आमी की पुकार: नदियों को बचाने जनआंदोलन की शुरुआत, जन आयोग’ गठन का ऐलान
आर.वी.9 न्यूज़ | ब्यूरो प्रमुख- एन. अंसारी
गोरखपुर | विशेष रिपोर्ट
पूर्वांचल की जीवनरेखा बन चुकी नदियों के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे के बीच अब आवाज़ बुलंद होने लगी है। गोरखपुर के प्रेस क्लब सभागार में आयोजित “पानी की बात, आपके साथ” विषयक सम्मेलन ने एक बड़े जनआंदोलन की नींव रख दी है। इस सम्मेलन में आमी नदी समेत क्षेत्र की सभी नदियों, तालाबों और जलस्त्रोतों को बचाने के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया।

सम्मेलन की सबसे बड़ी घोषणा रही—“जन आयोग” का गठन, जो नदियों के संरक्षण, स्वच्छ प्रवाह और जल पर निर्भर जनजीवन की सुरक्षा के लिए निर्णायक भूमिका निभाएगा।
जल संकट पर गहराती चिंता, अब जनभागीदारी से समाधान की पहल

सम्मेलन में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बढ़ता जल प्रदूषण, अतिक्रमण और अनियंत्रित औद्योगिक गतिविधियां नदियों के अस्तित्व को खत्म करने पर आमादा हैं। इस संकट से निपटने के लिए अब सिर्फ सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि जनभागीदारी ही सबसे बड़ा हथियार बनेगी। इसी दिशा में निर्णय लिया गया कि आने वाले समय में नदियों और जलस्त्रोतों के किनारे “जल पंचायतों” का आयोजन किया जाएगा, जिससे गांव-गांव तक जागरूकता फैलाई जा सके।
आर्सेनिक का खतरा, आने वाली पीढ़ियों पर संकट
मुख्य अतिथि प्रो. शरद चंद्र मिश्र ने चेतावनी देते हुए कहा कि जल प्रदूषण के कारण आर्सेनिक जैसी गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह संकट भयावह रूप ले सकता है।
नदी नहीं बची तो जीवन नहीं बचेगा
वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सिंह ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि नदियों के प्रदूषण का सबसे बड़ा खामियाजा आम आदमी भुगत रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी प्राथमिकताओं में आमजन से ज्यादा कॉर्पोरेट हितों को तरजीह दी जा रही है, जो बेहद चिंताजनक है। वहीं विश्वविजय सिंह ने कहा कि वर्षों के संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बावजूद आमी जैसी नदियों को बचाने के लिए ठोस कदम न उठाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब संघर्ष ही एकमात्र रास्ता बचा है।
कानूनी लड़ाई के लिए अधिवक्ता तैयार
सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के मंत्री अनुज अस्थाना ने भरोसा दिलाया कि जहां भी जरूरत होगी, अधिवक्ता समुदाय इस लड़ाई में पूरी मजबूती से साथ खड़ा रहेगा।
सम्मेलन में पारित हुए महत्वपूर्ण प्रस्ताव
सम्मेलन में सर्वसम्मति से कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें प्रमुख हैं—
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आमी नदी को प्रदूषित करने वाले उद्योगों पर तत्काल कठोर कार्रवाई
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सीईटीपी (Common Effluent Treatment Plant) की शीघ्र स्थापना
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पूर्वांचल की सभी नदियों को प्रदूषण और अतिक्रमण से मुक्त करना
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नदियों के फ्लड प्लेन, झीलों और तालाबों पर किसी भी विकास योजना पर रोक
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नदी प्रवाह को प्रभावित करने वाली मशीनों और परियोजनाओं पर प्रतिबंध
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नदी पर निर्भर लोगों की आजीविका और अधिकारों की गारंटी
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कटान प्रभावित परिवारों का समुचित पुनर्वास
“जन आयोग” बनेगा नदियों का संरक्षक
सम्मेलन का सबसे अहम निर्णय रहा—“जन आयोग” का गठन, जिसमें समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
यह आयोग न केवल नदियों के स्वच्छ और निर्बाध प्रवाह के लिए कार्य करेगा, बल्कि उनके प्राकृतिक स्वरूप और जनजीवन से जुड़े अधिकारों की रक्षा भी करेगा।
अब नदियों के लिए जनता उतरेगी मैदान में
यह सम्मेलन सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि पूर्वांचल में जल क्रांति की शुरुआत बनकर उभरा है। आमी की पुकार अब जन-जन तक पहुंच रही है, और यह साफ संकेत है कि—
“अगर नदियां बचेंगी, तभी भविष्य बचेगा।”
बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि अब यह लड़ाई केवल कुछ लोगों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी बन चुकी है।







