11 साल पुराने भरोसे पर लगा बड़ा दाग, पेट्रोल पंप भुगतान से खुला राज; 32 आरोपी नामजद, 9 गिरफ्तार
- एक्सेल शीट में हेराफेरी से 10.84 करोड़ का कथित गबन!

सूरत। डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान और एक्सेल आधारित वित्तीय व्यवस्था ने कारोबार को भले ही आसान बना दिया हो, लेकिन यही तकनीक यदि भरोसे की आड़ में गलत हाथों में पहुंच जाए तो करोड़ों रुपये का नुकसान भी कर सकती है। सूरत के मगदल्ला क्षेत्र से सामने आया एक ऐसा ही मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां परिवहन कारोबार से जुड़ी जे.के. एक्सप्रेस और जे.के. ट्रांसलाइन में कथित तौर पर 10.84 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता, धोखाधड़ी और गबन का मामला सामने आया है।

आरोपों के मुताबिक, दोनों कंपनियों में करीब 11 वर्षों तक अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत रहे परिन भरतभाई टेलर ने कंपनी की भुगतान प्रक्रिया और ऑनलाइन बैंकिंग व्यवस्था का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए एक्सेल शीट में लाभार्थियों के बैंक विवरण बदल दिए। आरोप है कि पेट्रोलियम कंपनियों और अन्य व्यावसायिक भुगतानों के लिए तैयार की जाने वाली सूची में कथित तौर पर परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खातों की जानकारी दर्ज कर दी गई।
इस तरह कंपनी के खातों से निकलने वाली रकम कथित तौर पर उन खातों में पहुंचती रही, जिनका संबंधित भुगतान से सीधा संबंध नहीं था। मामले में डुमस पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। कुल 32 व्यक्तियों और संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है, जबकि पुलिस के अनुसार अब तक 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपी गई है।
एक छोटी-सी भुगतान विसंगति ने खोल दिया करोड़ों का राज
कथित वित्तीय अनियमितताओं का यह मामला अचानक सामने नहीं आया। बताया जा रहा है कि इसकी शुरुआत एक मामूली-सी भुगतान विसंगति से हुई। फरवरी 2026 में कंपनी के प्रतिनिधियों ने मुंबई के एक पेट्रोल पंप से संबंधित भुगतान की जांच की। नियमित रूप से करीब 10 लाख रुपये साप्ताहिक भुगतान किए जाने की प्रक्रिया के बीच रिकॉर्ड में करीब 9 लाख रुपये का भुगतान दिखाई दिया। करीब एक लाख रुपये के अंतर ने कंपनी प्रबंधन को सोचने पर मजबूर कर दिया। सवाल उठा कि जब भुगतान की राशि निर्धारित थी, तो पूरी रकम संबंधित पेट्रोल पंप के खाते तक क्यों नहीं पहुंची? यहीं से शुरू हुई जांच ने धीरे-धीरे ऐसे वित्तीय लेनदेन की ओर इशारा किया, जिसने कंपनी प्रबंधन को भी हैरान कर दिया। बैंक स्टेटमेंट, भुगतान रिकॉर्ड और एक्सेल शीट की जांच की गई। जैसे-जैसे रिकॉर्ड का मिलान किया गया, कथित तौर पर ऐसे कई लेनदेन सामने आने लगे जिनमें भुगतान पेट्रोलियम कंपनियों के बजाय दूसरे बैंक खातों में जाता दिखाई दिया।
11 साल का भरोसा बना सबसे बड़ी जिम्मेदारी
शिकायत के अनुसार, परिन भरतभाई टेलर करीब 11 वर्षों से कंपनी में अकाउंटेंट के तौर पर काम कर रहा था। लंबे समय तक कंपनी के साथ जुड़े रहने के कारण उसे वित्तीय लेनदेन, अकाउंटिंग, ऑनलाइन बैंकिंग और भुगतान प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हुई थीं। कंपनी के लिए वह केवल एक कर्मचारी नहीं, बल्कि लंबे समय से भरोसे के साथ जुड़ा हुआ व्यक्ति था। आरोप है कि इसी भरोसे और वित्तीय प्रणाली तक उसकी पहुंच का कथित तौर पर फायदा उठाया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि कंपनी के बैंक खातों से होने वाले विभिन्न भुगतान की जानकारी तैयार करने में एक्सेल शीट का इस्तेमाल होता था। आरोप है कि इसी प्रक्रिया में लाभार्थी के नाम और बैंक विवरण में कथित तौर पर बदलाव किए जाते थे।
एक्सेल शीट बदली और करोड़ों की रकम की दिशा भी बदल गई!
