मेधा को सम्मान, शिक्षा को नई उड़ान: वनवासी समाज के मेधावी विद्यार्थियों का जिलाधिकारी ने बढ़ाया हौसला
- तथागत फाउंडेशन ट्रस्ट एवं जेब्रा फाउंडेशन के संयुक्त आयोजन में मेधावी छात्र-छात्राओं को मिला सम्मान; डीएम रविंद्र कुमार बोले—‘शासन की नीतियों और सामाजिक सरोकारों का समन्वय समाज को प्रगतिपथ पर ले जाता है’

आजमगढ़, 23 अगस्त 2026। शिक्षा केवल रोजगार हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाती है और समाज को विकास की नई दिशा देती है। जब शिक्षा के साथ प्रतिभा को प्रोत्साहन और समाज का सहयोग मिल जाता है, तो वंचित एवं कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए भी सफलता के नए द्वार खुलते हैं।

इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए तथागत फाउंडेशन ट्रस्ट एवं जेब्रा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में हरिऔध कला केंद्र सभागार में वनवासी मेधा सम्मान पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वनवासी समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया गया। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
‘कहने से नहीं, करने से समाज आगे बढ़ता है’
समारोह को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने कहा कि जब शासन की नीतियों के साथ सामाजिक सरोकारों का समन्वय होता है, तो समाज को सही दिशा देने और उसे विकास के पथ पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि केवल बातें करने के बजाय ‘करने में विश्वास रखने वाली सोच’ ही समाज में वास्तविक परिवर्तन लाने का कार्य करती है।

जिलाधिकारी ने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने वनवासी समाज के लोगों से अपील की कि जिन पात्र व्यक्तियों को अभी तक वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, अंत्योदय कार्ड अथवा अन्य पात्रता आधारित सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है, वे जनता दर्शन में उपस्थित होकर अपना आवेदन प्रस्तुत करें। उन्होंने आश्वस्त किया कि पात्र लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कराने का प्रयास किया जाएगा।
‘प्रतिभा किसी वर्ग या परिस्थिति की मोहताज नहीं’
जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा और प्रतिभा को दबाया नहीं जा सकता। प्रत्येक प्रतिभाशाली बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल उन्हें उचित अवसर, सही मार्गदर्शन और निरंतर प्रोत्साहन देने की है। उन्होंने सम्मानित छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज मिला सम्मान उनके लिए केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा भी है। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
मेधावी बच्चों के सम्मान के लिए हरिऔध कला केंद्र निःशुल्क उपलब्ध
वनवासी एवं अंत्योदय वर्ग को सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रशासन की प्रतिबद्धता का उदाहरण कार्यक्रम में भी देखने को मिला। जिलाधिकारी के प्रयास से हरिऔध कला केंद्र ऑडिटोरियम को कार्यक्रम के लिए निशुल्क उपलब्ध कराया गया, ताकि प्रतिभावान बच्चों को सम्मानित करने के साथ समाज में शिक्षा और समान अवसर का सकारात्मक संदेश पहुंचाया जा सके। यह पहल इस बात का संदेश देती है कि प्रतिभा चाहे समाज के किसी भी वर्ग में जन्म ले, उसे आगे बढ़ने के लिए मंच और अवसर मिलना चाहिए।
एनपी सिंह ने शिक्षा को बताया बदलाव की सबसे बड़ी ताकत
समारोह में पूर्व जिलाधिकारी एवं भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एनपी सिंह ने शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर कालखंड और हर संस्कृति में शिक्षा वह प्रकाश रही है, जो अंधकार को दूर करने का काम करती है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति अपने अधिकारों, कर्तव्यों और अपनी संभावनाओं को समझ पाता है। यही जागरूकता उसे समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करती है। एनपी सिंह ने तथागत फाउंडेशन ट्रस्ट की संरचना एवं उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सहित उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में शोषित एवं वंचित समाज से जुड़े वनवासी बच्चों को शिक्षा के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ना ट्रस्ट के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
‘गिलहरी प्रयास’ से समाज में सहयोग की भावना का संदेश
एनपी सिंह ने ट्रस्ट की ओर से किए जा रहे ‘गिलहरी प्रयास’ का उल्लेख करते हुए समाज के प्रत्येक सजग और सक्षम नागरिक से अपने से निचली पायदान पर खड़े जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में बड़ा बदलाव केवल बड़े प्रयासों से ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सहयोग से भी संभव है। यदि सक्षम लोग अपने आसपास जरूरतमंद बच्चों और परिवारों की शिक्षा एवं विकास में सहयोग करें, तो सामाजिक विषमता को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।

