कपास किसानों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा संकल्प: एमएसपी बढ़ा, 'कपास दर्शन' बुलेटिन लॉन्च, ₹5,659 करोड़ के 'कपास कांति मिशन' से बदलेगी तस्वीर
- सीसीआई के 56वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का ऐलान— भारत को बनाएंगे दुनिया का प्रीमियम और टिकाऊ कपास हब
छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र)/नई दिल्ली। देश के करोड़ों कपास उत्पादक किसानों और वस्त्र उद्योग के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के 56वें स्थापना दिवस समारोह में कपास क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने, गुणवत्ता सुधारने और भारतीय कपास को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है।

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित समारोह में केंद्रीय मंत्री ने 'कपास दर्शन' बुलेटिन का शुभारंभ किया, आधुनिक कृषि उपकरण किसानों एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को वितरित किए तथा कपास क्षेत्र के आधुनिकीकरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के उद्देश्य से चार महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर कराए।
इतिहास की सबसे बड़ी एमएसपी खरीद में 24 लाख किसानों को मिला सीधा लाभ
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बताया कि 2025-26 कपास सीजन के दौरान भारतीय कपास निगम ने अपने इतिहास के सबसे बड़े न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद अभियान में से एक को सफलतापूर्वक पूरा किया।
उन्होंने कहा कि—
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522 लाख क्विंटल से अधिक बीज कपास (कपास) की खरीद की गई।
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लगभग 24 लाख किसानों से सीधे खरीद की गई।
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किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में ₹41,530 करोड़ की राशि सीधे हस्तांतरित की गई।
उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर पारदर्शी और सुरक्षित भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
2026-27 के लिए एमएसपी में लगभग 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी
केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि कपास सीजन 2026-27 के लिए बीज कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इससे देशभर के लाखों कपास किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और उनकी आय सुरक्षा और मजबूत होगी।

'कपास कांति मिशन' से बदलेगा भारतीय कपास का भविष्य
गिरिराज सिंह ने हाल ही में स्वीकृत 'कपास उत्पादकता मिशन – कपास कांति' को कपास क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी पहल बताया।
उन्होंने कहा कि ₹5,659 करोड़ की लागत वाला यह पांच वर्षीय मिशन—
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कपास की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाएगा,
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आधुनिक प्रसंस्करण अवसंरचना विकसित करेगा,
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कस्तूरी कॉटन भारत के माध्यम से ब्रांडिंग और ट्रेसबिलिटी को मजबूत करेगा,
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जलवायु-अनुकूल एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देगा,
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भारतीय कपास को वैश्विक बाजार में प्रीमियम पहचान दिलाएगा।
'कपास दर्शन' से किसानों तक पहुंचेगी समय पर वैज्ञानिक सलाह
समारोह के दौरान किसानों के लिए 'कपास दर्शन' बुलेटिन की शुरुआत की गई।
इस बुलेटिन के माध्यम से किसानों को नियमित रूप से—
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मौसम की जानकारी,
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बाजार भाव,
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वैज्ञानिक खेती के सुझाव,
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गुणवत्ता प्रबंधन,
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सरकारी योजनाओं की जानकारी
उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे समय पर सही निर्णय ले सकें।
आधुनिक मशीनें और उपकरण किसानों को सौंपे गए
कार्यक्रम में वैज्ञानिक एवं प्रदूषण-मुक्त कपास उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों और एफपीओ को आधुनिक कृषि उपकरण वितरित किए गए।
इनमें शामिल हैं—
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कपास तोड़ने वाली मशीनें,
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कपास डंठल श्रेडर मशीनें,
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प्रदूषण नियंत्रण किट,
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आधुनिक कृषि उपकरण।
सरकार का उद्देश्य खेती की लागत कम करना, गुणवत्ता बढ़ाना और किसानों की उत्पादकता में वृद्धि करना है।
चार बड़े एमओयू से मिलेगा नई तकनीक और वैश्विक बाजार का लाभ
समारोह का प्रमुख आकर्षण चार महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर रहा—
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सीसीआई और आईसीएआर-सीआईआरसीओटी के बीच जिनिंग एवं प्रेसिंग क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और क्षमता निर्माण।
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सीसीआई और जीआईजेड के बीच कस्तूरी कॉटन भारत के माध्यम से गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी और वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने की साझेदारी।
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सीआईटीआई, आईसीएसी एवं मेरागो/जियोक्लारा के बीच जलवायु-अनुकूल खेती और कार्बन क्रेडिट को बढ़ावा देने का समझौता।
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टेक्सप्रोसिल और मंजीत कॉटन प्राइवेट लिमिटेड के बीच 30,000 कपास गांठों के उत्पादन, प्रमाणीकरण और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने हेतु सहयोग।
किसानों को वैज्ञानिक खेती का दिया गया प्रशिक्षण
कार्यक्रम की शुरुआत किसान उन्मुखीकरण सत्र से हुई, जिसमें—
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कपास प्लकर मशीन,
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डंठल श्रेडर,
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संदूषण नियंत्रण,
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कपास कांति मिशन,
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गुलाबी बॉलवर्म प्रबंधन
पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।
'भारत बनेगा दुनिया का प्रीमियम कॉटन ब्रांड'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 'कस्तूरी कॉटन भारत' कार्यक्रम भारत के प्रीमियम कपास को "खेत से फैशन और वैश्विक बाजार तक" पहुंचाने की महत्वाकांक्षी पहल है। अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन, गुणवत्ता और ट्रेसबिलिटी के माध्यम से भारतीय कपास की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।
वस्त्र मंत्रालय का लक्ष्य— खेत से फैशन तक मजबूत होगी पूरी वैल्यू चेन
वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव (फाइबर) सुश्री पद्मिनी सिंगला ने कहा कि भारत का कपास क्षेत्र नवाचार, उत्पादकता वृद्धि और स्थिरता के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय "खेत से फाइबर, फाइबर से कपड़ा और कपड़े से फैशन" तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
56 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का जश्न
सीसीआई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री ललित कुमार गुप्ता ने भारतीय कपास निगम की 56 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि निगम ने हमेशा पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-आधारित और किसान-केंद्रित खरीद व्यवस्था के माध्यम से किसानों के हितों की रक्षा की है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योग और किसानों के सामूहिक प्रयासों से भारत आने वाले वर्षों में विश्व का अग्रणी, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाला कपास उत्पादक देश बनेगा तथा 'विकसित भारत–2047' के लक्ष्य को साकार करने में कपास क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।







