कचरे से बनेगी जैविक खाद, बड़हलगंज में कम्पोस्ट पिट का शिलान्यास; स्वच्छता के साथ आय बढ़ाने की पहल

कचरे से बनेगी जैविक खाद, बड़हलगंज में कम्पोस्ट पिट का शिलान्यास; स्वच्छता के साथ आय बढ़ाने की पहल
  • नगर पंचायत की नई पहल से गीले कचरे का होगा सदुपयोग, जैविक खाद निर्माण को मिलेगा बढ़ावा; रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वरता बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, शुभम शर्मा, गोरखपुर, उ.प्र.

बड़हलगंज, गोरखपुर। कचरे को समस्या नहीं, बल्कि उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित करने की दिशा में नगर पंचायत बड़हलगंज ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। नगर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने, गीले कचरे का प्रभावी निस्तारण करने और उससे जैविक खाद तैयार कर उपयोग में लाने के उद्देश्य से नगर पंचायत में कम्पोस्ट पिट निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर ने सभासद रवि साहनी के साथ इस निर्माण कार्य की आधारशिला रखी।

इस पहल का उद्देश्य केवल नगर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना ही नहीं, बल्कि कूड़े-कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलकर पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती को भी प्रोत्साहित करना है। यदि गीले एवं जैविक कचरे का व्यवस्थित ढंग से प्रसंस्करण किया जाए, तो उससे उपयोगी जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इससे कचरे के निस्तारण में मदद मिलने के साथ खाद के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

नगर पंचायत की इस पहल को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

कचरे का होगा सदुपयोग, स्वच्छता अभियान को मिलेगी नई दिशा

आज नगरों में बढ़ती आबादी और दैनिक गतिविधियों के कारण घरेलू कचरे की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से रसोई से निकलने वाले गीले कचरे, सब्जियों एवं फलों के छिलकों तथा अन्य जैविक अपशिष्ट के उचित निस्तारण की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि ऐसे कचरे को दूसरे अपशिष्ट से अलग करके वैज्ञानिक तरीके से संसाधित किया जाए, तो इससे जैविक खाद बनाई जा सकती है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए नगर पंचायत बड़हलगंज में कम्पोस्ट पिट का निर्माण कराया जा रहा है। इसके माध्यम से जैविक कचरे को उपयोगी खाद में परिवर्तित करने की व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस व्यवस्था का प्रभावी संचालन होने पर कचरे के बेहतर प्रबंधन, स्वच्छता व्यवस्था में सुधार और जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, कचरे को बेकार समझकर फेंकने के बजाय उसका पुनः उपयोग करने की आदत को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

कचरे से खाद बनाने की यह अवधारणा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर उपयोग का संदेश भी देती है।

योगी सरकार की पहल से जैविक खाद निर्माण को प्रोत्साहन

प्रदेश में जैविक खेती और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नगर पंचायतों में कम्पोस्ट पिट जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से जैविक कचरे के निस्तारण और उससे खाद तैयार करने की संभावनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। कम्पोस्ट पिट में उपयुक्त जैविक कचरे को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सड़ाकर खाद तैयार की जा सकती है। वहीं, वर्मी कम्पोस्ट पद्धति में केंचुओं की सहायता से जैविक पदार्थों को पोषक खाद में परिवर्तित किया जाता है। नादेप कम्पोस्ट भी जैविक अपशिष्ट से खाद तैयार करने की एक प्रचलित विधि है। इन विधियों का सही ढंग से उपयोग करने पर जैविक कचरे का निस्तारण करने के साथ कृषि एवं बागवानी के लिए उपयोगी खाद प्राप्त की जा सकती है। नगर पंचायत बड़हलगंज में कम्पोस्ट पिट निर्माण का उद्देश्य भी कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की इसी अवधारणा को आगे बढ़ाना है। हालांकि, तैयार खाद की मात्रा, उसके उपयोग और उससे होने वाली संभावित आय का आकलन निर्माण पूरा होने तथा व्यवस्था के संचालन के बाद ही किया जा सकेगा।

महेश उमर बोले—मिट्टी की सेहत बचाने के लिए जैविक खाद जरूरी

शिलान्यास के अवसर पर चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर ने जैविक खाद के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा कम होने से भूमि की गुणवत्ता और खेती की लागत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में वर्मी कम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद एक उपयोगी एवं टिकाऊ विकल्प के रूप में सामने आती है।

उन्होंने कहा कि जैविक खाद मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाने और उसमें जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में सहायक होती है। इसके नियमित एवं उचित उपयोग से मिट्टी की जल धारण क्षमता में सुधार हो सकता है और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है। इससे भूमि की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। महेश उमर ने कहा कि किसानों को जैविक खाद के उपयोग के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक खाद का संतुलित इस्तेमाल खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद कर सकता है। इसके लिए जरूरी है कि किसानों को जैविक खाद के लाभ, उसके सही उपयोग और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के तरीकों की जानकारी दी जाए।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जैविक संसाधनों का बेहतर उपयोग भविष्य की खेती के लिए महत्वपूर्ण है। नगरों में निकलने वाले जैविक कचरे को उपयोगी खाद में परिवर्तित करने से एक ओर कचरे के निस्तारण की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है, तो दूसरी ओर कृषि एवं बागवानी के लिए खाद का एक वैकल्पिक स्रोत भी विकसित किया जा सकता है।

