शोहरतगढ़ की धरती पर उभरी ‘मातृशक्ति की हुंकार’: महिला आक्रोश पदयात्रा ने रचा नया इतिहास, गूंजा अधिकार और स्वाभिमान का जनघोष
- आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, फ़िरोज अहमद
विशेष रिपोर्ट | शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद स्थित शोहरतगढ़ की सड़कों ने 3 मई 2026 को एक ऐतिहासिक दृश्य देखा, जब हजारों की संख्या में उमड़ी मातृशक्ति ने अपने अधिकार, सम्मान और स्वाभिमान के लिए एकजुट होकर ऐसी आवाज बुलंद की, जिसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देने लगी है। टीचर कॉलोनी स्थित विधायक आवास से प्रारंभ हुई महिला आक्रोश पदयात्रा ने देखते ही देखते जनसैलाब का रूप ले लिया। हर कदम के साथ महिलाओं का उत्साह, ऊर्जा और आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण दे रहा था कि अब समाज की आधी आबादी अपने हक के लिए पूरी ताकत के साथ खड़ी हो चुकी है।
जनसैलाब में बदली पदयात्रा, हर चेहरे पर दिखा संकल्प
पदयात्रा में शामिल माताएं, बहनें और बेटियां न केवल बड़ी संख्या में मौजूद रहीं, बल्कि उन्होंने पूरे जोश और जज्बे के साथ यह संदेश दिया कि महिलाओं के अधिकारों से अब कोई समझौता नहीं होगा। हाथों में तख्तियां, होंठों पर नारे और आंखों में बदलाव का सपना—यह दृश्य किसी सामान्य प्रदर्शन का नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का प्रतीक नजर आया।
यह सिर्फ पदयात्रा नहीं, महिलाओं के स्वाभिमान का जनघोष है
इस अवसर पर विधायक विनय वर्मा ने भावुक शब्दों में कहा कि—
“मेरे साथ हजारों बहनों की यह पदयात्रा केवल आक्रोश नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, अधिकार और स्वाभिमान का जनघोष है। आज शोहरतगढ़ की सड़कों पर जो इतिहास रचा गया है, उसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देगी।”
उन्होंने क्षेत्र की सभी माताओं, बहनों और बेटियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सहभागिता ने इस आंदोलन को ऐतिहासिक बना दिया।
प्रशासन और मीडिया का भी मिला सहयोग
इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय प्रशासन, मीडिया कर्मियों और आम जनता का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। विधायक ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि यह सहयोग ही इस जनांदोलन की ताकत बना।
महिला आरक्षण का संकल्प—अब नहीं रुकेगा कदम
पदयात्रा के दौरान एक स्वर में उठे नारों ने स्पष्ट कर दिया कि अब महिलाओं के अधिकारों की राह में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। “महिलाओं का देखो स्वाभिमान, साथ खड़ा है हिंदुस्तान!” और “शोहरतगढ़ से निकली आवाज—पूरा होगा महिला आरक्षण का ख्वाब!” जैसे नारों ने माहौल को ऊर्जा से भर दिया।
बदलाव की दस्तक
शोहरतगढ़ की यह पदयात्रा केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक बदलाव की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
यह संदेश साफ है कि— अब महिलाएं सिर्फ अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराएंगी, बल्कि अपने अधिकारों को हासिल करने के लिए निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
मातृशक्ति जिंदाबाद!
यह नारा अब सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक सशक्त आंदोलन की पहचान बन चुका है।







