इंस्टाग्राम पर ‘दोस्ती और मुलाकात’ का झांसा, 24 वर्षीय युवक से साइबर ठगी
- पालड़ी में PG में रहने वाले युवक ने साइबर क्राइम ब्रांच में दर्ज कराई शिकायत; स्पॉन्सर्ड विज्ञापन के जरिए कथित ठगों ने बनाया निशाना
अहमदाबाद। सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक विज्ञापन किस तरह लोगों को साइबर ठगी के जाल में फंसा सकते हैं, इसका एक और मामला अहमदाबाद के पालड़ी इलाके से सामने आया है। यहां पीजी में रहने वाले 24 वर्षीय अथर्व पारोलकर के साथ कथित साइबर ठगी का मामला सामने आया है। मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले अथर्व ने इस संबंध में साइबर क्राइम ब्रांच में शिकायत देकर पूरी घटना की जानकारी दी है। शिकायत के अनुसार, अथर्व की नजर इंस्टाग्राम पर दिखाई दे रहे एक स्पॉन्सर्ड विज्ञापन पर पड़ी थी। विज्ञापन में दावा किया गया था कि अहमदाबाद में उनके आसपास रहने वाली किसी युवती से भावनात्मक बातचीत और मुलाकात कराई जा सकती है। विज्ञापन की इसी पेशकश के बाद वह कथित तौर पर कुछ लोगों के संपर्क में आए।
सोशल मीडिया विज्ञापन से शुरू हुआ संपर्क
बताया गया है कि इंस्टाग्राम पर विज्ञापन देखने के बाद अथर्व ने उसमें दिए गए माध्यम से संपर्क किया। बातचीत के दौरान उन्हें ऐसी महिला से बातचीत और मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया, जो कथित तौर पर उनके आसपास के इलाके में रहती थी। शुरुआत में बातचीत सामान्य और आकर्षक प्रस्ताव के रूप में सामने आई, लेकिन धीरे-धीरे मामला ऐसे मोड़ पर पहुंच गया, जहां साइबर ठगी की आशंका पैदा हुई। शिकायत के बाद अब साइबर क्राइम ब्रांच पूरे मामले की जांच में जुटी है।
‘इमोशनल कनेक्शन’ के नाम पर बनाया गया भरोसा
सोशल मीडिया के दौर में दोस्ती, रिश्ते और मुलाकात से जुड़े विज्ञापनों का इस्तेमाल लोगों को आकर्षित करने के लिए किया जाता है। इस मामले में भी कथित तौर पर इसी तरह के वादे के जरिए युवक का भरोसा जीतने का प्रयास किया गया। ऐसे मामलों में साइबर ठग पहले सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क स्थापित करते हैं और फिर धीरे-धीरे सामने वाले व्यक्ति से निजी जानकारी, दस्तावेज, ओटीपी या पैसे हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि, अथर्व के मामले में वास्तव में किस तरीके से ठगी की गई और कितनी रकम का नुकसान हुआ, इसका विस्तृत खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
युवाओं के लिए सोशल मीडिया पर बढ़ता साइबर खतरा
यह मामला सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। इंस्टाग्राम, फेसबुक या अन्य प्लेटफॉर्म पर दिखने वाला हर विज्ञापन विश्वसनीय हो, यह जरूरी नहीं है। खासकर दोस्ती, नौकरी, निवेश, डेटिंग, मुलाकात या कम समय में अधिक लाभ जैसे आकर्षक दावों वाले विज्ञापनों के पीछे साइबर ठगी का खतरा हो सकता है। साइबर अपराधी अक्सर व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति और उसकी जिज्ञासा का फायदा उठाकर बातचीत आगे बढ़ाते हैं। पहले विश्वास कायम किया जाता है और इसके बाद आर्थिक लेन-देन या निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है।
साइबर क्राइम ब्रांच ने शुरू की जांच
अथर्व पारोलकर द्वारा शिकायत दिए जाने के बाद मामला साइबर क्राइम ब्रांच तक पहुंच गया है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित विज्ञापन किस अकाउंट या नेटवर्क से संचालित किया जा रहा था और युवक से संपर्क करने वाले लोग कौन थे| जांच में सोशल मीडिया अकाउंट, बातचीत, भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि कहीं इसी तरह के विज्ञापन के जरिए अन्य लोगों को भी निशाना तो नहीं बनाया गया।
आकर्षक विज्ञापन से रहें सावधान
साइबर सुरक्षा के लिहाज से विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ संपर्क होने पर जल्दबाजी में व्यक्तिगत जानकारी या आर्थिक विवरण साझा नहीं करना चाहिए। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, अज्ञात व्यक्ति को ओटीपी बताने या बिना सत्यापन के पैसे भेजने से बचना जरूरी है।
पालड़ी की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सोशल मीडिया की चमकदार दुनिया में दिखने वाला हर प्रस्ताव सच्चा नहीं होता। कुछ ही मिनटों की लापरवाही आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी का कारण भी बन सकती है।
अहमदाबाद के पालड़ी इलाके में सामने आया यह साइबर ठगी का मामला सोशल मीडिया यूजर्स के लिए सतर्क रहने का संदेश है। इंस्टाग्राम के एक स्पॉन्सर्ड विज्ञापन से शुरू हुआ संपर्क अब साइबर क्राइम ब्रांच की जांच तक पहुंच चुका है। फिलहाल मामले की वास्तविकता और कथित ठगी की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ऑनलाइन दुनिया में भरोसा करने से पहले सत्यापन और सावधानी बेहद जरूरी है।







