भारतीय नौसेना को मिला नया उप प्रमुख: वाइस एडमिरल ए. एन. प्रमोद ने संभाली कमान, 36 वर्षों के अनुभव से मिलेगी नई रणनीतिक मजबूती
- ऑपरेशन विजय से ऑपरेशन सिंदूर तक निभाई अहम भूमिका, अति विशिष्ट सेवा पदक और युद्ध सेवा पदक से सम्मानित अधिकारी अब बने नौसेना के उप प्रमुख
नई दिल्ली, 1 अगस्त 2026।
भारतीय नौसेना के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत वाइस एडमिरल ए. एन. प्रमोद, एवीएसएम, वाईएसएम ने 1 अगस्त 2026 को आधिकारिक रूप से भारतीय नौसेना के उप प्रमुख (Vice Chief of the Naval Staff) का कार्यभार ग्रहण कर लिया। लगभग 36 वर्षों से अधिक के उत्कृष्ट सैन्य अनुभव के साथ वे ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वाइस एडमिरल ए. एन. प्रमोद ने वाइस एडमिरल तरुण सोबती (यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम) का स्थान लिया है, जो 31 जुलाई 2026 को 38 वर्षों से अधिक की गौरवपूर्ण सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।
गोवा की नौसेना अकादमी से शुरू हुआ गौरवशाली सफर
गोवा स्थित भारतीय नौसेना अकादमी के 38वें एकीकृत कैडेट पाठ्यक्रम के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल ए. एन. प्रमोद 1 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे। वे सी किंग एयर ऑपरेशन अधिकारी तथा संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Communication & Electronic Warfare) के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन तथा नेवल वॉर कॉलेज, गोवा से उच्च स्तरीय सैन्य प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है।
36 वर्षों तक निभाई कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
अपने लंबे और गौरवशाली करियर के दौरान वाइस एडमिरल प्रमोद ने समुद्र और तट—दोनों मोर्चों पर अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने कई प्रमुख युद्धपोतों की कमान संभाली, जिनमें शामिल हैं—
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आईएनएस राजपूत (गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर) – कार्यकारी अधिकारी
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आईएनएस अभय – पनडुब्बी रोधी युद्धपोत
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आईएनएस शार्दुल – लैंडिंग शिप टैंक
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आईएनएस सतपुड़ा – गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट
इन जहाजों की कमान के दौरान उन्होंने समुद्री सुरक्षा अभियानों और परिचालन तैयारियों को नई मजबूती प्रदान की।
ऑपरेशन विजय, पराक्रम और स्नो लेपर्ड में निभाई अहम भूमिका
वाइस एडमिरल ए. एन. प्रमोद भारतीय नौसेना के उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई।
उन्होंने—
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ऑपरेशन विजय (1999)
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ऑपरेशन पराक्रम (2001)
में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा गलवान घाटी की घटना के बाद चलाए गए ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान वे पश्चिमी बेड़े के फ्लीट ऑपरेशन अधिकारी रहे और समुद्री रणनीति के संचालन में अहम भूमिका निभाई।
नौसेना संचालन महानिदेशक के रूप में शानदार कार्यकाल
वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने 13 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक नौसेना संचालन महानिदेशक (Director General Naval Operations) के रूप में कार्य किया।
इस दौरान उन्होंने—
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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की रणनीतिक योजना,
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परिचालन तैयारियों,
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समुद्री सुरक्षा अभियानों,
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तथा पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारतीय हितों की रक्षा हेतु नौसेना की तैनाती
जैसे महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया।
तटवर्ती क्षेत्रों में भी निभाई अहम जिम्मेदारी
समुद्री अभियानों के अलावा उन्होंने कई महत्वपूर्ण तटीय एवं प्रशासनिक पदों पर भी कार्य किया।
उनकी प्रमुख नियुक्तियों में शामिल हैं—
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आईएनएस उत्क्रोश (श्री विजयपुरम) के कमांडिंग ऑफिसर
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डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में डायरेक्टिंग स्टाफ
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भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट
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नौसेना स्टाफ के सहायक प्रमुख (वायु)
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महाराष्ट्र नौसेना क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर
रणनीतिक योजनाओं के विशेषज्ञ
नौसेना मुख्यालय में उन्होंने कई महत्वपूर्ण रणनीतिक जिम्मेदारियां निभाईं।
वे—
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संयुक्त निदेशक (नौसेना वायु)
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निदेशक एवं प्रधान निदेशक (विमान अधिग्रहण)
के पदों पर कार्य कर चुके हैं।
इसके अतिरिक्त वे—
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स्ट्रैटेजिक ऑडिट ग्रुप (2006–2009)
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भारतीय नौसेना रणनीतिक एवं परिचालन परिषद (2016–2019)
के सदस्य भी रहे।
विशिष्ट सेवाओं के लिए मिले राष्ट्रीय सम्मान
भारतीय नौसेना में उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और परिचालन क्षमता को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें—
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2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM)
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2025 में युद्ध सेवा पदक (YSM)
से सम्मानित किया।
ये सम्मान देश की सुरक्षा एवं सैन्य नेतृत्व में उनके उल्लेखनीय योगदान का प्रमाण हैं।
समुद्री सुरक्षा को मिलेगी नई दिशा
वाइस एडमिरल ए. एन. प्रमोद का नौसेना के उप प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालना ऐसे समय में हुआ है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके व्यापक परिचालन अनुभव, आधुनिक युद्ध प्रणाली की समझ और रणनीतिक नेतृत्व क्षमता से भारतीय नौसेना को नई दिशा मिलेगी तथा समुद्री सुरक्षा, रक्षा आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय हितों की रक्षा को और अधिक मजबूती प्राप्त होगी।
देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा से लेकर आधुनिक नौसैनिक रणनीति तक, वाइस एडमिरल ए. एन. प्रमोद का अनुभव भारतीय नौसेना को आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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