आरोपों का सबसे अहम हिस्सा कंपनी की थोक भुगतान प्रक्रिया से जुड़ा है। कंपनी द्वारा IOCL, HPCL, BPCL जैसी पेट्रोलियम कंपनियों को ईंधन के भुगतान के लिए तैयार की जाने वाली एक्सेल शीट में कथित तौर पर लाभार्थियों की बैंकिंग जानकारी बदली गई। कागजों और रिकॉर्ड में भुगतान पेट्रोलियम कंपनियों के नाम से जुड़ा हुआ दिखाई देता रहा, लेकिन बैंकिंग विवरण में कथित तौर पर अलग-अलग निजी खातों की जानकारी दर्ज की गई। शिकायत के अनुसार, इन खातों में आरोपी के परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और परिचितों के खाते शामिल थे। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ रकम जय कुबेर ट्रांसपोर्ट सहित अन्य साझेदारी फर्मों और कारोबारी संस्थाओं तक भी पहुंचाई गई। यानी जिस रकम का इस्तेमाल कंपनी के वैध व्यावसायिक भुगतान के लिए होना था, उसके कथित तौर पर अलग-अलग रास्ते बनाए गए।
बैंक ट्रांजेक्शन में 8.59 करोड़ रुपये के कथित डायवर्जन का आरोप
शिकायत में कुल कथित वित्तीय नुकसान 10.84 करोड़ रुपये बताया गया है। आरोप के मुताबिक, इसमें सबसे बड़ा हिस्सा बैंक खातों के माध्यम से कथित रूप से डायवर्ट किया गया। शिकायत के अनुसार करीब 8.59 करोड़ रुपये बैंकिंग लेनदेन के जरिए अलग-अलग खातों में पहुंचाए गए। जांच एजेंसियां अब इन खातों की कड़ी जोड़ने में जुटी हैं कि रकम किस खाते में गई, उसके बाद कहां ट्रांसफर हुई और अंततः उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। यही वजह है कि जांच का दायरा केवल मुख्य आरोपी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई व्यक्तियों, रिश्तेदारों, साझेदारों और कारोबारी संस्थाओं तक पहुंच गया है।
पेट्रोल-डीजल के नाम पर भी 54.82 लाख रुपये के कथित दुरुपयोग का आरोप
मामले में केवल बैंक ट्रांजेक्शन ही नहीं, बल्कि कंपनी के फ्यूल कार्ड के कथित दुरुपयोग का आरोप भी सामने आया है। शिकायत के अनुसार, परिवहन कंपनियों द्वारा वाहनों के ईंधन के लिए जारी किए गए फ्यूल कार्ड का कथित तौर पर ऐसे पेट्रोल पंपों और स्थानों पर इस्तेमाल किया गया, जो कंपनी के नियमित परिवहन मार्गों या अधिकृत ईंधन केंद्रों से संबंधित नहीं थे। आरोप है कि 54.82 लाख रुपये से अधिक की राशि का कथित रूप से अनधिकृत ईंधन खरीद में इस्तेमाल किया गया। जांच में हरियाणा, हिसार और कलंबोली सहित विभिन्न स्थानों पर हुए ईंधन लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल अकाउंटिंग में हेराफेरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी के संसाधनों और फ्यूल कार्ड व्यवस्था के कथित दुरुपयोग का भी गंभीर मामला बन सकता है।
फर्जी और बढ़े हुए ट्रांसपोर्ट बिलों का भी आरोप
मामले में कथित तौर पर फर्जी और बढ़े हुए परिवहन बिल तैयार करने का आरोप भी लगाया गया है।शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ ग्राहकों के सामने अतिरिक्त वाहनों को उपलब्ध कराया जाना दर्शाया गया, जबकि वास्तव में वे वाहन कथित तौर पर उपलब्ध नहीं कराए गए थे। इन कथित बिलों के आधार पर भुगतान प्राप्त किया गया और रकम को दूसरी दिशा में मोड़ने का आरोप है। इसके अलावा कुछ ऐसी व्यावसायिक संस्थाओं के नाम पर भी कथित फर्जी बिल और वाउचर तैयार किए जाने का आरोप लगाया गया है, जिनके साथ वास्तविक कारोबार होने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
