सरकारी नाली पर दबंगई का कब्जा! महीनों से न्याय के लिए भटक रहा परिवार, आश्वासनों में उलझा प्रशासन
- जलनिकासी ठप होने से गांव में बढ़ा संकट, ग्रामीणों में आक्रोश — ‘अगर आवाज उठाई तो झूठे मुकदमे में फंसा देंगे’ का आरोप
अंजान शहीद | आजमगढ़।
सगड़ी तहसील क्षेत्र के थाना मुबारकपुर अंतर्गत ग्राम सादीपट्टी में सरकारी नाली पर कथित कब्जे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गांव की बड़ी समस्या बनता जा रहा है। गांव की गलियों में जमा गंदा पानी, बदबू, संक्रमण का खतरा और प्रशासनिक उदासीनता ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। पीड़ित मूरत विश्वकर्मा पिछले कई महीनों से न्याय की उम्मीद में तहसील, राजस्व विभाग और थाना मुबारकपुर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल सका।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव निवासी त्रिलोकी की बहू सुरेखा विश्वकर्मा ने सरकारी नाली की निकासी को पाटकर पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके चलते पूरे मोहल्ले की जलनिकासी व्यवस्था चरमरा गई है और बरसात के साथ-साथ घरों का गंदा पानी रास्तों में भरने लगा है। गांव के लोग अब इस समस्या को केवल नाली विवाद नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और जनसुविधा से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानने लगे हैं।
गांव की गलियों में बह रहा गंदा पानी, लोगों का जीना हुआ मुश्किल
सादीपट्टी गांव की तंग गलियों में इन दिनों पानी जमा रहने से लोगों का निकलना दूभर हो गया है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही है, वहीं बुजुर्ग और महिलाएं बदबू और गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर पानी इतना भर गया है कि रास्ते कीचड़ में तब्दील हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि जल्द ही नाली की सफाई और निकासी बहाल नहीं की गई, तो बरसात के मौसम में स्थिति और भयावह हो सकती है। गांव में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है और लोगों को डेंगू, मलेरिया व अन्य संक्रामक बीमारियों का डर सता रहा है।
एक ग्रामीण ने नाराजगी जताते हुए कहा,
“सरकारी नाली पूरे गांव के लिए होती है, लेकिन कुछ लोग अपनी दबंगई दिखाकर उसे बंद कर देते हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है।”
महीनों से अधिकारियों के चक्कर, लेकिन कार्रवाई शून्य
पीड़ित मूरत विश्वकर्मा का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत कई बार तहसील प्रशासन, राजस्व विभाग और थाना मुबारकपुर में की। शिकायतों के बाद राजस्व कर्मी और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे, मुआयना भी हुआ, लेकिन हर बार कार्रवाई के बजाय सिर्फ आश्वासन ही मिला। मूरत विश्वकर्मा ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा,
“हम महीनों से अधिकारियों के दरवाजे पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। हर बार कहा जाता है कि जल्द समाधान होगा, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। गांव का पानी रुक गया है और लोग परेशान हैं।”
उनका आरोप है कि सरकारी नाली पर अवैध अवरोध हटवाने के लिए प्रशासन गंभीरता नहीं दिखा रहा, जिससे गांव में लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
‘झूठे मुकदमे में फंसाने’ की धमकी का आरोप, सहमे ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, विवाद केवल नाली तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब डर और दबाव का माहौल भी पैदा हो गया है। आरोप है कि नाली बंद करने की आरोपी महिला खुलेआम कहती है कि वह नाली नहीं खुलने देगी और जो भी ज्यादा दबाव बनाएगा, उसे झूठे मुकदमों में फंसा दिया जाएगा। इन आरोपों के बाद गांव में भय का माहौल बना हुआ है। कई ग्रामीण खुलकर बोलने से भी बच रहे हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करता, तो यह विवाद आगे चलकर बड़ा सामाजिक तनाव बन सकता है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीण अब आंदोलन की तैयारी की बात कह रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही नाली से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया और जलनिकासी बहाल नहीं हुई, तो वे तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों में स्वच्छता और जलनिकासी व्यवस्था सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों की उदासीनता के कारण योजनाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। एक स्थानीय युवक ने कहा,
“जब सरकारी नाली ही सुरक्षित नहीं है तो गांव में विकास और स्वच्छता की बातें केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं।”
प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
पीड़ित मूरत विश्वकर्मा समेत गांव के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सरकारी नाली से तत्काल अवैध कब्जा हटवाया जाए और जलनिकासी व्यवस्था को बहाल किया जाए, ताकि गांव को गंदगी और बीमारी के खतरे से राहत मिल सके। ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी सार्वजनिक संसाधनों पर कब्जा कर गांव की व्यवस्था को बाधित न कर सके।
अब प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
सादीपट्टी गांव का यह विवाद अब केवल नाली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, ग्रामीण सुविधाओं और कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में कब तक ठोस कदम उठाता है या फिर पीड़ित परिवार यूं ही न्याय की आस में सरकारी दफ्तरों की चौखट पर भटकता रहेगा।