किसानों के लिए उपयोगी विकल्प है वर्मी कम्पोस्ट

खेती में लगातार बढ़ती लागत किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती है। खाद, बीज, सिंचाई और अन्य कृषि संसाधनों पर होने वाले खर्च का सीधा असर खेती की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। ऐसे में खेतों में उपलब्ध जैविक अवशेषों तथा अन्य उपयुक्त जैविक पदार्थों से खाद तैयार करना किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकता है।

वर्मी कम्पोस्ट को सामान्यतः केंचुआ खाद कहा जाता है। इस प्रक्रिया में केंचुओं और सूक्ष्मजीवों की सहायता से जैविक पदार्थों का विघटन होता है और उनसे पोषक तत्वों से युक्त खाद तैयार की जाती है।

इसका उपयोग मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने तथा उसकी संरचना और जल धारण क्षमता में सुधार करने के लिए किया जाता है। हालांकि, खाद की गुणवत्ता उसके निर्माण की प्रक्रिया, इस्तेमाल किए गए कच्चे पदार्थों और उचित रखरखाव पर निर्भर करती है। जैविक खाद का इस्तेमाल मिट्टी की जरूरत और फसल की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। संतुलित पोषण प्रबंधन के माध्यम से किसान मिट्टी की सेहत बनाए रखने और खेती की दीर्घकालिक उत्पादकता को बेहतर करने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं।

अनुदान योजनाओं से जैविक खेती को मिल सकता है प्रोत्साहन

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जाती है। वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित करने के लिए भी पात्रता और संबंधित योजना के प्रावधानों के अनुसार अनुदान की व्यवस्था हो सकती है। किसानों के लिए जरूरी है कि वे अनुदान की वर्तमान दर, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी संबंधित कृषि विभाग या अधिकृत कार्यालय से प्राप्त करें। किसी योजना के तहत सहायता की राशि और प्रतिशत राज्य, योजना तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

यदि किसानों को उचित तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाए, तो वे अपने खेतों में जैविक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे खेती में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा मिलने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों को भी मजबूती मिल सकती है। नगर पंचायत में कम्पोस्ट पिट का निर्माण इसी व्यापक सोच से जुड़ा है, जिसमें जैविक कचरे को बेकार पदार्थ मानने के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

स्वच्छ नगर और स्वस्थ पर्यावरण की दिशा में अहम कदम

किसी भी नगर की स्वच्छता केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई तक सीमित नहीं होती। कचरे का पृथक्करण, उसका नियमित संग्रहण, उचित निस्तारण और पुनः उपयोग भी स्वच्छता व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। यदि गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र किया जाए तथा जैविक कचरे को उचित प्रक्रिया के माध्यम से खाद बनाने में इस्तेमाल किया जाए, तो कचरे के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। नगर पंचायत बड़हलगंज में कम्पोस्ट पिट निर्माण से इस दिशा में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। हालांकि, इसके वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद व्यवस्था का संचालन किस प्रकार किया जाता है, कितना जैविक कचरा एकत्र होता है और तैयार खाद का उपयोग किस तरह सुनिश्चित किया जाता है।

इसके लिए नागरिकों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण होगी। घरों और दुकानों से निकलने वाले जैविक कचरे को अलग रखना, निर्धारित स्थान पर जमा करना और स्वच्छता संबंधी नियमों का पालन करना इस पहल की सफलता में योगदान दे सकता है।

कचरे से संसाधन, संसाधन से उपयोगिता—यही है टिकाऊ विकास की सोच

वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जैविक कचरे से खाद तैयार करने की व्यवस्था स्थानीय निकायों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। यदि कम्पोस्ट पिट का संचालन व्यवस्थित ढंग से किया जाए, तो नगर पंचायत को जैविक कचरे के निस्तारण में मदद मिल सकती है। तैयार खाद का उपयोग निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सार्वजनिक हरित क्षेत्रों, पौधरोपण और अन्य उपयुक्त कार्यों में किया जा सकता है। इसकी बिक्री या उससे आय अर्जित करने की संभावना भी तैयार खाद की गुणवत्ता, उत्पादन लागत और उपलब्ध बाजार पर निर्भर करेगी। इस प्रकार की व्यवस्था को सफल बनाने के लिए नियमित निगरानी, उचित तकनीकी प्रबंधन, कचरे का पृथक्करण और तैयार खाद का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।

 मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, स्वच्छता बढ़ेगी तो स्वस्थ समाज बनेगा

नगर पंचायत बड़हलगंज में कम्पोस्ट पिट निर्माण कार्य का शिलान्यास स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जैविक संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर और सभासद रवि साहनी की उपस्थिति में शुरू हुई इस पहल से उम्मीद है कि नगर में गीले एवं जैविक कचरे के उचित प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रयास की सफलता केवल निर्माण कार्य पूरा होने से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी संचालन, नागरिकों की भागीदारी और तैयार खाद के उपयोग की व्यवस्था से तय होगी। यदि इन पहलुओं पर निरंतर ध्यान दिया जाता है, तो कम्पोस्ट पिट नगर की स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने और जैविक खाद के उपयोग को प्रोत्साहित करने में सहायक साबित हो सकता है।

महेश उमर ने खेती और मिट्टी की सेहत को लेकर जो संदेश दिया, वह आज की परिस्थितियों में विशेष महत्व रखता है। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, जैविक संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए खेती को टिकाऊ बनाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

कचरे का सही प्रबंधन, मिट्टी की बेहतर सेहत और जैविक संसाधनों का सदुपयोग—इन तीन लक्ष्यों को साथ लेकर आगे बढ़ने वाली ऐसी पहल बड़हलगंज को स्वच्छ एवं पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक नगर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।