सरयू सेतु पर मौत को मात: नाविक की बहादुरी से बची एक जिंदगी, फिर उठी सुरक्षा जाल लगाने की पुरानी मांग
आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, शुभम शर्मा, गोरखपुर, उ.प्र.
बड़हलगंज, गोरखपुर।
सरयू की लहरों में समाने जा रही एक और जिंदगी को आखिरकार इंसानी हिम्मत और सतर्कता ने बचा लिया। बड़हलगंज उपनगर स्थित सरयू सेतु एक बार फिर हादसे का गवाह बनते-बनते रह गया, जब एक युवक ने आत्मघाती कदम उठाते हुए नदी में छलांग लगा दी। लेकिन, मौके पर मौजूद नाविकों की फुर्ती और साहस ने इस दर्दनाक घटना को एक सुखद मोड़ दे दिया।
शनिवार दोपहर करीब 12 बजे, गोरखपुर और मऊ जनपद को जोड़ने वाले इस व्यस्त पुल पर सब कुछ सामान्य चल रहा था। तभी दोहरीघाट थाना क्षेत्र के पाऊस (बसियाराम) निवासी 28 वर्षीय युवक अचानक पुल के बीचोबीच पहुंचा और देखते ही देखते सरयू की गहराई में कूद गया। यह दृश्य देखकर आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और मदद के लिए शोर गूंज उठा। पुल के किनारे स्थित मुक्तिपथ पर रहने वाले नाविकों की टोली ने बिना एक पल गंवाए अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी। तेज धारा और मुश्किल हालात के बीच संघर्ष करते हुए, मुक्तिपथ निवासी जयराम साहनी के पुत्र जोगिंदर साहनी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
पानी से बाहर आने के बाद युवक ने बताया कि वह पारिवारिक कलह से आहत होकर जीवन समाप्त करना चाहता था। मौके पर पहुंचे चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर ने न केवल युवक को समझाकर उसके परिवार से मिलवाया, बल्कि उसे सुरक्षित घर भी भिजवाया। इस मानवीय कार्य के लिए महेश उमर ने बहादुर नाविक जोगिंदर साहनी को सम्मानित कर उसका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि इन साहसी नाविकों की वजह से न जाने कितने परिवार उजड़ने से बच जाते हैं—इनका जज्बा समाज के लिए प्रेरणा है।
फिर उठी सुरक्षा की मांग
घटना के बाद एक बार फिर सरयू पुल पर सुरक्षा उपायों की कमी चर्चा में आ गई है। महेश उमर ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर पुल के दोनों ओर मजबूत लोहे की जाली लगाने की मांग दोहराई है। उल्लेखनीय है कि पिछले दो दशकों से स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता इस मांग को उठाते आ रहे हैं। चिल्लूपार के विधायक राजेश त्रिपाठी भी कई बार प्रशासन को पत्र लिखकर इस दिशा में कार्रवाई की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। परिणामस्वरूप, आए दिन इस पुल से कूदने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
सवाल अब भी कायम
आखिर कब तक सरयू सेतु यूं ही जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहेगा?
कब प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम उठाएगा?
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जहां एक ओर समाज में संवेदनशील और बहादुर लोग मौजूद हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाओं की अनदेखी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।







