घर गिरा, परिवार खुले आसमान के नीचे; अधिकारियों की चौखट पर गुहार के बाद पीड़ित ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की फरियाद

घर गिरा, परिवार खुले आसमान के नीचे; अधिकारियों की चौखट पर गुहार के बाद पीड़ित ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की फरियाद
  • 15 दिन तक जांच का इंतजार करता रहा पीड़ित परिवार, तहसील दिवस से लेकर अधिकारियों के दफ्तर तक लगाई गुहार; बारिश में भीग गया गृहस्थी का सामान, अब सरकारी आवास और आपदा राहत की मांग

आर.वी.9 न्यूज़ | प्रेम कुमार शुक्ल, अमेठी, उत्तर प्रदेश

अमेठी/संग्रामपुर।
बारिश के मौसम में जब एक गरीब परिवार के सिर से उसका आशियाना छिन जाए, तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल सिर्फ रहने का नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा और दो वक्त की रोटी का भी खड़ा हो जाता है। अमेठी जनपद के विकासखंड संग्रामपुर क्षेत्र के मिश्रौली बड़गांव में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां पीड़ित बनवारी लाल मोर पुत्र बचाई का घर गिर जाने के बाद परिवार कथित तौर पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।

पीड़ित का आरोप है कि घर गिरने की जानकारी उसने लगातार संबंधित अधिकारियों को दूरभाष के माध्यम से दी। इसके बाद तहसील दिवस में भी शिकायत की और स्वयं अधिकारियों के कार्यालयों तक पहुंचकर अपनी समस्या बताई, लेकिन करीब 15 दिन बीत जाने के बावजूद मौके पर जांच करने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। मदद की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों की चौखट पर दस्तक देने के बाद भी जब राहत नहीं मिली तो अब पीड़ित ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर मौके पर जांच कराकर नियमानुसार सरकारी सहायता एवं आवास उपलब्ध कराने की मांग की है।

बारिश में गिरा आशियाना, घर के अंदर भर गया पानी

पीड़ित के मुताबिक बीते दिनों बारिश के दौरान उसका घर काफी क्षतिग्रस्त होकर गिर गया। घर गिरने के बाद स्थिति इतनी खराब हो गई कि बारिश का पानी घर के अंदर भर गया। पीड़ित का कहना है कि घर में रखी खाद्य सामग्री, पहनने के कपड़े और अन्य घरेलू सामान भी प्रभावित हुए। घर के अंदर खाना बनाने तक के लिए सुरक्षित जगह नहीं बची। परिवार की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें घर से बाहर छप्पर के नीचे रहने की व्यवस्था करनी पड़ी। ऐसे में परिवार के सामने एक ओर सिर छिपाने की समस्या है तो दूसरी ओर भोजन और जरूरी घरेलू सामान को सुरक्षित रखने की चुनौती भी बनी हुई है।

‘फोन पर देता रहा सूचना, फिर भी नहीं पहुंचे अधिकारी’

पीड़ित बनवारी लाल का आरोप है कि उन्होंने अपने घर की स्थिति और परिवार के सामने उत्पन्न खतरे की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दूरभाष के माध्यम से लगातार दी। पीड़ित के अनुसार उसने तहसीलदार, एसडीएम, एटीएम, मुख्य विकास अधिकारी, जिलाधिकारी और लेखपाल सहित संबंधित अधिकारियों से अपनी समस्या के समाधान की गुहार लगाई। तहसील दिवस में भी अपनी शिकायत रखी और व्यक्तिगत रूप से अधिकारियों के कार्यालयों तक पहुंचकर मदद मांगी। पीड़ित का कहना है कि उसे उम्मीद थी कि शिकायत मिलने के बाद राजस्व अथवा संबंधित विभाग का कोई अधिकारी मौके पर पहुंचकर घर की स्थिति का जायजा लेगा और परिवार को तत्काल राहत दिलाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। लेकिन उसके अनुसार करीब 15 दिन गुजरने के बाद भी मौके पर जांच नहीं हुई।

तहसील दिवस से मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत

स्थानीय स्तर पर बार-बार गुहार लगाने के बाद अब पीड़ित ने मुख्यमंत्री के समक्ष शिकायत रखी है। उसका कहना है कि वह किसी विशेष कृपा की मांग नहीं कर रहा, बल्कि चाहता है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच करें। पीड़ित की मांग है कि यदि जांच में वह सरकारी योजना अथवा आपदा राहत के लिए पात्र पाया जाता है तो उसे नियमानुसार सरकारी सहायता एवं रहने के लिए आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि उसका परिवार सुरक्षित तरीके से जीवन यापन कर सके।

‘पहले मौके पर आकर स्थिति देखें, फिर पात्रता तय करें’

पीड़ित ने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से मांग की है कि पहले मौके पर आकर उसके घर और परिवार की वास्तविक स्थिति देखी जाए। इसके बाद शासन की निर्धारित पात्रता एवं नियमों के आधार पर यह तय किया जाए कि उसे किन सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है। उसका कहना है कि यदि जांच के बाद वह पात्र पाया जाता है तो उसे प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा अन्य पात्र सरकारी आवास योजना और आपदा राहत का लाभ दिलाया जाए। पीड़ित के लिए इस समय सबसे बड़ी जरूरत परिवार को सुरक्षित छत उपलब्ध कराने की है।

जनहित का सवाल—आपदा के समय कितनी जल्दी पहुंचती है सरकारी मदद?

यह मामला केवल एक परिवार की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा अथवा प्राकृतिक कारणों से प्रभावित गरीब परिवारों तक सरकारी सहायता पहुंचने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। बारिश के मौसम में कमजोर अथवा जर्जर मकानों के गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे समय में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि शिकायत मिलने पर मौके की स्थिति का सत्यापन किया जाए और पात्रता के अनुसार राहत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए। बनवारी लाल का मामला भी अब इसी प्रक्रिया की ओर प्रशासन का ध्यान खींच रहा है।

पीड़ित को अब प्रशासन से तत्काल राहत की उम्मीद

घर गिरने के बाद परिवार के सामने पैदा हुई परिस्थितियों के बीच पीड़ित ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उसकी मांग है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर घर की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण करें, परिवार की वर्तमान स्थिति का आकलन करें और नियमानुसार राहत उपलब्ध कराएं। साथ ही पीड़ित ने रहने के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था किए जाने की भी मांग की है। अमेठी के संग्रामपुर क्षेत्र से सामने आया यह मामला एक ऐसे परिवार की तस्वीर पेश करता है, जिसके सिर से बारिश के बीच छत छिन गई है और जो अब सरकारी मदद की उम्मीद में अधिकारियों की चौखट पर दस्तक दे रहा है। पीड़ित का कहना है कि उसने स्थानीय स्तर से लेकर जिला स्तर तक अपनी समस्या पहुंचाई, लेकिन अभी तक मौके पर स्थलीय जांच नहीं हुई। अब मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच करेंगे और पात्रता के आधार पर पीड़ित परिवार को नियमानुसार राहत एवं आवास का लाभ दिलाने की दिशा में कार्रवाई करेंगे।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस परिवार के पास सिर छिपाने के लिए सुरक्षित छत नहीं है, वहां सरकारी मदद पहुंचने में और कितना समय लगेगा?

नोट: इस मामले में प्रशासन/संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से शामिल किया जाना उचित होगा।