बाबरी से भव्य राम मंदिर तक—33 वर्षों की वह ऐतिहासिक यात्रा जिसने बदल दिया देश का सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य

बाबरी से भव्य राम मंदिर तक—33 वर्षों की वह ऐतिहासिक यात्रा जिसने बदल दिया देश का सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य

बाबरी विध्वंस से राम मंदिर निर्माण तक—6 दिसंबर 1992 का दिन, जिसने भारत की दिशा और दशा दोनों बदली

6 दिसंबर 1992… भारत के इतिहास का वह दिन, जिसने देश की राजनीति, समाज, विचारधारा और सांस्कृतिक चेतना पर गहरी छाप छोड़ी। इसी दिन अयोध्या में स्थित विवादित ढांचा ढह गया और इसके साथ ही एक ऐसी घटनाक्रम श्रृंखला शुरू हुई, जिसने तीन दशकों तक देश की संसद से लेकर सड़क तक, अदालतों से लेकर जनमानस तक निरंतर हलचल बनाए रखी।

विवादित स्थल, आस्था और संघर्ष की पृष्ठभूमि

अयोध्या, जिसे सनातन परंपरा में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मभूमि माना जाता है, सदियों से धार्मिक भावनाओं का केंद्र रहा है। 1528 में निर्मित हुआ ढांचा वर्षों से विवादों के घेरे में रहा। मंदिर-मस्जिद विवाद का मुद्दा धीरे-धीरे राजनीतिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बनता गया और 1980 के दशक में यह आंदोलन देशव्यापी रूप ले चुका था।

 6 दिसंबर 1992: वह रविवार जिसने सबकुछ बदल दिया

दोपहर लगभग 12:00 बजे लाखों कारसेवकों की उपस्थिति में विवादित ढांचा ढह गया। कुछ ही घंटों में पूरा देश इस घटना से हिल गया—

  • राजनैतिक भूचाल

  • सामाजिक तनाव

  • देशभर में कर्फ्यू और उपद्रव

  • संसद से सड़क तक गहन बहस

यह केवल एक संरचना का ढहना नहीं था, बल्कि भारत की राजनीति के नए अध्याय की शुरुआत थी।

तीन दशक लंबी न्यायिक यात्रा

बाबरी प्रकरण अदालतों की गलियारों में लगभग 27 वर्षों तक चला। हजारों दस्तावेज़, ऐतिहासिक साक्ष्य, पुरातात्विक रिपोर्टें, बहसें और वर्षों की प्रतीक्षा… और फिर आया 9 नवंबर 2019, जब सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाते हुए पूरी विवादित भूमि रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया और मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के निर्माण हेतु अलग जमीन आवंटित करने का निर्देश दिया। यह फैसला भारत के न्यायिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक फैसलों में से एक माना गया।

2024–2025: सदियों की प्रतीक्षा का ‘साकार रूप’

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राम मंदिर निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ा। विश्व-स्तरीय स्थापत्य और भारतीय परंपरा की भव्यता से सजे मंदिर ने न केवल देश, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों लोगों का ध्यान आकर्षित किया। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा ने अयोध्या को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव की नई पहचान दी।

देश का सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य भी बदल गया

  • राजनीति में नए समीकरण बने

  • सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रभाव बढ़ा

  • समाज में धर्म और आस्था पर गहन चर्चा तेज हुई

  • अयोध्या वैश्विक पर्यटन और तीर्थ का केंद्र बनकर उभरी

यह 33 वर्षों की यात्रा केवल एक मंदिर निर्माण की कहानी नहीं है— यह भारत की आस्था, न्याय और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जटिल लेकिन अद्भुत संगम का प्रमाण है।


बाबरी से भव्य राम मंदिर तक की यात्रा ने भारत के सामूहिक मानस को झकझोरा भी, जोड़ा भी और एक नए युग का सूत्रपात भी किया।”