पीएम मोदी की बड़ी पहल: अब आधी सरकारी मीटिंग्स होंगी वीडियो कॉल पर, बचेगा करोड़ों का ईंधन और समय

पीएम मोदी की बड़ी पहल: अब आधी सरकारी मीटिंग्स होंगी वीडियो कॉल पर, बचेगा करोड़ों का ईंधन और समय

देश में डिजिटल इंडिया को नई रफ्तार देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। Narendra Modi की अपील के बाद देश के ज्यादातर राज्यों ने सरकारी कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। अब सरकारी दफ्तरों की लगभग 50 प्रतिशत बैठकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किया जाएगा। इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में आधुनिकता, पारदर्शिता और संसाधनों की बचत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य अनावश्यक यात्राओं को कम करना है। अब अधिकारियों को छोटी-छोटी बैठकों के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि सरकारी वाहनों में खर्च होने वाले ईंधन और सरकारी खर्चों में भी भारी कमी आने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इस फैसले से हर साल करोड़ों रुपये की बचत संभव हो सकेगी।

दरअसल, लंबे समय से यह देखा जा रहा था कि प्रशासनिक बैठकों के लिए अधिकारियों को लगातार यात्रा करनी पड़ती थी। कई बार केवल कुछ घंटों की मीटिंग के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। इससे सरकारी मशीनरी पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था और समय की भी बर्बादी होती थी। लेकिन अब तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने इस व्यवस्था को बदलने का रास्ता खोल दिया है।

बताया जा रहा है कि राज्यों के मुख्य सचिवों और विभागीय अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि जहां संभव हो, वहां वीडियो कॉल और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इससे सरकारी कार्यों में तेजी आएगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बन सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी बेहद अहम साबित हो सकता है। सरकारी गाड़ियों की आवाजाही कम होने से ईंधन की खपत घटेगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी। साथ ही डिजिटल कार्यसंस्कृति को बढ़ावा मिलने से देश में तकनीकी दक्षता और आधुनिक प्रशासनिक सोच को मजबूती मिलेगी।

कोविड-19 महामारी के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग तेजी से बढ़ा था और उसी अनुभव ने यह साबित किया कि कई महत्वपूर्ण बैठकें ऑनलाइन माध्यम से भी प्रभावी ढंग से संचालित की जा सकती हैं। अब उसी मॉडल को स्थायी रूप से अपनाने की दिशा में सरकार आगे बढ़ती नजर आ रही है। हालांकि कुछ अधिकारियों का मानना है कि सभी बैठकें ऑनलाइन संभव नहीं हैं, क्योंकि कई मामलों में जमीनी निरीक्षण और प्रत्यक्ष संवाद जरूरी होता है। बावजूद इसके, सामान्य प्रशासनिक बैठकों को डिजिटल माध्यम से करने का निर्णय सरकारी व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

Narendra Modi की यह पहल केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि “स्मार्ट गवर्नेंस” की ओर बढ़ता हुआ मजबूत कदम मानी जा रही है। डिजिटल तकनीक के जरिए सरकारी कामकाज को तेज, पारदर्शी और किफायती बनाने की यह कोशिश आने वाले समय में प्रशासनिक व्यवस्था की नई पहचान बन सकती है। अब देखने वाली बात होगी कि यह नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है और आम जनता को इससे कितना लाभ मिलता है।