज कुमार सिंह

प्रयागराज में पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर संगम तट पर श्रद्धा और आस्था का विराट जनसैलाब उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाकर माघ मेले का शुभारंभ किया। प्रशासन के अनुसार, पहले ही दिन करीब 30 लाख श्रद्धालुओं के स्नान करने का अनुमान है, जबकि पूरे माघ मेले के दौरान 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।


प्रयागराज।
सनातन परंपरा की अमिट धारा और भारतीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर एक बार फिर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर देखने को मिल रही है। पौष पूर्णिमा के पवित्र स्नान के साथ ही शनिवार से विश्वप्रसिद्ध माघ मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जहां “हर-हर गंगे” और “जय संगम” के उद्घोष के बीच आस्था की डुबकियां लगाई गईं।

कड़ाके की ठंड और घने कोहरे को भी श्रद्धालुओं की आस्था नहीं रोक सकी। भोर से पहले ही साधु-संत, कल्पवासी, गृहस्थ श्रद्धालु, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा संगम तट की ओर बढ़ते दिखाई दिए। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन संगम स्नान से पापों का क्षय और मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसी विश्वास के साथ लाखों श्रद्धालु संगम में उतरे। प्रशासन के अनुसार, पहले ही दिन लगभग 30 लाख श्रद्धालुओं के संगम स्नान करने का अनुमान है। वहीं पूरे माघ मेले के दौरान 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं।

संगम क्षेत्र में

  • चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पीएसी की तैनाती,

  • सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी,

  • स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और चिकित्सा सुविधाओं की विशेष व्यवस्था की गई है।

कल्पवासियों के लिए संगम तट पर तंबुओं की नगरी बस चुकी है, जहां संतों के प्रवचन, यज्ञ, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए हैं। माघ मेले के दौरान कल्पवासी एक माह तक संयम, साधना और सेवा के मार्ग पर चलते हुए आध्यात्मिक जीवन का अनुभव करते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि

“संगम में स्नान करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और जीवन को नई ऊर्जा देने वाला अनुभव है।”

माघ मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का भी जीवंत संगम है, जहां देश के कोने-कोने से लोग एक सूत्र में बंधते हैं। पौष पूर्णिमा स्नान के साथ शुरू हुआ यह माघ मेला आने वाले दिनों में मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख स्नान पर्वों के साथ और भी भव्य रूप लेगा। संगम तट पर उमड़ा यह जनसैलाब इस बात का साक्षी है कि आस्था की धारा समय और परिस्थितियों से परे, निरंतर प्रवाहित होती रहती है।