महिला सशक्तिकरण की मिसाल बना ‘पहल मेला’, हुनर से आत्मनिर्भरता तक दिखी नई तस्वीर

महिला सशक्तिकरण की मिसाल बना ‘पहल मेला’, हुनर से आत्मनिर्भरता तक दिखी नई तस्वीर
  • डीएम रविंद्र कुमार और पूर्व डीएम एन.पी. सिंह ने किया उद्घाटन; महिला उद्यमियों को सीएम युवा योजना और स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आगे बढ़ने का दिया संदेश

आजमगढ़, 23 अगस्त 2026। हुनर जब हौसले से मिलता है और उसे अवसर का मंच मिल जाता है, तो आत्मनिर्भरता की राह अपने आप आसान होने लगती है। इसी सोच को साकार करता हुआ रविवार को हरिऔध कला भवन महिला उद्यमिता, रचनात्मकता और स्वावलंबन के रंगों से सराबोर नजर आया। यहां न्यू कला केंद्र समिति के तत्वावधान में आयोजित ‘पहल मेला’ महिला सशक्तिकरण की ऐसी तस्वीर बनकर सामने आया, जहां महिलाओं के हुनर, स्थानीय उत्पादों और उद्यमशीलता को एक ही छत के नीचे मंच मिला।

मेले का शुभारंभ जिलाधिकारी रविंद्र कुमार एवं पूर्व जिलाधिकारी एन.पी. सिंह ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। उद्घाटन के बाद दोनों अतिथियों ने विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया और महिला उद्यमियों से संवाद करते हुए उनके उत्पादों, कार्यों और व्यवसाय को विस्तार देने की संभावनाओं के बारे में जानकारी ली। अतिथियों ने महिला उद्यमियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन महिलाओं को अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर प्रदान करते हैं।

डीएम बोले—महिलाएं आगे बढ़ें, अवसरों का लाभ उठाएं

जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने मेले की आयोजक विभा गोयल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन केवल खरीदारी का माध्यम नहीं, बल्कि महिला उद्यमिता को मजबूत करने का प्रभावी मंच भी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से एक ओर महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलता है, वहीं दूसरी ओर आमजन को नवीन और उपयोगी उत्पाद किफायती कीमतों पर उपलब्ध होते हैं। उन्होंने महिला उद्यमियों से अपने छोटे व्यवसायों को बड़े स्तर पर ले जाने और उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।

डीएम ने महिलाओं को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान/सीएम युवा योजना के माध्यम से ऋण सुविधा का लाभ लेकर अपना उद्यम स्थापित करने और उसे विस्तार देने के लिए जागरूक किया। उन्होंने स्थानीय महिला उद्यमियों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने तथा समूहों के माध्यम से उपलब्ध अवसरों और सुविधाओं का लाभ उठाकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता केवल एक परिवार को मजबूत नहीं करती, बल्कि पूरे समाज और अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है।

महिलाओं के स्वावलंबन के लिए हरिऔध कला केंद्र निशुल्क

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी द्वारा हरिऔध कला केंद्र का हाल निशुल्क उपलब्ध कराया गया था। इस पहल से महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच मिला। मेले में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने भी यह साबित किया कि यदि स्थानीय प्रतिभाओं और महिला उद्यमियों को उचित मंच दिया जाए, तो उनके उत्पादों के लिए बाजार और ग्राहक दोनों उपलब्ध हैं।

बनारसी साड़ियों से लेकर फैशन और बच्चों के सामान तक दिखी विविधता

‘पहल मेला’ में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों पर उत्पादों की शानदार विविधता देखने को मिली। रीना अग्रवाल के टिंक्ज रेशा और वाराणसी के सौरभ अग्रवाल के एसके क्रिएशन ने किफायती दरों पर बनारसी सिल्क, जॉर्जेट और शिफॉन की साड़ियां एवं दुपट्टे प्रदर्शित किए। महिलाओं के लिए आकर्षक परिधानों के साथ शानवी क्रिएशन और वैष्णवी कलेक्शन के स्टॉल पर कुर्तियां, बैग और बच्चों के उपयोग की वस्तुएं भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। मेले में खरीदारी करने पहुंची महिलाओं ने विभिन्न डिजाइन और उत्पादों को पसंद किया, वहीं उद्यमियों के लिए यह आयोजन अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का बेहतर अवसर साबित हुआ।

हस्तशिल्प और रचनात्मकता ने भी बटोरी वाहवाही

मेले में केवल कपड़ों और फैशन उत्पादों की ही धूम नहीं रही, बल्कि कला और हस्तनिर्मित वस्तुओं ने भी लोगों का ध्यान खींचा। अनुभा अग्रवाल के चारकोल अटेलियर की आकर्षक पेंटिंग्स, गुजरात की आशा वर्मा के हैंडमेड पाइप क्लीनर, राखी एवं हेयर एक्सेसरीज तथा मनीषा अग्रवाल स्वयं सहायता समूह के शगुन डेकोरेशन गिफ्ट्स लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। वहीं एलिसियन ज्वेल्स की सिल्वर ज्वेलरी, ग्लैमरस मेकओवर की आर्टिफिशियल ज्वेलरी तथा साक्षी श्री हैंडमेड के खिलौने और कपड़े भी लोगों को खूब पसंद आए।

