काबिलियत की बेबसी: NDA में सैन्य अफसरों को पढ़ाने वाले डॉ. संतोष गोयल आज सड़कों पर गुमनाम

काबिलियत की बेबसी: NDA में सैन्य अफसरों को पढ़ाने वाले डॉ. संतोष गोयल आज सड़कों पर गुमनाम

आगरा: मशहूर शायर निदा फाजली की पंक्तियाँ, "कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं जमीन कहीं आसमां नहीं मिलता," आगरा के डॉ. संतोष गोयल के जीवन पर पूरी तरह सटीक बैठती हैं. एक दौर में देश के रक्षकों को शिक्षित करने वाले डॉ. गोयल आज अपनी नियति और तंगहाली से लड़ते हुए सड़कों पर जीवन गुजारने को मजबूर हैं.


जीएसटी कमिश्नर की नजर और वायरल हुआ सच

यह मार्मिक कहानी तब दुनिया के सामने आई जब जीएसटी कमिश्नर अजय मिश्र की नजर एक हलवाई की दुकान पर खड़े एक बुजुर्ग पर पड़ी. मैले-कुचैले कपड़ों में दिखने वाले इस व्यक्ति की फर्राटेदार अंग्रेजी सुनकर कमिश्नर साहब चौंक गए और उनसे बात करने का फैसला किया. बातचीत के दौरान जो सच सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया.


डॉ. संतोष गोयल: उपलब्धियों भरा अतीत

करीब 70 वर्ष की आयु के डॉ. संतोष गोयल कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित विद्वान हैं. उनकी शैक्षणिक और पेशेवर यात्रा किसी के लिए भी प्रेरणा हो सकती थी:

  • उच्च शिक्षा: उन्होंने वर्ष 1971 में अंग्रेजी विषय में पीएचडी (PhD) की उपाधि प्राप्त की थी.

  • NDA में शिक्षण: डॉ. गोयल ने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में तीन वर्षों तक शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं.

  • सैन्य प्रशिक्षकों के गुरु: वे आर्मी एजुकेशन कोर, खड़कवासला में उन प्रशिक्षुओं को पढ़ाते थे, जो भविष्य में सैन्य अधिकारी बनने वाले थे.


परिस्थितियों की मार और वर्तमान की त्रासदी

डॉ. संतोष गोयल नेत्रहीन हैं और वर्तमान में बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं. जिस व्यक्ति ने देश के भविष्य के सैन्य अधिकारियों को अंग्रेजी का ज्ञान दिया, आज उसे अपनी काबिलियत के बावजूद समाज की मुख्यधारा से दूर तंगहाली में घूमते देखना व्यवस्था और समाज दोनों पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है.

"डॉ. गोयल की कहानी याद दिलाती है कि वक्त का पहिया कब घूम जाए, कोई नहीं जानता। एक पीएचडी स्कॉलर और एनडीए शिक्षक का इस हाल में होना हृदयविदारक है।"