भारत का दो टूक फैसला: पाकिस्तान से नहीं खरीदेगा चीनी, वैश्विक बाजार से पूरी होगी जरूरत

भारत का दो टूक फैसला: पाकिस्तान से नहीं खरीदेगा चीनी, वैश्विक बाजार से पूरी होगी जरूरत
  • चीनी के बढ़ते दाम के बीच केंद्र ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को दी मंजूरी; विदेश मंत्रालय ने कहा—पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति पहले से स्पष्ट

नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और घरेलू बाजार में आपूर्ति मजबूत करने की कवायद के बीच भारत सरकार ने पाकिस्तान से चीनी आयात को लेकर अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। पाकिस्तान की ओर से भारत को चीनी बेचने की संभावनाओं को लेकर सामने आई खबरों के बीच केंद्र सरकार ने साफ संकेत दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में पाकिस्तान से चीनी आयात की अनुमति नहीं दी जाएगी। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पाकिस्तान द्वारा भारत को चीनी निर्यात किए जाने की संभावनाओं को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति पहले से ही स्पष्ट है। सरकार के इस रुख से साफ हो गया है कि घरेलू बाजार में चीनी की आवश्यकता बढ़ने के बावजूद पाकिस्तान के लिए भारतीय बाजार के दरवाजे नहीं खोले जाएंगे।

चीनी की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार की बड़ी पहल

भारत में चीनी की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। सरकार का उद्देश्य साफ है—यदि घरेलू उत्पादन और उपलब्धता में किसी कारण से कमी आती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार से चीनी मंगाकर देश में आपूर्ति को मजबूत किया जाए और कीमतों में अनावश्यक तेजी पर नियंत्रण रखा जा सके। इस फैसले के बाद भारतीय रिफाइनरों और व्यापारियों के लिए दुनिया के दूसरे देशों से चीनी खरीदने का रास्ता खुला है। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस अतिरिक्त जरूरत को पाकिस्तान से आयात के माध्यम से पूरा नहीं किया जाएगा।

पाकिस्तानी चीनी उद्योग को भारत में दिखी थी बड़ी संभावना

पाकिस्तान ने अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसी बीच वहां के चीनी उत्पादकों और उद्योग से जुड़े लोगों की नजर भारत जैसे बड़े बाजार पर गई। पाकिस्तानी चीनी उद्योग की ओर से अपनी सरकार से भारत को चीनी निर्यात की संभावनाओं पर विचार करने का आग्रह किया गया था। भारत की विशाल आबादी और चीनी की बड़ी खपत को देखते हुए भारतीय बाजार पाकिस्तानी उत्पादकों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता था। लेकिन दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापारिक प्रतिबंधों के कारण इस संभावना पर फिलहाल विराम लग गया है।

भारत के लिए वैश्विक बाजार में कई विकल्प मौजूद

सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यदि भारत को अतिरिक्त चीनी की आवश्यकता पड़ती है तो वैश्विक बाजार में कई अन्य विकल्प उपलब्ध हैं। ऐसे में पाकिस्तान से चीनी खरीदने की कोई आवश्यकता नहीं है। भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल है। घरेलू स्तर पर उत्पादन में उतार-चढ़ाव आने के बावजूद देश की जरूरत को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात का विकल्प मौजूद है। सरकार का प्रयास है कि घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे और उपभोक्ताओं पर बढ़ती कीमतों का दबाव कम हो।

पाकिस्तान ने भी बढ़ाया चीनी निर्यात का प्रयास

दूसरी ओर पाकिस्तान भी अपने चीनी भंडार और उत्पादन को देखते हुए निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को पाकिस्तान ने करीब 1.05 लाख टन चीनी की बिक्री के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया। ऐसे समय में भारत जैसा विशाल बाजार पाकिस्तानी चीनी उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता था। लेकिन मौजूदा व्यापारिक संबंधों और प्रतिबंधों के चलते पाकिस्तानी चीनी के लिए भारतीय बाजार फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

पहलगाम हमले के बाद व्यापारिक रिश्तों में आया बड़ा बदलाव

भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सभी प्रकार के सामान के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर स्थिति और सख्त हुई। अब चीनी की घरेलू जरूरत बढ़ने के बावजूद सरकार पाकिस्तान से आयात के लिए मौजूदा प्रतिबंधों में किसी प्रकार की छूट देने के मूड में नहीं है। सरकार के रुख से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि आर्थिक जरूरतों के बावजूद पाकिस्तान के साथ व्यापार नीति में तत्काल बदलाव की संभावना नहीं है।

गन्ने से इथेनॉल तक बदलता उत्पादन समीकरण

भारत में चीनी बाजार की स्थिति केवल गन्ने के उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। गन्ने और चीनी के अलावा इथेनॉल उत्पादन भी इस पूरे समीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। गन्ने से बनने वाली चीनी का एक हिस्सा इथेनॉल उत्पादन की दिशा में जाने, गन्ने की उपलब्धता में बदलाव और चीनी मिलों के उत्पादन में उतार-चढ़ाव के कारण कभी-कभी घरेलू बाजार में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात का विकल्प खोला है, ताकि घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखी जा सके।

आम उपभोक्ता पर क्या होगा असर?

सरकार के इस कदम का सीधा उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार से पर्याप्त मात्रा में चीनी देश में आती है तो घरेलू आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर बाजार में आयातित चीनी की उपलब्धता, अंतरराष्ट्रीय कीमतों, घरेलू उत्पादन और मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार ने पाकिस्तान के बजाय वैश्विक बाजार से वैकल्पिक स्रोतों के जरिए चीनी की जरूरत पूरी करने का रास्ता चुना है।

भारत का संदेश साफ—जरूरत होगी तो दूसरे देशों से खरीदेंगे

भारत सरकार के मौजूदा रुख से एक बात स्पष्ट है कि घरेलू बाजार में चीनी की कमी या बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आयात का विकल्प खुला है, लेकिन पाकिस्तान को इस विकल्प से बाहर रखा गया है। यानी चीनी की जरूरत को पूरा करने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में दूसरे देशों का रुख करेगा, लेकिन मौजूदा व्यापार प्रतिबंधों के बीच पाकिस्तान से चीनी खरीदने की अनुमति नहीं देगा। चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने घरेलू बाजार को राहत देने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देकर आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। वहीं पाकिस्तान से चीनी आयात को लेकर भारत ने अपना रुख स्पष्ट रखते हुए किसी भी संभावित व्यापारिक छूट की संभावना को फिलहाल खारिज कर दिया है।

एक तरफ भारत वैश्विक बाजार से चीनी खरीदकर घरेलू जरूरत पूरी करने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान अपने चीनी निर्यात के लिए नए बाजार तलाश रहा है। लेकिन मौजूदा भारत-पाक व्यापार नीति के बीच दोनों देशों के चीनी बाजारों के बीच सीधा व्यापार फिलहाल संभव नहीं दिख रहा।

भारत का संदेश स्पष्ट है—घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए बाजार खुला है, लेकिन पाकिस्तान के लिए नहीं।