आजमगढ़, मऊ और बलिया के लिए कमलेश वनवासी अधिकृत
समारोह के दौरान आजमगढ़, मऊ एवं बलिया जनपदों में भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबंधित कार्यों को देखने के लिए कमलेश वनवासी को तत्काल प्रभाव से अधिकृत किया गया। इस जिम्मेदारी को क्षेत्र में शिक्षा संबंधी गतिविधियों और समन्वय को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
महापुरुषों के नाम पर छात्रवृत्ति और मेधा सम्मान
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण वह रहा, जब वनवासी समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं को समाज के महापुरुषों के नाम पर स्थापित छात्रवृत्ति एवं मेधा सम्मान पुरस्कार प्रदान किए गए। सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया। मंच से मिले सम्मान ने बच्चों के शैक्षिक प्रयासों को नई ऊर्जा दी और उनके भीतर आगे बढ़ने का उत्साह जगाया। समारोह में मौजूद अतिथियों ने विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिभा को सम्मान मिलने से न केवल सम्मानित विद्यार्थी प्रेरित होते हैं, बल्कि उनके साथ पढ़ने वाले अन्य बच्चों में भी आगे बढ़ने की प्रतिस्पर्धात्मक और सकारात्मक भावना पैदा होती है।
दीप प्रज्वलन और स्वागत गीत से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
समारोह का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके उपरांत सपना द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने कार्यक्रम के वातावरण को भावपूर्ण और उत्साहपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम में सामाजिक, शैक्षिक और पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों की मौजूदगी रही। सभी ने वनवासी समाज के प्रतिभावान विद्यार्थियों के सम्मान की पहल को सराहनीय बताते हुए इसे शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक सामाजिक हस्तक्षेप की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
समाजसेवियों और गणमान्य नागरिकों की रही सहभागिता
समारोह में जर्नलिस्ट क्लब के संयोजक डॉ. अरविंद सिंह, संगिनी की सचिव डॉ. माधुरी सिंह, वरिष्ठ पत्रकार सुभाष सिंह, सर्वोदय विद्यालय के प्रबंधक राजेंद्र यादव, चिल्ड्रन एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष कृष्णामोहन त्रिपाठी, चार्टर्ड अकाउंटेंट मोहम्मद नोमान, सुदीक्षा फाउंडेशन की शिखा पांडेय और साज फाउंडेशन की संतोष सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
सभी अतिथियों ने बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे प्रयास समाज के उन वर्गों तक अवसर पहुंचाने में मदद करते हैं, जो संसाधनों के अभाव में अपनी प्रतिभा को पूरी तरह सामने नहीं ला पाते।
सफल संचालन ने बांधे रखा कार्यक्रम का माहौल
कार्यक्रम का सफल संचालन आशुतोष द्विवेदी ने किया। समारोह के दौरान वक्ताओं ने शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और वंचित वर्गों के बच्चों को अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों ने वनवासी समाज के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किए जाने की पहल की सराहना की तथा सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
सम्मान की रोशनी से सपनों को मिली नई उड़ान
वनवासी समाज के मेधावी बच्चों का सम्मान केवल एक कार्यक्रम भर नहीं, बल्कि समान अवसर, शिक्षा और सामाजिक सहभागिता का मजबूत संदेश है। जब किसी बच्चे की मेहनत को मंच मिलता है, तो उसके सपनों को भी नई उड़ान मिलती है। आजमगढ़ में आयोजित यह समारोह इसी उम्मीद का प्रतीक बना कि प्रतिभा किसी जाति, वर्ग या आर्थिक परिस्थिति की सीमा में बंधी नहीं होती। जरूरत है तो केवल उसे पहचानने, अवसर देने और आगे बढ़ने का रास्ता दिखाने की।
शिक्षा की रोशनी जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी, तभी विकास की तस्वीर वास्तव में पूर्ण होगी—और ऐसे सम्मान समारोह उस दिशा में उम्मीद की एक मजबूत किरण बनकर सामने आते हैं।







