मेरठ का नीले ड्रम वाला हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड, 590 दिन बाद सौरभ के परिवार को मिला न्याय

मेरठ का नीले ड्रम वाला हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड, 590 दिन बाद सौरभ के परिवार को मिला न्याय
  • 54 दिन में आरोप-पत्र, 126 तारीखें और 22 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला; अदालत में फैसला सुनते ही छलक पड़े मां रेनू देवी के आंसू, परिवार बोला— जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे लड़ाई


मेरठ, 14 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के मेरठ में बहुचर्चित नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत के इस फैसले के साथ ही करीब 590 दिनों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे सौरभ के परिवार को बड़ी राहत मिली। यह मामला अपनी क्रूरता, शव को छिपाने के तरीके और जांच से लेकर अदालत के फैसले तक की लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण देशभर में चर्चा का विषय बना रहा।

इस मामले में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद लगभग 1,000 पन्नों का आरोप-पत्र दाखिल किया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 22 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए और मुकदमे के दौरान कुल 126 तारीखें लगीं। आखिरकार अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया। हालांकि, मृत्युदंड के मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी।

अदालत में सजा पर करीब 45 मिनट तक चली बहस

बुधवार को सजा के प्रश्न पर सुनवाई के दौरान मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों के भविष्य का हवाला देते हुए अदालत से रहम की अपील की। बचाव पक्ष ने उसके माता-पिता और पारिवारिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। अभियोजन पक्ष ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता और उसके परिणामों को देखते हुए नरमी बरतना उचित नहीं होगा।

जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने अदालत के समक्ष दोनों दोषियों की उम्र, शिक्षा, रोजगार और आय से संबंधित विवरण रखते हुए सख्त सजा की मांग की। उनके अनुसार, साहिल शुक्ला की उम्र लगभग 28 वर्ष है और उसने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है, जबकि मुस्कान रस्तोगी की उम्र भी लगभग 28 वर्ष बताई गई और उसकी शिक्षा आठवीं कक्षा तक है। अभियोजन ने कहा कि इन परिस्थितियों के साथ-साथ अपराध की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

अभियोजन ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का दिया हवाला

अभियोजन पक्ष ने मृत्युदंड की मांग के समर्थन में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का उल्लेख किया। दलील दी गई कि अपराध की गंभीरता, क्रूरता और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उचित दंड दिया जाना चाहिए।

अभियोजन ने महेश बनाम मध्य प्रदेश राज्य, बाबू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, धनंजय चटर्जी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य, खुशविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य और बंटू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य जैसे मामलों का हवाला दिया। इन फैसलों के संदर्भ में अभियोजन ने कहा कि न्यायालय को सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता और न्याय के व्यापक उद्देश्य पर ध्यान देना चाहिए। अभियोजन का तर्क था कि यदि इस तरह के जघन्य अपराध में पर्याप्त कठोर दंड नहीं दिया जाता, तो इससे न्याय व्यवस्था के प्रति आम लोगों के विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।

हत्या से सजा तक: ऐसे आगे बढ़ा मामला

इस सनसनीखेज हत्याकांड की घटनाओं से लेकर अदालत के फैसले तक की प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:

  • 24 फरवरी 2025: सौरभ राजपूत लंदन से मेरठ लौटे। परिवार के अनुसार, वह पत्नी मुस्कान और बेटी के साथ समय बिताने आए थे।

  • 3 मार्च 2025: अभियोजन के अनुसार, इसी दिन सौरभ की हत्या की गई।

  • 4 मार्च 2025: आरोप है कि शव को नीले ड्रम में छिपाकर सीमेंट से बंद किया गया। इसके बाद मुस्कान और साहिल के शिमला-मनाली जाने की बात सामने आई।

  • 18 मार्च 2025: सौरभ के भाई की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

  • 19 मार्च 2025: पुलिस ने घर से नीले ड्रम को काटकर शव बरामद किया। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी।

  • 12 मई 2025: पुलिस ने अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया।

  • 30 सितंबर 2026: जिला अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया।

  • 14 अक्टूबर 2026: अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

इस तरह मामला पुलिस जांच, आरोप-पत्र, गवाहों के बयान और लंबी सुनवाई से गुजरते हुए सजा के चरण तक पहुंचा।

