SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार के समर्थन में बंगाल BJP अध्यक्ष, बोले—‘पद्म भूषण से किया जाना चाहिए सम्मानित’
- विपक्ष की ओर से इस्तीफे की मांग के बीच समिक भट्टाचार्य ने की मुख्य चुनाव आयुक्त के काम की तारीफ; कहा—पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव और मतदाता सूची को दुरुस्त करने में रही भूमिका
नई दिल्ली/कोलकाता, 25 सितंबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे SIR (Special Intensive Revision) विवाद के बीच पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य उनके समर्थन में सामने आए हैं। जहां कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार के काम की सराहना करते हुए कहा है कि उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना चाहिए। समिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कार्यों का उल्लेख करते हुए ज्ञानेश कुमार की भूमिका की प्रशंसा की। उनके अनुसार, राज्य में लोगों को बिना भय और दबाव के मतदान करने का अवसर मिला तथा चुनाव प्रक्रिया में सुधार हुआ। यह बयान ऐसे समय आया है जब SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
‘ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण मिलना चाहिए’
समिक भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को कम से कम पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था और मतदान के माहौल का उल्लेख करते हुए उनके कार्य की सराहना की। भट्टाचार्य के बयान के मुताबिक, लंबे समय बाद पश्चिम बंगाल में लोगों को भय और दबाव के माहौल से बाहर निकलकर मतदान करने का अवसर मिला। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी हत्या की घटना के बिना लोगों के मतदान करने की बात भी कही। उनका यह बयान विपक्ष के उस रुख के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की जा रही है।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
दरअसल, Special Intensive Revision यानी SIR के मुद्दे पर चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक विवाद तब तेज हुआ जब The Indian Express की एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा दो अन्य चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—के बीच मतभेदों का दावा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक असहमति दर्ज की थी। इनमें मतदाता सूची से नाम हटाने और SIR से जुड़े मुद्दे भी शामिल बताए गए। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी।
राहुल गांधी ने मांगा CEC का इस्तीफा
कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 24 सितंबर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित बदलावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए तथा ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने अथवा सरकारी गवाह बनने की अपील की। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में चुनाव, मतदाता और संविधान के बीच संबंध को रेखांकित करते हुए दावा किया कि यदि मताधिकार की व्यवस्था कमजोर होती है तो उसका प्रभाव लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़ता है। उन्होंने कई राज्यों में चुनावी परिणामों में एंटी-इंकम्बेंसी के कथित तौर पर कम दिखाई देने को भी अपने सवालों से जोड़ा। कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में प्रदर्शन का आह्वान भी किया है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और हटाने की मांग शामिल है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
विवाद के बीच चुनाव आयोग की ओर से यह कहा गया है कि SIR समेत आयोग के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग ने मतदाता सूची और उससे जुड़े निर्णयों पर उठाए गए सवालों के संदर्भ में अपने निर्णयों का बचाव किया है। इस तरह एक ओर विपक्ष चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग की ओर से निर्णयों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही गई है। इसी बीच भाजपा नेताओं की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के समर्थन में बयान सामने आ रहे हैं।
एक ही मुद्दे पर आमने-सामने राजनीतिक दावे
SIR विवाद ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। एक तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की बात कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके निर्णयों पर लगाए जा रहे आरोपों का आधार स्पष्ट होना चाहिए तथा आयोग ने अपने स्तर पर प्रक्रिया का स्पष्टीकरण दिया है। इसी राजनीतिक माहौल में पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य का ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण दिए जाने का बयान सामने आया है, जिसने SIR विवाद को लेकर चल रही बहस को एक नया राजनीतिक आयाम दे दिया है।
फिलहाल SIR विवाद में तीन प्रमुख बातें चर्चा के केंद्र में हैं—
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विपक्ष की मांग: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया की समीक्षा की मांग।
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भाजपा का पक्ष: चुनाव आयोग के निर्णयों का बचाव और ज्ञानेश कुमार के समर्थन में राजनीतिक बयान।
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चुनाव आयोग का रुख: आयोग के अनुसार SIR सहित उसके फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति प्राप्त थी।
आने वाले दिनों में SIR से जुड़े निर्णयों, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक तथा सार्वजनिक बहस के और तेज होने की संभावना है।







