संकट में होर्मुज! क्या अमेरिका-ईरान के बीच फिर भड़केगी जंग? ट्रंप की चेतावनी पर तेहरान का दोटूक जवाब
होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य पर बढ़ा तनाव, ईरान बोला—अब समुद्री आवाजाही का रास्ता पहले जैसा नहीं रहेगा; अमेरिका की नई सैन्य कार्रवाई की आशंका के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी
नई दिल्ली/तेहरान। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के खिलाफ एक और सीमित सैन्य अभियान चलाने की चेतावनी और तेहरान के सख्त जवाब ने क्षेत्र में नए टकराव की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। इस बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी विवाद गहरा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ एक और छोटे अभियान की संभावना जताई है, जिसे उन्होंने ‘एपिक फ्यूरी’ नाम दिया। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि किसी भी नए सैन्य हमले की स्थिति में उनका देश पीछे हटने के बजाय जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
होर्मुज पर ईरान का बड़ा संकेत, अब पहले जैसी नहीं होगी व्यवस्था?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, युद्ध और क्षेत्रीय तनाव ने पश्चिम एशिया की रणनीतिक परिस्थितियों को बदल दिया है। उनका कहना है कि दशकों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही होती रही, लेकिन हालिया संघर्ष के बाद सुरक्षा और जहाजों के आवागमन से जुड़े सवाल नए सिरे से सामने आए हैं। अराघची ने संकेत दिया कि अब इस समुद्री मार्ग के प्रबंधन और जहाजों की आवाजाही की व्यवस्था पहले जैसी नहीं रह सकती। इस विषय पर ईरान और ओमान के बीच बातचीत होने की बात भी कही गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है। यहां जहाजों की आवाजाही में लंबे समय तक बाधा आने से कच्चे तेल की आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर व्यापक असर पड़ सकता है। ऐसे में इस मार्ग को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह का टकराव केवल क्षेत्रीय मामला नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
ईरान की चेतावनी—नए हमले का जवाब दिया जाएगा
ईरान का कहना है कि वह किसी नए सैन्य हमले की स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है। अराघची ने अमेरिका और इजरायल की पिछली सैन्य कार्रवाइयों का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि दोबारा हमला करने से पहले उसके संभावित परिणामों पर विचार किया जाना चाहिए।
ईरानी विदेश मंत्री के रुख से स्पष्ट है कि तेहरान अपनी सुरक्षा नीति में पीछे हटने का संकेत नहीं देना चाहता। हालांकि, ईरान की ओर से दी गई चेतावनियां और अमेरिकी नेतृत्व के बयान अपने-अपने पक्षों के आधिकारिक रुख को दर्शाते हैं। वास्तविक सैन्य कार्रवाई होगी या नहीं, इसका अभी निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
ट्रंप की ‘एपिक फ्यूरी’ वाली चेतावनी से बढ़ी हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक और सीमित अभियान की संभावना जताकर तनाव को और बढ़ा दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका तत्काल हमले की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा और तीन नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले सैन्य कार्रवाई को लेकर समयसीमा का जिक्र किया है।
हालांकि, ऐसे बयानों को अंतिम सैन्य निर्णय नहीं माना जा सकता। अमेरिका की आगे की रणनीति, ईरान की प्रतिक्रिया और मध्यस्थ देशों के प्रयास आने वाले दिनों में स्थिति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
क्या फिर छिड़ेगी जंग?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश फिर सीधे सैन्य टकराव की ओर बढ़ेंगे या बातचीत के जरिए तनाव कम करने का रास्ता निकलेगा। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के माध्यम से बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन होर्मुज, प्रतिबंधों और सुरक्षा संबंधी मांगों पर मतभेद बने हुए हैं।
आने वाले समय में तीन मुद्दे सबसे अहम होंगे:
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होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही: क्या दोनों पक्ष समुद्री मार्ग को लेकर किसी व्यावहारिक व्यवस्था पर सहमत हो पाएंगे?
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सैन्य कार्रवाई या बातचीत: क्या अमेरिका और ईरान तनाव बढ़ाने के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता देंगे?
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वैश्विक तेल बाजार: क्या इस विवाद से तेल की आपूर्ति और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा?
दुनिया की नजरें होर्मुज पर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का अगला अध्याय केवल दोनों देशों के संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और पश्चिम एशिया की स्थिरता भी इससे जुड़ी हुई है। फिलहाल नई जंग की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता, लेकिन यह कहना भी जल्दबाजी होगी कि सैन्य टकराव निश्चित है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वाशिंगटन और तेहरान चेतावनियों के रास्ते आगे बढ़ते हैं या बातचीत के जरिए होर्मुज संकट का समाधान निकालने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं।







