पकड़िहवा में शानदार तालीमी मुज़ाहिरा, बच्चों ने पेश की अपनी इल्मी और अदबी क़ाबिलियत
- मदरसा दारुस्सलाम में इल्म, अदब और तरबियत का खूबसूरत संगम, बच्चों की प्रस्तुतियों ने उलमा और मेहमानों का जीता दिल
बढ़नी। रामनगर के पकड़िहवा गांव स्थित मदरसा दारुस्सलाम में गुरुवार को इल्म, अदब और तरबियत से सजा शानदार तालीमी मुज़ाहिरा आयोजित किया गया। जमीयत अहले हदीस के जेरे-एहतिमाम आयोजित इस कार्यक्रम में मदरसे के बच्चों ने अपनी इल्मी, दीनी और अदबी सलाहियतों का बेहतरीन मुज़ाहिरा पेश किया। बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद उलमा-ए-किराम, असातिजा, अभिभावकों और मेहमानों का दिल जीत लिया। बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
इल्म के साथ अदब और तरबियत पर जोर
तालीमी मुज़ाहिरे के दौरान बच्चों ने अपनी शिक्षा और ज्ञान से जुड़ी प्रस्तुतियां पेश कीं। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके अंदर अच्छे अखलाक, अदब, दीनी शऊर और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होनी चाहिए। उलमा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर देते हैं और उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा करते हैं। मंच पर अपनी बात रखने से बच्चों की झिझक दूर होती है और उनमें आगे बढ़ने का जज्बा पैदा होता है।
बड़ी संख्या में उलमा और मेहमानों ने की शिरकत
कार्यक्रम में मौलाना मुकीमुद्दीन मदनी, मौलाना याकूब, फारूक अहमद, मोहम्मद उमर, अब्दुल अव्वल, मौलाना अब्दुल रशीद, मोहम्मद महमूद, डॉ. सराफुद्दीन, मास्टर महबूब आलम समेत बड़ी संख्या में उलमा-ए-किराम, असातिजा और मेहमान मौजूद रहे। मेहमानों ने बच्चों की प्रस्तुतियों को ध्यानपूर्वक सुना और उनके प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया।
शानदार निजामत ने बांधा समां
कार्यक्रम की निजामत मौलाना सैयद इरफानुल हक हाशमी ने बेहद खूबसूरत और पुरअसर अंदाज में की। उनकी प्रभावशाली निजामत ने पूरे कार्यक्रम को विशेष रंग दे दिया। उन्होंने कार्यक्रम को क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ाते हुए बच्चों की प्रस्तुतियों और वक्ताओं के विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी निजामत की भी उपस्थित लोगों ने सराहना की।
इंतजामिया की मेहनत और खिदमत रही काबिले-तारीफ
कार्यक्रम को सफल बनाने में मदरसे के उस्ताद इरशाद अहमद की अहम भूमिका रही। इसके साथ ही गांव की इंतजामिया कमेटी के सदस्यों ने भी कार्यक्रम की तैयारियों में पूरी मेहनत और खुलूस के साथ योगदान दिया। मेहमानों की इज्जत-खातिरदारी से लेकर कार्यक्रम की तमाम व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से पूरा किया गया। आयोजन में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने में भी इंतजामिया की भूमिका सराहनीय रही।
बच्चों के रोशन मुस्तकबिल की रखी जा रही बुनियाद
कार्यक्रम में मौजूद उलमा ने कहा कि ऐसे तालीमी कार्यक्रम बच्चों में इल्म की मुहब्बत, अच्छे अखलाक, दीनी शऊर और आत्मविश्वास पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार और सकारात्मक सोच देना उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत बुनियाद तैयार करता है। ऐसे आयोजनों से बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे निखारने का अवसर मिलता है।
“इल्म की रोशनी से ही नई नस्ल का मुस्तकबिल रोशन होगा”
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मदरसे के उस्ताद इरशाद अहमद ने कहा कि “इल्म की रोशनी से ही नई नस्ल का मुस्तकबिल रोशन होगा।” उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और उनकी बेहतर तरबियत समाज की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। बच्चों को सही शिक्षा और बेहतर माहौल देकर उनके भविष्य को मजबूत बनाया जा सकता है। अंत में मदरसे की तरक्की, असातिजा की मेहनतों की कुबूलियत और बच्चों के बेहतर मुस्तकबिल के लिए खास दुआ की गई। दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और उपस्थित लोगों ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।







