योगी की पाती: परिणाम से आगे बढ़ने का संदेश — यूपी बोर्ड के छात्रों को मुख्यमंत्री का भावुक पत्र, असफलता को बताया सफलता की सीढ़ी
1. योगी की पाती..!
विशेष संवाददाता
लखनऊ/आजमगढ़, 27 अप्रैल 2026 — उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा यूपी बोर्ड के हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद विद्यार्थियों के नाम लिखी गई “योगी की पाती” इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस पत्र में जहां सफल छात्रों को शुभकामनाएं दी गई हैं, वहीं अपेक्षित परिणाम न पाने वाले विद्यार्थियों को हिम्मत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का प्रेरणादायक संदेश दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र की शुरुआत “मेरे प्यारे बच्चों” संबोधन से करते हुए विद्यार्थियों के परिश्रम और लगन की सराहना की। उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणाम केवल अंक नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक होते हैं। इस वर्ष लाखों छात्रों ने अपने प्रयासों से प्रदेश का नाम रोशन किया है, जो सराहनीय है।
हालांकि, उन्होंने विशेष रूप से उन छात्रों का भी जिक्र किया, जो किसी कारणवश अपेक्षित परिणाम नहीं प्राप्त कर सके। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि “सफलता और असफलता जीवन के दो पहलू हैं”। जहां सफलता उत्साह देती है, वहीं असफलता हमें मजबूत बनाती है और आगे बढ़ने की सीख देती है। उन्होंने विद्यार्थियों को निराशा से दूर रहने और “चरैवेति-चरैवेति” यानी निरंतर आगे बढ़ते रहने का मंत्र अपनाने की सलाह दी।
पत्र में मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि जीवन में कोई भी परिणाम अंतिम नहीं होता। असफलता अक्सर नए अवसरों के द्वार खोलती है। उन्होंने महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन का उदाहरण देते हुए बताया कि हजारों असफल प्रयोगों के बाद ही बल्ब का आविष्कार संभव हो पाया। इसी तरह गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन जैसे महान व्यक्तित्वों ने भी कठिनाइयों का सामना करते हुए सफलता हासिल की।
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से भी विशेष अपील की कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें। यदि कोई बच्चा अपेक्षित परिणाम नहीं ला पाया है, तो उसे डांटने या हतोत्साहित करने के बजाय उसकी रुचि और क्षमता को समझें। उन्होंने कहा कि हर बच्चा किसी न किसी क्षेत्र में विशेष प्रतिभा रखता है, जिसे पहचानना और निखारना अभिभावकों की जिम्मेदारी है।
पत्र के अंत में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे निरंतर प्रयास करते रहें, क्योंकि मेहनत और आत्मविश्वास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
“योगी की पाती” केवल एक पत्र नहीं, बल्कि छात्रों के लिए एक प्रेरणादायक मार्गदर्शन है, जो उन्हें असफलता से उबरकर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की सीख देता है। यह पहल न केवल शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है, बल्कि समाज में मानसिक सशक्तिकरण का भी संदेश देती है।
यह संदेश हर छात्र के दिल तक पहुंच रहा है—कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जो हार नहीं मानते और लगातार आगे बढ़ते रहते हैं।