1.70 करोड़ रुपये से अधिक की रकम एक फर्म तक पहुंचाने का आरोप
शिकायत में एक अन्य महत्वपूर्ण आरोप हेलिकॉन ट्रेडिंग हाउस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े परिवहन कार्य को लेकर है। आरोप है कि परिवहन सेवाओं से संबंधित कथित फर्जी बिल तैयार किए गए और इनके माध्यम से करीब 1.70 करोड़ रुपये से अधिक की रकम संबंधित फर्म तक पहुंचाई गई। इस लेनदेन की वास्तविकता, बिलों की वैधता और रकम के अंतिम लाभार्थी की भूमिका अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कथित रकम से खरीदे गए ट्रक और संपत्तियां?
मामले की जांच में कथित तौर पर यह आरोप भी सामने आया है कि हेराफेरी से प्राप्त रकम का इस्तेमाल निजी और कारोबारी संपत्तियां बनाने में किया गया। शिकायत के अनुसार, आरोपी और उसके परिवार/साझेदारों ने साझेदारी में 12 ट्रक खरीदे। इसके अलावा मुंबई में एक फ्लैट सहित अन्य संपत्तियां खरीदे जाने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या था और क्या उनका संबंध कथित तौर पर गबन की गई राशि से है।
नई कंपनियां खड़ी करने का भी आरोप
शिकायत के मुताबिक, कथित वित्तीय अनियमितताओं से प्राप्त रकम का इस्तेमाल नई कारोबारी गतिविधियां शुरू करने में भी किए जाने का आरोप है। जांच में जय कुबेर ट्रांसपोर्ट, जय कुबेर लॉजिस्टिक्स और कॉन्मोंट बिल्डस्पेस जैसी संस्थाओं का नाम सामने आया है। आरोप है कि इन कारोबारी गतिविधियों में आरोपी के भाई और अन्य साझेदारों की भूमिका रही। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन कंपनियों में धन का निवेश किस स्रोत से हुआ और क्या इन संस्थाओं का संबंध कथित गबन की रकम से है।
32 आरोपी, 9 गिरफ्तार
परिवहन व्यवसायी जितेंद्र बंसीलाल गुप्ता की शिकायत के आधार पर डुमस पुलिस ने कुल 32 आरोपियों और संस्थाओं को मामले में नामजद किया है। FIR में अकाउंटेंट, उसकी पत्नी, भाई, भाभी, माता-पिता के साथ अन्य व्यक्तियों, परिवहन फर्मों और कारोबारी संस्थाओं के नाम शामिल होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें मुख्य आरोपी परिन टेलर के अलावा प्रतीक टेलर, तेजल टेलर, गीता टेलर, भूपेंद्रसिंह भादोरिया, प्रह्लादसिंह कटारिया, महेंद्र सिंह, प्रियंका परमार और मनीष नायका के नाम शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
EOW के हाथों में जांच, खंगाले जा रहे बैंक और डिजिटल रिकॉर्ड
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपी गई है। EOW अब बैंक स्टेटमेंट, एक्सेल शीट, ऑनलाइन बैंकिंग रिकॉर्ड, फ्यूल कार्ड ट्रांजेक्शन, बिल-वाउचर, परिवहन रिकॉर्ड और संबंधित कंपनियों के वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कथित रूप से डायवर्ट की गई रकम की मनी ट्रेल यानी धन के प्रवाह का पता लगाना है। रकम पहले किस खाते में गई, उसके बाद किन खातों में ट्रांसफर हुई और अंत में उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया—इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय करेंगे।
डिजिटल दौर में कारोबारियों के लिए बड़ी सीख
