ब्रिटेन में भारतीय टैंकर कैप्टन पर रूस की मदद का आरोप, पत्नी बोलीं—‘मेरे पति को बनाया गया बलि का बकरा’
- इंग्लिश चैनल में जब्त तेल टैंकर ‘स्मिर्टोस’ के कैप्टन अजय पंत पर प्रतिबंधित रूसी तेल की आपूर्ति का आरोप; दोष सिद्ध होने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान, 15 दिसंबर से शुरू होगा मुकदमा
लंदन/नई दिल्ली। रूस के खिलाफ लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच ब्रिटेन में एक भारतीय मर्चेंट नेवी कैप्टन का मामला अब सुर्खियों में है। 38 वर्षीय कैप्टन अजय पंत पर ब्रिटेन में प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, जिस तेल टैंकर ‘स्मिर्टोस’ की कमान पंत के पास थी, उसे जून में इंग्लिश चैनल में ब्रिटिश बलों ने रोककर जब्त किया था। पंत पर रूस से प्रतिबंधित तेल या तेल उत्पाद को किसी तीसरे देश तक जहाज के जरिए पहुंचाने का आरोप है। मामले में दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल का प्रावधान बताया गया है। पंत ने आरोपों से इनकार किया है और उनका मुकदमा 15 दिसंबर 2026 से शुरू होने वाला है। इस बीच उनकी पत्नी रितु पंत ने अपने पति का बचाव करते हुए उन्हें ‘बलि का बकरा’ बताया है।
इंग्लिश चैनल में कमांडो कार्रवाई के बाद गिरफ्तार हुए थे पंत
मामला 14 जून 2026 का है, जब ब्रिटिश रॉयल मरीन कमांडो ने हेलीकॉप्टर के जरिए इंग्लिश चैनल में तेल टैंकर ‘स्मिर्टोस’ पर कार्रवाई की थी। ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी और अन्य अधिकारियों की कार्रवाई के बाद कैप्टन अजय पंत को हिरासत में लिया गया। ब्रिटेन के अभियोजन पक्ष के अनुसार, पंत पर जून 2026 के दौरान रूस से प्रतिबंधित तेल या तेल उत्पाद को जहाज के माध्यम से किसी तीसरे देश तक पहुंचाने से संबंधित प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप है।
‘स्मिर्टोस’ को बताया जा रहा रूस की ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा
ब्रिटिश अधिकारियों का आरोप है कि ‘स्मिर्टोस’ रूस की कथित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़ा हुआ था। ‘शैडो फ्लीट’ उन जहाजों के नेटवर्क के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, जिन पर आरोप है कि वे स्वामित्व, बीमा और झंडे जैसी व्यवस्थाओं में अस्पष्टता का इस्तेमाल करते हुए रूस के तेल कारोबार पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। ब्रिटिश अधिकारियों ने इस कार्रवाई को रूस के प्रतिबंधित तेल व्यापार पर कार्रवाई के व्यापक अभियान का हिस्सा बताया है। ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के मुताबिक पंत पर रूसी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, आरोप लगना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है और मामले का अंतिम फैसला अदालत में होने वाली सुनवाई के बाद ही होगा।
पत्नी रितु पंत ने कहा—‘गलत जगह, गलत समय पर थे’
कैप्टन अजय पंत की पत्नी रितु पंत ने एक साक्षात्कार में अपने पति को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्हें परिस्थितियों का शिकार बनाया गया है। उनका कहना है कि उनके पति केवल जहाज के कप्तान थे और उन्हें इस पूरे मामले में ‘बलि का बकरा’ बनाया गया। रितु पंत के अनुसार, जून में गिरफ्तारी के बाद उनके पति को जमानत नहीं मिल सकी और लंबे समय से हिरासत में रहने के कारण उनकी मानसिक स्थिति पर भी गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने अपने पति की स्थिति को लेकर चिंता जताई है।
बचाव पक्ष का तर्क—कैप्टन सिर्फ आदेशों का पालन कर रहे थे
मामले में बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया है कि अजय पंत जहाज के मालिक के कर्मचारी थे और वे अपने वरिष्ठों के निर्देशों का पालन कर रहे थे। बचाव पक्ष इस बात पर जोर दे रहा है कि जहाज के कार्गो और उसके व्यापारिक संचालन से जुड़े निर्णयों में कैप्टन की भूमिका को किस तरह देखा जाए, यह महत्वपूर्ण कानूनी सवाल है। दूसरी ओर, ब्रिटिश अभियोजन पक्ष का आरोप है कि पंत को कार्गो की जानकारी थी और वह उसके परिवहन की जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब अदालत में दोनों पक्षों के तर्क और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच होगी।
24 सदस्यीय क्रू में भारतीय और जॉर्जियाई नागरिक शामिल थे
ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी के अनुसार, कार्रवाई के समय ‘स्मिर्टोस’ पर 24 सदस्यीय क्रू मौजूद था, जिसमें भारतीय और जॉर्जियाई नागरिक शामिल थे। कार्रवाई के बाद कैप्टन अजय पंत के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के प्रवर्तन में अब केवल जहाजों और कंपनियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि समुद्री कर्मचारियों और जहाज के संचालन से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी भी कानूनी जांच के दायरे में आ रही है।
10 साल तक की सजा का प्रावधान, लेकिन अंतिम फैसला अदालत करेगी
पंत पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं और संबंधित अपराधों में अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। लेकिन अभी यह केवल आरोप हैं। अदालत में अभियोजन पक्ष को अपने आरोप साबित करने होंगे और बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार होगा। इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि कैप्टन अजय पंत ने प्रतिबंधों का उल्लंघन किया था। मामले का अंतिम सच न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
15 दिसंबर से शुरू होगा मुकदमा
कैप्टन अजय पंत के मामले की सुनवाई 15 दिसंबर 2026 से शुरू होने वाली है। इस मुकदमे पर भारत में भी नजर रहेगी, क्योंकि इसमें एक भारतीय मर्चेंट नेवी अधिकारी पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन का आरोप है।
एक नजर में पूरा मामला
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आरोपी: कैप्टन अजय पंत, 38 वर्ष
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जहाज: तेल टैंकर ‘स्मिर्टोस’
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स्थान: इंग्लिश चैनल, ब्रिटेन
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आरोप: प्रतिबंधित रूसी तेल/तेल उत्पाद को तीसरे देश तक पहुंचाने से संबंधित प्रतिबंधों का कथित उल्लंघन
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गिरफ्तारी: जून 2026
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अधिकतम संभावित सजा: 10 वर्ष तक
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पत्नी का दावा: अजय पंत को ‘बलि का बकरा’ बनाया गया
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पंत का रुख: आरोपों से इनकार
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मुकदमा: 15 दिसंबर 2026 से प्रस्तावित
अब अदालत में तय होगी जिम्मेदारी
इंग्लिश चैनल में हुई इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार, रूस पर लगे प्रतिबंधों और जहाजों के संचालन में कैप्टन की कानूनी जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ ब्रिटेन का दावा है कि प्रतिबंधित रूसी तेल की आपूर्ति से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ, वहीं दूसरी तरफ अजय पंत का परिवार उन्हें परिस्थितियों का शिकार बता रहा है।
अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली बड़ी कड़ी 15 दिसंबर से शुरू होने वाली अदालती सुनवाई होगी, जहां आरोपों, साक्ष्यों और कैप्टन की वास्तविक भूमिका पर फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत तय किया जाएगा।