फैसला सुनते ही छलक पड़े मां के आंसू

सजा सुनाए जाने के समय सौरभ की मां रेनू देवी, उनके भाई बबलू और परिवार के अन्य सदस्य अदालत में मौजूद थे। जैसे ही न्यायाधीश ने फैसला सुनाया, रेनू देवी और परिवार की अन्य महिलाओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। परिवार के लिए यह क्षण राहत और वर्षों जैसे लंबे दर्द के एक साथ उमड़ आने का था। रेनू देवी ने कहा कि उनके बेटे के साथ जो हुआ, वह बेहद क्रूर था और दोषियों को मृत्युदंड मिलना चाहिए था। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यदि कानून में इससे भी बड़ी कोई सजा होती, तो वह उसकी मांग करतीं। परिवार का कहना है कि सौरभ की हत्या ने उनकी जिंदगी बदल दी। जिस बेटे से उन्हें परिवार की खुशहाली और भविष्य की उम्मीदें थीं, उसकी असमय मौत ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया।

परिवार के अनुसार, सौरभ बेहतर भविष्य के लिए लंदन गया था

सौरभ की मां ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि उनका बेटा पहले मर्चेंट नेवी में काम करता था और बाद में एक मॉल में भी नौकरी की। इसके बाद वह बेहतर कमाई और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की उम्मीद में लंदन चला गया था। परिवार के मुताबिक, सौरभ हर महीने घर के खर्च के लिए करीब 50 हजार रुपये भेजता था। वह 24 फरवरी 2025 को भारत लौटा था। परिजनों के अनुसार, उसका उद्देश्य पत्नी मुस्कान और बेटी के साथ समय बिताना तथा जन्मदिन मनाना था। रेनू देवी के लिए सबसे बड़ा दर्द यही है कि उनका बेटा परिवार के लिए बेहतर जीवन बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे इस तरह अपनी जान गंवानी पड़ी। उनकी बातें सुनकर परिवार के सदस्यों के साथ मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

पिता गहरे सदमे में, भाई ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने की कही बात

सौरभ के भाई बबलू ने कहा कि इस हत्याकांड ने पूरे परिवार को मानसिक और भावनात्मक रूप से तोड़ दिया है। उनके अनुसार, पिता मुन्ना लाल आज भी गहरे सदमे में हैं और मां बेटे को खोने के दर्द से उबर नहीं पाई हैं। बबलू ने जिला अदालत के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि यदि दोषी इस सजा को चुनौती देते हैं, तो उनका परिवार आगे भी कानूनी लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे सर्वोच्च न्यायालय तक जाएंगे। परिवार के लिए यह फैसला केवल कानूनी कार्रवाई का अंत नहीं, बल्कि अपने बेटे के लिए न्याय की लंबी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। हालांकि, आगे की अपील और न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर अंतिम स्थिति निर्भर करेगी।

छोटी बेटी को लेकर भी परिवार ने रखी अपनी बात

मामले में सौरभ की मां रेनू देवी ने मुस्कान की छोटी बेटी को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उनका दावा है कि बच्ची का संबंध साहिल शुक्ला से है, न कि उनके बेटे सौरभ से। परिवार ने कहा कि वह इस संबंध में डीएनए जांच कराने की मांग नहीं करेगा। बताया गया कि बच्ची का जन्म 24 नवंबर 2025 को जेल में हुआ था, जो सौरभ का जन्मदिन भी था। इस विषय में परिवार की ओर से किए गए दावों और किसी भी जैविक संबंध की पुष्टि को अलग-अलग समझना जरूरी है; केवल परिजनों के बयान के आधार पर पितृत्व को कानूनी या वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं माना जा सकता।

देशभर में चर्चा में रहा नीले ड्रम वाला हत्याकांड

मेरठ का यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में रहा क्योंकि इसमें हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए नीले ड्रम का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी। पुलिस की कार्रवाई, आरोप-पत्र और अदालत में हुई सुनवाई पर लगातार लोगों की नजर बनी रही। अब जिला अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मामले ने एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ लिया है। सौरभ के परिवार ने फैसले पर संतोष जताया है, जबकि आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

यह मामला एक परिवार के गहरे दुख, पुलिस जांच की चुनौती और न्यायालय में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया की कहानी बन गया है। सौरभ के परिजनों के लिए अदालत का फैसला राहत का क्षण जरूर है, लेकिन बेटे को खोने का दर्द उनके जीवन में हमेशा बना रहेगा।