यह मामला केवल एक कंपनी में कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला नहीं है। यह आधुनिक कारोबारी व्यवस्था के सामने खड़ी एक बड़ी चुनौती की ओर भी संकेत करता है। आज अधिकांश कंपनियां ऑनलाइन बैंकिंग, एक्सेल शीट, डिजिटल भुगतान और फ्यूल कार्ड जैसी व्यवस्थाओं पर निर्भर हैं। लेकिन यदि इन प्रणालियों में मल्टी-लेवल अप्रूवल, लाभार्थी सत्यापन, बैंक रिकंसिलिएशन और नियमित ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं मजबूत न हों तो छोटी-सी चूक भी बड़े वित्तीय नुकसान में बदल सकती है। इस मामले में भी कथित तौर पर एक छोटे भुगतान अंतर से शुरू हुई पड़ताल ने करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय घोटाले का रूप ले लिया।
एक लाख रुपये का सवाल और खुलती गई करोड़ों की परतें!
एक पेट्रोल पंप के भुगतान में आया करीब एक लाख रुपये का अंतर शायद उस समय केवल एक छोटी-सी गलती लगा हो। लेकिन इसी अंतर ने बैंक खातों, एक्सेल शीट, फ्यूल कार्ड, बिल-वाउचर और कथित संपत्ति खरीद तक पहुंचने वाली जांच का रास्ता खोल दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 10.84 करोड़ रुपये की कथित रकम का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है? कौन-कौन से खाते इसमें इस्तेमाल हुए? कितनी रकम किस व्यक्ति या संस्था तक पहुंची? कथित रूप से खरीदी गई संपत्तियों में कितना पैसा लगा? और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोग भी शामिल थे? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा मामले की तह तक पहुंचने में जुटी है। बैंकिंग रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के साथ कथित लेनदेन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति और संस्था की भूमिका पर नजर रखी जा रही है।
एक्सेल की कुछ एंट्रियों में कथित बदलाव से शुरू हुआ यह मामला अब करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय हेराफेरी की जांच में बदल चुका है। आने वाले दिनों में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इस कथित आर्थिक जाल से जुड़े और भी तथ्य सामने आने की संभावना है।
कानूनी नोट
यह समाचार शिकायत, FIR और उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। किसी भी आरोपी के दोषी होने की अंतिम पुष्टि सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।
कानूनी कार्रवाई और धाराएं
मामले की गंभीरता को देखते हुए डुमस पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। FIR में धारा 316(4), 336(2), 336(3), 338, 340(2), 61(2) और 3(5) शामिल हैं। इन धाराओं में आपराधिक विश्वासघात/धोखाधड़ी से संबंधित कृत्य, जालसाजी, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी, जाली दस्तावेज का वास्तविक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल, आपराधिक साजिश तथा कई व्यक्तियों द्वारा साझा मंशा से किए गए कृत्य जैसे आरोप शामिल हैं। ACP (EOW) जी.ए. सरवैया के अनुसार, मामले में अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी परिन टेलर के अलावा प्रतीक टेलर, तेजल टेलर, गीता टेलर, भूपेंद्रसिंह भादोरिया, प्रह्लादसिंह कटारिया, महेंद्र सिंह, प्रियंका परमार और मनीष नायका शामिल हैं।
नोट: समाचार में धाराओं को “पुलिस द्वारा दर्ज FIR में लगाई गई धाराएं” के रूप में लिखना बेहतर रहेगा, ताकि आरोपों और न्यायिक रूप से सिद्ध अपराध के बीच अंतर स्पष्ट बना रहे।







