महिला विश्व कप विजेता रेलवे की बेटियों ने रचा इतिहास — केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया सम्मान, कहा “आप भारत की असली प्रेरणा हैं

महिला विश्व कप विजेता रेलवे की बेटियों ने रचा इतिहास — केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया सम्मान, कहा “आप भारत की असली प्रेरणा हैं

नई दिल्ली, भारत की ऐतिहासिक आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 की सुनहरी जीत के बाद, देश की तीन नायिकाएँ — प्रतीका रावल, रेणुका सिंह ठाकुर और स्नेहा राणा — आज रेल भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से मिलीं। इन तीनों खिलाड़ियों ने न केवल मैदान पर भारत को गौरवान्वित किया, बल्कि भारतीय रेल की उस गौरवशाली परंपरा को भी आगे बढ़ाया, जो सामान्य परिवारों से असाधारण खिलाड़ियों को जन्म देती रही है।


 “आप भारत की असली चैंपियन हैं” — अश्विनी वैष्णव

मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा,

“आप तीनों ने जो कर दिखाया है, वह हर भारतीय बेटी के लिए प्रेरणा है। भारतीय रेल को आप जैसी प्रतिभाशाली और समर्पित खिलाड़ी पर गर्व है। आपने सिद्ध किया कि साधारण पृष्ठभूमि से भी असाधारण सफलता हासिल की जा सकती है।”

मंत्री ने तीनों खिलाड़ियों की यात्रा को “प्रेरणादायक, संघर्षपूर्ण और गौरवशाली” बताया और कहा कि भारतीय रेल खेलों को बढ़ावा देने के अपने मिशन पर लगातार आगे बढ़ रहा है।


दिल्ली की धड़कन – प्रतीका रावल की संयमित चमक

दिल्ली मंडल, उत्तर रेलवे की प्रतिनिधि प्रतीका रावल ने अपनी शांत, परिपक्व और सटीक बल्लेबाजी से टीम इंडिया की नींव मजबूत की। अप्रैल 2023 में रेलवे से जुड़ीं प्रतीका ने हाल ही में वरिष्ठ लिपिक पद पर पदोन्नति पाई है। विश्व कप के शुरुआती चरण में चोट लगने के बावजूद, उन्होंने टीम के लिए मनोबल बढ़ाने और रणनीतिक सहायता में अहम भूमिका निभाई। उनकी बल्लेबाजी कोचों और विशेषज्ञों द्वारा “संयम और सूझबूझ की मिसाल” बताया गया। प्रतीका अब भारत की सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिनी जाती हैं।


रेणुका सिंह ठाकुर – हर गेंद में जोश, हर ओवर में जज़्बा

हिमाचल की पहाड़ियों से निकलकर भारतीय क्रिकेट के आसमान तक पहुंचीं रेणुका सिंह ठाकुर, उत्तर रेलवे अंबाला मंडल की तेज गेंदबाज हैं। दिसंबर 2020 में रेलवे से जुड़ने के बाद उन्होंने अपनी स्विंग और धारदार लाइन-लेंथ से कई मुकाबले भारत की झोली में डाले। विश्व कप 2025 में भी उन्होंने महत्वपूर्ण पलों पर तीन विकेट झटके और मैच का रुख भारत के पक्ष में मोड़ दिया। गांव लौटने पर रेणुका का भव्य स्वागत हुआ — जहां ग्रामीणों ने “रेल की बेटी, देश की शान” के नारों से गूंजा वातावरण।


स्नेहा राणा – भरोसे की मिसाल, हरफनमौला प्रदर्शन से जीता दिल

उत्तराखंड की धरती से ताल्लुक रखने वाली स्नेहा राणा उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल से हैं। 2018 में भारतीय रेल से जुड़ने के बाद स्नेहा ने हर मंच पर अपने हरफनमौला खेल से सबको प्रभावित किया। ऑफ-स्पिन गेंदबाजी में निपुण स्नेहा ने इस विश्व कप में 6 मैचों में 7 विकेट लिए, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2/32 रहा। बल्ले से भी उन्होंने 49.50 की औसत से 99 रन बनाए — कठिन हालात में टीम को संभालने वाली असली फाइटर साबित हुईं।


भारतीय रेल – खेल प्रतिभाओं की जन्मभूमि और संबल

भारतीय रेल दशकों से देश की खेल प्रतिभाओं की नर्सरी रही है। रेलवे स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड (RSPB) के माध्यम से खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, रोजगार सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता मिलती है। रेलवे के एथलीट न केवल ओलंपिक, एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप में भारत का परचम लहरा चुके हैं, बल्कि अर्जुन पुरस्कार, पद्म श्री और खेल रत्न जैसे सम्मानों से भी नवाज़े गए हैं।

“रेलवे खेल केवल करियर नहीं, बल्कि जीवन की दिशा देता है” — यही भावना इन तीनों चैंपियनों की मुस्कान में झलकती थी।


‘रेल की बेटियाँ’ — देश की नई प्रेरणा

भारत की महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत ने न सिर्फ ट्रॉफी दिलाई, बल्कि हर भारतीय बेटी को यह विश्वास भी दिलाया कि “सपनों की कोई सीमा नहीं होती, बस उन्हें पूरा करने का हौसला चाहिए।” प्रतीका रावल, रेणुका सिंह ठाकुर और स्नेहा राणा जैसी खिलाड़ी इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि
अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो और संस्थान (जैसे भारतीय रेल) सहयोगी हो, तो साधारण पृष्ठभूमि से भी विश्व मंच तक का सफर तय किया जा सकता है।


महिला विश्व कप की ये नायिकाएँ सिर्फ क्रिकेट की चैंपियन नहीं हैं —ये उस नई भारत की प्रतीक हैं जो मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास से विश्व को नेतृत्व दे रहा है।
भारतीय रेल की ये तीन “स्टार बेटियाँ” आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा की मिसाल बन चुकी हैं।