पौष्टिक उत्पादों ने दिया सेहत का संदेश

मेले में स्वास्थ्य और पौष्टिकता से जुड़े उत्पादों की भी मौजूदगी रही। पूनम बरनवाल के ‘द देशी डिलाइट्स’ स्टॉल पर मोरिंगा, तीसी, मूंग और सोंठ से तैयार पौष्टिक उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इन उत्पादों ने पारंपरिक खाद्य सामग्री और स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाई। लोगों ने उत्पादों की जानकारी लेने के साथ उन्हें खरीदने में भी उत्साह दिखाया।

मुफ्त स्वास्थ्य जांच ने भी खींचा लोगों का ध्यान

‘पहल मेला’ में मनोरंजन और खरीदारी के साथ स्वास्थ्य जागरूकता को भी महत्व दिया गया। पन्ना टावर की प्रिया अग्रवाल की ओर से मुफ्त हेल्थ एवं स्किन चेकअप की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही टिंटू गुप्ता की जागृति वेलफेयर की ओर से लोगों के लिए मुफ्त शुगर और बीपी जांच की सुविधा दी गई। मेले में पहुंचे लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया और अपने स्वास्थ्य से जुड़ी प्राथमिक जांच कराई।

बच्चों के भविष्य और वित्तीय सुरक्षा की भी मिली जानकारी

मेले में बच्चों के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने को लेकर भी जागरूकता का प्रयास किया गया। श्रवण गुप्ता ने लोगों को म्यूचुअल फंड के माध्यम से बच्चों के भविष्य के लिए वित्तीय योजना तैयार करने से जुड़ी जानकारी दी। इससे मेले का स्वरूप केवल खरीदारी और मनोरंजन तक सीमित न रहकर स्वास्थ्य, वित्तीय जागरूकता, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता जैसे विभिन्न सामाजिक सरोकारों से जुड़ा नजर आया।

झालमुड़ी और पानीपुरी से लेकर मेहंदी तक खूब रही रौनक

मेले में खाने-पीने और मनोरंजन की भी भरपूर व्यवस्था रही। कोलकाता की प्रसिद्ध झालमुड़ी, पानीपुरी और दहीपुरी का लोगों ने जमकर स्वाद लिया। वहीं मेहंदी और गेम्स कॉर्नर ने खास तौर पर बच्चों और महिलाओं को आकर्षित किया। दिनभर मेले में लोगों की आवाजाही बनी रही और हर स्टॉल पर उत्साह का माहौल दिखाई दिया।

आयोजक के प्रयासों की सराहना

मेले के आयोजन को लेकर शहरवासियों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने एक ही स्थान पर खरीदारी, स्वास्थ्य जांच, मनोरंजन और महिला उद्यमियों के उत्पादों को देखने का अवसर मिलने की सराहना की। मेले ने यह संदेश भी दिया कि महिलाओं के पास हुनर की कमी नहीं है। आवश्यकता केवल ऐसे मंचों की है, जहां वे अपने उत्पादों को प्रदर्शित कर सकें, ग्राहकों से जुड़ सकें और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें।

गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में पूर्व जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह, प्रबंधक राजेंद्र यादव, प्रबंधक रमाकांत वर्मा, अनूप अग्रवाल, नीलांबुज़ गुप्ता सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।कार्यक्रम का मंच संचालन टिंटू गुप्ता और गौरी अग्रवाल ने किया। अतिथियों ने महिला उद्यमियों और आयोजकों का उत्साहवर्धन करते हुए मेले की सफलता की सराहना की।

‘पहल’ से बढ़ा आत्मनिर्भरता का कारवां

आजमगढ़ का ‘पहल मेला’ अपने नाम के अनुरूप महिलाओं के लिए आगे बढ़ने की एक सकारात्मक पहल बनकर सामने आया। यहां किसी ने अपने हाथों से तैयार उत्पादों को बाजार दिया, तो किसी ने अपने छोटे व्यवसाय को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। कहीं बनारसी साड़ियों की चमक नजर आई, तो कहीं हस्तशिल्प और कला की खूबसूरती ने लोगों का मन मोहा।सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मेले ने महिलाओं को केवल उत्पाद बेचने का मंच नहीं दिया, बल्कि स्वरोजगार, सरकारी योजनाओं, स्वयं सहायता समूहों, स्वास्थ्य और वित्तीय जागरूकता से जोड़ने का संदेश भी दिया।

जब महिलाओं के हुनर को अवसर मिलता है, तो आत्मनिर्भरता केवल एक सपना नहीं रहती—वह परिवार, समाज और पूरी अर्थव्यवस्था की नई ताकत बन जाती है। आजमगढ़ का ‘पहल मेला’ इसी बदलती तस्वीर की खूबसूरत मिसाल बनकर सामने आया।