'नकली दरोगा' का असली खेल बेनकाब: वर्दी सिलवाकर बन गया सब-इंस्पेक्टर, नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप
रौब, रसूख और फर्जी पहचान के दम पर रच डाली बड़ी साजिश; पैसे मांगने पर दोस्त को दी जेल भेजने की धमकी, असली पुलिस पहुंची तो खुल गई पूरी पोल
- वाराणसी।
पुलिस की वर्दी केवल कानून की रक्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सम्मान का भी प्रतीक होती है। लेकिन जब इसी वर्दी का इस्तेमाल कथित रूप से लोगों को धोखा देने और फर्जी पहचान बनाकर ठगी करने के लिए किया जाए, तो यह केवल अपराध ही नहीं, बल्कि समाज के भरोसे के साथ भी खिलवाड़ है। वाराणसी में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने कथित तौर पर सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) की वर्दी सिलवाकर खुद को पुलिस अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया और लोगों पर अपना प्रभाव जमाने लगा। आरोप है कि उसने पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से लाखों रुपये की डील की और अग्रिम राशि भी ले ली। जब वादा पूरा नहीं हुआ और पैसे वापस मांगे गए, तो मामला धमकी तक पहुंच गया। अंततः शिकायत पुलिस तक पहुंची और पूरे घटनाक्रम का पर्दाफाश हो गया।
फर्जी वर्दी पहनकर बनाया पुलिस अधिकारी का रुतबा
जानकारी के अनुसार, वाराणसी के रहने वाले राजन बाबू ने कथित रूप से दर्जी से सब-इंस्पेक्टर जैसी वर्दी तैयार करवाई। इसके बाद वह रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के बीच खुद को पुलिस अधिकारी बताकर घूमने लगा। आरोप है कि वह दावा करता था कि उसकी पुलिस विभाग में ऊंचे अधिकारियों तक सीधी पहुंच है और वह इच्छुक अभ्यर्थियों की पुलिस में नौकरी लगवा सकता है।
नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों का सौदा
बताया जा रहा है कि उसके प्रभाव में आकर एक परिचित ने पुलिस भर्ती में नौकरी दिलाने के लिए करीब 5 लाख रुपये देने की बात मान ली। आरोप है कि इस सौदे के तहत 1 लाख रुपये अग्रिम भी दे दिए गए। लेकिन समय बीतने के बावजूद न नौकरी मिली और न ही कोई प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसके बाद जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे, तो विवाद शुरू हो गया।
पैसे मांगने पर दी कथित धमकी
पीड़ित का आरोप है कि रुपये लौटाने के बजाय कथित फर्जी दरोगा ने उसे पुलिसिया रौब दिखाते हुए जेल भिजवाने तक की धमकी दी। इसी के बाद पीड़ित ने पूरे मामले की जानकारी वास्तविक पुलिस को दी।
असली पुलिस पहुंची तो खुल गई हकीकत
शिकायत मिलने के बाद चोलापुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि शुरुआती दौर में उसने पुलिस टीम पर भी अपना रौब जमाने का प्रयास किया, लेकिन जब पुलिस ने उसकी पहचान और दस्तावेजों की जांच की, तो पूरा मामला सामने आ गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी।
फर्जी पहचान बनाना गंभीर अपराध
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी सरकारी अधिकारी की पहचान का झूठा दावा करना, सरकारी वर्दी का दुरुपयोग करना और नौकरी दिलाने के नाम पर धन लेना गंभीर आपराधिक श्रेणी में आ सकता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
पुलिस और प्रशासन समय-समय पर लोगों से अपील करते रहे हैं कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति के झांसे में न आएं। भर्ती प्रक्रियाएं पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित नियमों के अनुसार होती हैं। यदि कोई व्यक्ति पैसे लेकर नौकरी दिलाने का दावा करता है, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग या पुलिस को देनी चाहिए।
वाराणसी का यह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि वर्दी पहन लेने से कोई कानून का अधिकारी नहीं बन जाता। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े से बचने के लिए जागरूक रहना बेहद जरूरी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
नोट: यह समाचार उपलब्ध आरोपों और प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है। अंतिम तथ्य पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।







