अनुसूचित जाति के युवा उद्यमी ने रचा इतिहास: भारत का पहला अत्याधुनिक रेनबो ट्राउट आरएएस केंद्र स्थापित, ₹15 करोड़ की सरकारी सहायता से बदली जलीय कृषि की तस्वीर
- सामाजिक न्याय मंत्रालय की उद्यम पूंजी योजना बनी बदलाव की ताकत, तेलंगाना का स्टार्टअप सतत मत्स्य पालन और ग्रामीण रोजगार का नया मॉडल
नई दिल्ली/रंगा रेड्डी (तेलंगाना)। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक अभिनव पहल ने देश में तकनीक आधारित जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। मंत्रालय के अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (VCF-SC) की वित्तीय सहायता से तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के युवा उद्यमी आदित्य ऋत्विक नर्रा ने भारत का पहला उन्नत रीसर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) आधारित रेनबो ट्राउट मछली पालन केंद्र स्थापित किया है।
यह परियोजना न केवल आधुनिक मत्स्य पालन का नया मॉडल बनकर उभरी है, बल्कि अनुसूचित जाति के उद्यमियों को नवाचार, तकनीक और आत्मनिर्भरता के माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा में भी एक प्रेरक उदाहरण बन गई है।
'स्मार्टग्रीन एक्वाकल्चर' ने रचा नया कीर्तिमान
स्मार्टग्रीन एक्वाकल्चर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्थापित यह अत्याधुनिक सुविधा केंद्र एडवांस्ड रीसर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) तकनीक पर आधारित है। इस प्रणाली में पानी का पुनर्चक्रण कर अत्यंत नियंत्रित एवं वैज्ञानिक वातावरण में मछली पालन किया जाता है, जिससे कम जल उपयोग, बेहतर उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण एक साथ संभव हो पाता है।
इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएं—
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36 लाख लीटर पानी की पुनर्चक्रण क्षमता।
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360 टन वार्षिक रेनबो ट्राउट उत्पादन क्षमता।
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आधुनिक हैचरी एवं ग्रो-आउट इकाइयां।
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उन्नत जैव-सुरक्षा (Biosecurity) प्रणाली।
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प्रजाति-विशिष्ट इंजीनियरिंग एवं वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक।
विशेषज्ञों के अनुसार यह सुविधा भारत की सबसे आधुनिक एवं टिकाऊ जलीय कृषि परियोजनाओं में शामिल है।
₹15 करोड़ की सहायता से मिला नई उड़ान का अवसर
परियोजना की संभावनाओं को देखते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत संचालित अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (VCF-SC) ने वर्ष 2022 में कंपनी को ₹15 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की। यह सहायता इक्विटी तथा वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर (OCD) के माध्यम से उपलब्ध कराई गई, जिससे कंपनी आधुनिक अवसंरचना विकसित करने, वैज्ञानिक उपकरण खरीदने तथा अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को गति देने में सफल रही।
वैज्ञानिक मत्स्य पालन को मिली नई दिशा
सरकारी सहयोग से कंपनी ने—
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भारत की पहली उन्नत RAS आधारित रेनबो ट्राउट फार्मिंग सुविधा स्थापित की।
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आधुनिक ग्रो-आउट यूनिट और हार्वेस्टिंग टैंक विकसित किए।
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अत्याधुनिक एक्वाकल्चर मशीनरी स्थापित की।
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वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाया।
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अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा दिया।
इससे देश में उच्च गुणवत्ता वाली, टिकाऊ और वैज्ञानिक मत्स्य पालन प्रणाली को नई पहचान मिली है।
25 लोगों को रोजगार, ₹40 करोड़ की परिसंपत्ति तैयार
इस परियोजना ने आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
अब तक—
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25 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला।
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₹40 करोड़ की परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ।
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कंपनी की नेट वर्थ ₹8 करोड़ तक पहुंच गई।
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अंतरराष्ट्रीय हैचरी, उपकरण प्रदाताओं, जलीय कृषि विशेषज्ञों और वैश्विक मछली बाजारों से व्यावसायिक संबंध स्थापित हुए।
इस मॉडल ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आधुनिक मत्स्य पालन को भी नई दिशा दी है।
'समय पर मिली सरकारी सहायता ने बदला भविष्य'
कंपनी के निदेशक आदित्य ऋत्विक नर्रा ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की VCF-SC योजना के तहत समय पर मिली वित्तीय सहायता ने उनके सपने को वास्तविकता में बदल दिया। उन्होंने कहा कि इस सहयोग की बदौलत वे अत्याधुनिक और टिकाऊ RAS तकनीक पर आधारित मत्स्य पालन अवसंरचना स्थापित कर सके, जिससे वैज्ञानिक तरीके से मछली उत्पादन, ग्रामीण रोजगार और भारत के जलीय कृषि क्षेत्र के सतत विकास में योगदान संभव हुआ।
समावेशी विकास का सफल मॉडल बना यह स्टार्टअप
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना दर्शाती है कि यदि अनुसूचित जाति के उद्यमियों को समय पर वित्तीय सहायता, आधुनिक तकनीक और संस्थागत सहयोग मिले तो वे उभरते क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर की सफल परियोजनाएं स्थापित कर सकते हैं। AVCF-SC योजना के माध्यम से सरकार न केवल अनुसूचित जाति समुदाय के युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि नवाचार, रोजगार सृजन और समावेशी आर्थिक विकास को भी नई गति दे रही है।
तकनीक, पर्यावरण और आत्मनिर्भर भारत का संगम
विशेषज्ञों का मानना है कि RAS आधारित जलीय कृषि प्रणाली भविष्य की आवश्यकता है। यह पारंपरिक मत्स्य पालन की तुलना में कम पानी का उपयोग करती है, उत्पादन बढ़ाती है, पर्यावरणीय प्रभाव कम करती है और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच टिकाऊ कृषि का प्रभावी विकल्प प्रस्तुत करती है।
स्मार्टग्रीन एक्वाकल्चर की यह सफलता केवल एक स्टार्टअप की उपलब्धि नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि सही नीति, समय पर निवेश और आधुनिक तकनीक के समन्वय से भारत सतत जलीय कृषि, ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।







